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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग III (मूल अधिकार) के अंतर्गत 'समानता के अधिकार' (अनुच्छेद 14-18) और उससे संबंधित न्यायिक निर्णयों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान का अनुच्छेद 14 दो अवधारणाओं—'विधि के समक्ष समता' (Equality before Law) और 'विधियों का समान संरक्षण' (Equal Protection of Laws) का प्रावधान करता है, जिसमें से 'विधि के समक्ष समता' का विचार ब्रिटिश संविधान से लिया गया है और यह एक 'नकारात्मक अवधारणा' है, जबकि 'विधियों का समान संरक्षण' का विचार अमेरिकी संविधान से लिया गया है और यह एक 'सकारात्मक अवधारणा' है।
  2. 2. अनुच्छेद 16(4) के अंतर्गत राज्य को पिछड़े वर्गों के पक्ष में नियुक्तियों या पदों के आरक्षण के लिए प्रावधान करने की शक्ति दी गई है, और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'इन्दिरा साहनी वाद (1993)' में यह स्पष्ट किया गया था कि आरक्षण की यह व्यवस्था केवल प्रारंभिक नियुक्तियों तक ही सीमित है तथा इसे पदोन्नति (Promotion) के मामलों में बिल्कुल भी लागू नहीं किया जा सकता है।
  3. 3. अनुच्छेद 18 के तहत उपाधियों का अंत किया गया है, जिसके अनुसार सेना या विद्या संबंधी सम्मान के अतिरिक्त राज्य कोई भी उपाधि प्रदान नहीं करेगा, तथा भारत का कोई भी नागरिक किसी विदेशी राज्य से राष्ट्रपति की पूर्व सहमति के बिना कोई भी उपाधि स्वीकार नहीं कर सकता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: अनुच्छेद 14 में निहित 'विधि के समक्ष समता' (ब्रिटिश मूल) एक नकारात्मक अवधारणा है क्योंकि इसका अर्थ है कि कानून के समक्ष कोई भी व्यक्ति विशेष नहीं है और कानून के विशेष विशेषाधिकारों का अभाव है। वहीं 'विधियों का समान संरक्षण' (अमेरिकी मूल) एक सकारात्मक अवधारणा है जो समान परिस्थितियों में समान व्यवहार की बात करती है। कथन 2 गलत है: 'इन्दिरा साहनी वाद (1993)' में सर्वोच्च न्यायालय ने यह निर्णय दिया था कि आरक्षण केवल प्रारंभिक नियुक्तियों के लिए है, पदोन्नति के लिए नहीं; किंतु संसद ने इसके प्रभाव को निष्प्रभावी करने के लिए 77वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1995 के माध्यम से संविधान में अनुच्छेद 16(4A) जोड़ा, जिसके तहत पदोन्नति में भी आरक्षण का प्रावधान कर दिया गया। कथन 3 सही है: अनुच्छेद 18 सैन्य और शैक्षणिक उपाधियों को छोड़कर अन्य सभी उपाधियों का अंत करता है और विदेशी राज्यों से उपाधि लेने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति अनिवार्य बनाता है। अधिक अध्ययन के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
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