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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों (विशेषकर 38वें, 42वें और 44वें संशोधन) तथा आपातकालीन उपबंधों (अनुच्छेद 352 से 360) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 38वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1975 द्वारा यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा को किसी भी न्यायालय में न्याययिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे से बाहर रखा जाएगा, जिसे बाद में 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा समाप्त कर दिया गया।
  2. 2. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 के माध्यम से आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों के स्वतः निलंबन के दायरे का विस्तार करते हुए यह उपबंधित किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान देश के किसी भी हिस्से में विधायी और कार्यकारी उपाय केवल इसलिए अमान्य नहीं होंगे कि वे अनुच्छेद 14 और 19 का उल्लंघन करते हैं।
  3. 3. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा यह अनिवार्य किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा या उसके जारी रहने के अनुमोदन से संबंधित प्रस्ताव संसद के प्रत्येक सदन द्वारा अपने कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत द्वारा ही पारित किया जाना चाहिए।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: 38वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1975 ने राष्ट्रपति द्वारा आपातकाल की घोषणा (अनुच्छेद 352) को न्यायिक समीक्षा से परे कर दिया था। हालांकि, जनता पार्टी सरकार द्वारा लाए गए 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 ने इस प्रावधान को हटा दिया और यह स्पष्ट किया कि आपातकाल की उद्घोषणा न्यायिक समीक्षा के अधीन है।
कथन 2 सही है: 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा अनुच्छेद 31-C में विस्तार किया गया और यह प्रावधान किया गया कि राज्य द्वारा नीति निर्देशक तत्वों को लागू करने के लिए बनाए गए किसी कानून को इस आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती कि वह अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 का उल्लंघन करता है। इसके अतिरिक्त, आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 14 से संबंधित सुरक्षा उपायों पर भी इसका प्रभाव पड़ा।
कथन 3 सही है: 44वें संशोधन (1978) से पहले राष्ट्रीय आपातकाल के अनुमोदन के लिए संसद के दोनों सदनों का साधारण बहुमत पर्याप्त था, लेकिन 44वें संशोधन के बाद इसे बदलकर संसद के दोनों सदनों द्वारा 'विशेष बहुमत' (कुल सदस्यों का बहुमत तथा उपस्थित और मत देने वालों का दो-तिहाई बहुमत) कर दिया गया ताकि इसका दुरुपयोग रोका जा सके। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पढ़ें।
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