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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य की कार्यपालिका, विशेष रूप से राज्यपाल की शक्तियों, मुख्यमंत्री की नियुक्ति और मंत्रिपरिषद के गठन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 164 के अंतर्गत मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर करता है, तथा छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और ओडिशा राज्यों में जनजातीय कल्याण मंत्री का भारसाधक एक पृथक मंत्री होना अनिवार्य किया गया है।
- 2. राज्यपाल को राज्य के उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति, स्थानांतरण तथा उनकी सेवा शर्तों को निर्धारित करने की पूर्ण एवं अंतिम कार्यकारी शक्ति प्राप्त है, और इस प्रक्रिया में राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति लेना राज्यपाल के लिए वैकल्पिक होता है।
- 3. अनुच्छेद 163 के अनुसार राज्यपाल को अपनी कृत्यों के निर्वहन में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी जिसका प्रधान मुख्यमंत्री होगा, किंतु यदि कोई प्रश्न यह उठता है कि कोई विषय राज्यपाल के विवेकानुसार है या नहीं, तो राज्यपाल का इस पर किया गया निर्णय अंतिम होगा और उसकी वैधता को किसी भी न्यायालय में इस आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती है कि उसे अपना विवेक का प्रयोग करना चाहिए था या नहीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164 के अनुसार मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर करता है। इसी अनुच्छेद के परंतुक के अनुसार छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और ओडिशा राज्यों में जनजातीय कल्याण के लिए एक पृथक मंत्री का होना अनिवार्य किया गया है। कथन 2 गलत है: राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा भारत के मुख्य न्यायमूर्ति और संबंधित राज्य के राज्यपाल के परामर्श से की जाती है, न कि राज्यपाल द्वारा। राज्यपाल को उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति या स्थानांतरण की शक्ति प्राप्त नहीं है। कथन 3 सही है: अनुच्छेद 163 के अनुसार राज्यपाल को सहायता और सलाह देने के लिए मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मंत्रिपरिषद होती है। साथ ही, संविधान यह स्पष्ट करता है कि यदि कोई विषय राज्यपाल के स्वविवेक से संबंधित है या नहीं, तो उस पर राज्यपाल का निर्णय अंतिम होता है और इस आधार पर न्यायालय में प्रश्न नहीं उठाया जा सकता। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था को पढ़ें।
Related Questions
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भारतीय संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5-11) के अंतर्गत 'भारतीय नागरिकता' और उससे संबंधित उपबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 9 के स्पष्ट प्रावधान के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त कर लेता है, तो अनुच्छेद 5, 6 या 8 के अंतर्गत प्राप्त उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाएगी, किंतु यह नियम उन मामलों में लागू नहीं होता जहाँ भारत सरकार और संबंधित विदेशी राष्ट्र के बीच दोहरी नागरिकता का विशिष्ट संधि समझौता हुआ हो।
2. संविधान के अनुच्छेद 11 के तहत संसद को नागरिकता के अर्जन और समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों के संबंध में विनियमन करने की संपूर्ण शक्ति प्रदान की गई है, और इसी शक्ति का प्रयोग करते हुए संसद ने 'भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955' (Citizenship Act, 1955) पारित किया था, जिसमें अब तक कई बार संशोधन किए जा चुके हैं।
3. अनुच्छेद 10 के अनुसार, प्रत्येक व्यक्ति, जो इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों में से किसी के अधीन भारत का नागरिक है या समझा जाता है, संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए ऐसी नागरिकता का हकदार बना रहेगा, जिसका तात्पर्य यह है कि संसद किसी भी नागरिक की नागरिकता को बिना किसी विधि निर्माण के मनमाने ढंग से कार्यकारी आदेश द्वारा छीन सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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संविधान का कौन सा संशोधन 'मिनी कॉन्स्टिट्यूशन' कहलाता है?
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भारतीय संविधान के भाग, अनुसूचियाँ और राजभाषा से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के भाग XVII के अंतर्गत अनुच्छेद 348 में यह उपबंध किया गया है कि उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों की सभी कार्रवाइयाँ तथा संसद और राज्य विधानमंडलों द्वारा पारित सभी अधिनियमों व विधेयकों के पाठ अनिवार्य रूप से केवल हिंदी भाषा में ही होंगे, और इसके लिए अंग्रेजी भाषा के प्रयोग की कोई अनुमति नहीं दी गई है।
2. संविधान की नौवीं अनुसूची को प्रथम संविधान संशोधन अधिनियम, 1951 द्वारा जोड़ा गया था, जिसका उद्देश्य जमींदारी प्रथा का उन्मूलन करना था, तथा इस अनुसूची में शामिल किए जाने वाले कानूनों की न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) पर 'केशवानंद भारती वाद' (1973) के पश्चात से कोई न्यायिक प्रतिबंध नहीं है, अर्थात् उन्हें किसी भी आधार पर चुनौती दी जा सकती है।
3. संविधान की आठवीं अनुसूची में बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली भाषाओं को 92वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 के द्वारा शामिल किया गया था, जिससे इस अनुसूची में कुल भाषाओं की संख्या बढ़कर 22 हो गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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ल्यूमेन (Lumen) एकक है?
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भारतीय संसद की विधाई प्रक्रिया और लोकसभा तथा राज्यसभा की शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 109 के अंतर्गत धन विधेयक (Money Bill) केवल लोकसभा में ही पुनःस्थापित किया जा सकता है, और राज्यसभा को इस विधेयक पर विचार करने तथा अपनी सिफारिशें देने के लिए अधिकतम 14 दिनों की समयावधि प्राप्त होती है, जिसके भीतर यदि राज्यसभा कोई संस्तुति नहीं करती है, तो वह विधेयक दोनों सदनों द्वारा उस रूप में पारित मान लिया जाता है जिस रूप में उसे लोकसभा ने पारित किया था।
2. संविधान के अनुच्छेद 108 के अनुसार दोनों सदनों के बीच विधायी गतिरोध (Deadlock) को दूर करने के लिए राष्ट्रपति द्वारा बुलाई जाने वाली संयुक्त बैठक की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष द्वारा की जाती है, और यदि लोकसभा अध्यक्ष अनुपस्थित हैं, तो इस संयुक्त बैठक की अध्यक्षता राज्यसभा के सभापति (उपराष्ट्रपति) द्वारा की जाती है।
3. साधारण विधियों के निर्माण के मामले में राज्यसभा को लोकसभा के समान ही शक्तियाँ प्राप्त हैं, किंतु संविधान के अनुच्छेद 249 के तहत राज्यसभा उपस्थित और मतदान करने वाले कम से कम दो-तिहाई सदस्यों के समर्थन से उपस्थित संकल्प द्वारा संसद को राज्य सूची (State List) के किसी विषय पर राष्ट्रीय हित में कानून बनाने के लिए अधिकृत कर सकती है।
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