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Indian Polity
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSC) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 316 के अनुसार संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है, किंतु इन सभी को उनके पद से हटाने का अधिकार केवल और केवल भारत के राष्ट्रपति को ही प्राप्त है, राज्यपाल को नहीं।
- 2. संविधान के अनुच्छेद 317 के अंतर्गत लोक सेवा आयोग के किसी भी सदस्य या अध्यक्ष को उसके पद से 'कदाचार' (Misbehavior) के आधार पर तब तक नहीं हटाया जा सकता जब तक कि उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) द्वारा राष्ट्रपति द्वारा निर्देशित जाँच के बाद ऐसी हटाने की संस्तुति न कर दी जाए, और उच्चतम न्यायालय की यह जाँच रिपोर्ट राष्ट्रपति के लिए पूर्णतः बाध्यकारी होती है।
- 3. संघ लोक सेवा आयोग या किसी राज्य लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष अपने कार्यकाल की समाप्ति के पश्चात भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी अन्य नियोजन (Employment) के पात्र नहीं होते हैं, सिवाय इसके कि वे संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य के रूप में अथवा किसी राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में आगे नियुक्ति प्राप्त कर सकें।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 316 के तहत UPSC के अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा और SPSC के अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है, परंतु इन्हें हटाने की शक्ति केवल राष्ट्रपति के पास होती है (राज्यपाल के पास नहीं)। कथन 2 सही है: अनुच्छेद 317 के अनुसार कदाचार के आधार पर हटाने के लिए राष्ट्रपति मामले को उच्चतम न्यायालय के पास भेजते हैं, और सुप्रीम कोर्ट की संस्तुति राष्ट्रपति के लिए बाध्यकारी होती है। कथन 3 गलत है क्योंकि संघ लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष अपने कार्यकाल के बाद संघ या राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य नियोजन का पात्र नहीं होता है, लेकिन SPSC का अध्यक्ष UPSC का अध्यक्ष या सदस्य बनने अथवा किसी अन्य SPSC का अध्यक्ष बनने के लिए पात्र होता है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पढ़ें।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के संवैधानिक उपबंधों तथा उनकी शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 71 के अनुसार राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के निर्वाचन से उत्पन्न या उससे संबंधित सभी शंकाओं और विवादों की जाँच और विनिश्चय उच्चतम न्यायालय द्वारा किया जाएगा और उसका निर्णय अंतिम होगा, तथा यदि किसी व्यक्ति का राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के रूप में निर्वाचन शून्य घोषित कर दिया जाता है, तो उसके द्वारा अपने पद के कर्तव्यों के निष्पादन में उस घोषणा की तारीख से पूर्व किए गए कार्य अवैध हो जाते हैं।
2. संविधान के अनुच्छेद 74 के अनुसार राष्ट्रपति को उसके कृत्यों का प्रयोग करने में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी जिसका प्रधान प्रधानमंत्री होगा, और राष्ट्रपति इस सलाह के अनुसार कार्य करेगा; किंतु 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा यह प्रावधान जोड़ा गया कि राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद से ऐसी सलाह पर 'पुनर्विचार' करने के लिए कह सकता है और राष्ट्रपति ऐसे पुनर्विचार के पश्चात दी गई सलाह के अनुसार ही कार्य करेगा।
3. अनुच्छेद 75(3) के अनुसार मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, जिसका विधिक और संवैधानिक निहितार्थ यह है कि मंत्रिमंडल का प्रत्येक निर्णय पूरी मंत्रिपरिषद का निर्णय माना जाता है और यदि लोकसभा में मंत्रिपरिषद के विरुद्ध कोई अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो प्रधानमंत्री सहित सभी मंत्रियों को त्यागपत्र देना पड़ता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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प्रस्तावना को संविधान की 'आत्मा' किसने कहा?
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSC) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 315 के अंतर्गत प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्य लोक सेवा आयोग का प्रावधान किया गया है, तथा दो या अधिक राज्यों के लिए एक 'संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग' (JSPSC) का गठन संबंधित राज्यों के अनुरोध पर संसद द्वारा एक अधिनियम के माध्यम से किया जाता है, जिसके अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
2. संविधान के अनुच्छेद 317 के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग या किसी राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य को केवल राष्ट्रपति द्वारा ही उनके पद से हटाया जा सकता है, भले ही राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्यों की नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है।
3. संघ लोक सेवा आयोग के व्यय, जिनमें उसके सदस्यों या कर्मचारियों को देय या उनके संबंध में कोई वेतन, भत्ते और पेंशन शामिल हैं, संबंधित राज्य की संचित निधि पर भारित (Charged) होते हैं, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के ऐसे सभी व्यय भारत की संचित निधि पर भारित होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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