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Indian Polity
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राज्य की कार्यपालिका के संदर्भ में राज्यपाल की शक्तियों, अध्यादेश निर्माण की प्रक्रिया तथा मुख्यमंत्री की स्थिति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 213 के अंतर्गत राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश की शक्ति राज्य विधानमंडल की कानून बनाने की शक्ति के साथ पूर्णतः समवर्ती होती है, किंतु राज्यपाल किसी भी परिस्थिति में ऐसा अध्यादेश प्रख्यापित नहीं कर सकता है यदि राज्य विधानमंडल का सत्र चल रहा हो अथवा संबंधित अध्यादेश के समान उपबंधों वाले किसी विधेयक को राज्य विधानमंडल में बिना राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति के प्रस्तुत नहीं किया जा सकता था।
  2. 2. संविधान के अनुच्छेद 164 के अनुसार मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री की सलाह पर की जाती है, तथा मंत्रियों के बीच विभागों का आवंटन और फेरबदल करना राज्यपाल का वैधानिक और स्वविवेक अधिकार है, जिसमें मुख्यमंत्री की सहमति अनिवार्य नहीं होती है।
  3. 3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'एस. आर. बोम्मई वाद' (1994) में यह स्पष्ट किया गया कि राज्यपाल द्वारा किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356) की सिफारिश करने से पूर्व मुख्यमंत्री को सदन के पटल पर अपना बहुमत साबित करने का अवसर दिया जाना अनिवार्य है, और बहुमत परीक्षण सदन के भीतर ही होना चाहिए, न कि राजभवन के परिसर में।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 213 के अनुसार राज्यपाल अध्यादेश तभी प्रख्यापित कर सकता है जब राज्य विधानमंडल सत्र में नहीं होता है, और इसके विषय वही होते हैं जिन पर राज्य विधानमंडल कानून बना सकता है। साथ ही, जिन मामलों में विधेयक प्रस्तुत करने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति आवश्यक होती है, उन मामलों में राज्यपाल बिना राष्ट्रपति की अनुमति के अध्यादेश प्रख्यापित नहीं कर सकता। कथन 2 गलत है क्योंकि मंत्रियों के बीच विभागों का आवंटन और फेरबदल करने का अधिकार मुख्यमंत्री का होता है, न कि राज्यपाल का; राज्यपाल केवल मुख्यमंत्री की सलाह पर ही विभागों का आबंटन करता है। कथन 3 सही है क्योंकि 'एस. आर. बोम्मई वाद' (1994) में उच्चतम न्यायालय ने यह अभिनिर्धारित किया था कि सरकार के बहुमत का परीक्षण राजभवन में नहीं बल्कि राज्य विधानसभा के पटल पर ही किया जाना चाहिए। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पढ़ें।
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