त्वरित लिंक्स
Indian Polity
21 views
भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों और आपातकालीन उपबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा अनुच्छेद 352 में संशोधन करके यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग के लिए की जा सकती है, तथा राष्ट्रपति मंत्रिमंडल की लिखित सिफारिश प्राप्त होने पर ही राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर सकता है।
- 2. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 के माध्यम से राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 20 और अनुच्छेद 21 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को निलंबित करने की शक्ति को समाप्त कर दिया गया, अर्थात अब आपातकाल में भी इन दोनों अनुच्छेदों को निलंबित नहीं किया जा सकता है।
- 3. संविधान के अनुच्छेद 356 के अंतर्गत राष्ट्रपति शासन की अधिकतम अवधि को 44वें संविधान संशोधन द्वारा घटाकर एक वर्ष कर दिया गया था, किंतु यदि राष्ट्रीय आपातकाल संपूर्ण देश में या संबंधित राज्य में प्रवृत्त हो, और निर्वाचन आयोग यह प्रमाणित कर दे कि राज्य में विधानसभा के चुनाव कराना वर्तमान परिस्थितियों में संभव नहीं है, तो इसे एक वर्ष से आगे बढ़ाया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है: अनुच्छेद 352 में 'मंत्रिमंडल की लिखित सिफारिश' (Written recommendation of the Cabinet) का प्रावधान 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा जोड़ा गया था, न कि 42वें संविधान संशोधन द्वारा। 42वें संशोधन के समय 'प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति' शब्द था। हालांकि, राष्ट्रीय आपातकाल को संपूर्ण देश या उसके किसी भाग में लागू करने का प्रावधान 42वें संशोधन द्वारा ही जोड़ा गया था। कथन 2 सही है: 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 ने यह सुनिश्चित किया कि राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान भी अनुच्छेद 20 (अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण) और अनुच्छेद 21 (प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण) द्वारा प्रदत्त अधिकारों को कभी भी निलंबित नहीं किया जा सकता है। कथन 3 गलत है: सामान्य परिस्थितियों में अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन) की अधिकतम अवधि 3 वर्ष होती है (जिसे हर 6 महीने पर संसद की स्वीकृति से बढ़ाया जा सकता है), न कि एक वर्ष। 44वें संशोधन द्वारा राष्ट्रपति शासन को एक वर्ष से अधिक (अधिकतम तीन वर्ष तक) बढ़ाने के लिए दो विशेष शर्तें (राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा और निर्वाचन आयोग का प्रमाण पत्र) अनिवार्य की गई थीं, लेकिन इसकी अधिकतम अवधि को एक वर्ष नहीं किया गया था। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
Related Questions
→
अनुच्छेद 21A किससे संबंधित है?
→
भारतीय संविधान के भाग-IV के अंतर्गत वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP - Article 36-51) की प्रकृति, संशोधनों और न्यायिक व्याख्या के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 39A के तहत जोड़ी गई 'समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता' की व्यवस्था और अनुच्छेद 43A के तहत 'उद्योगों के प्रबंधन में श्रमिकों की भागीदारी' का उपबंध मूल संविधान में निहित थे, जिन्हें बाद में 44वें संविधान संशोधन द्वारा संशोधित किया गया।
2. सर्वोच्च न्यायालय ने 'चाम्पाकम दोरैराजन बनाम मद्रास राज्य (1951)' मामले में यह निर्धारित किया था कि नीति निर्देशक तत्व मूल अधिकारों के अधीनस्थ हैं और किसी भी संघर्ष की स्थिति में मूल अधिकार ही प्रभावी होंगे, किंतु बाद के न्यायिक निर्णयों (विशेषकर केशवानंद भारती और मिनर्वा मिल्स वाद) में यह स्पष्ट किया गया कि संविधान की मूल आत्मा इन दोनों के बीच सामंजस्य और संतुलन पर टिकी है।
3. संविधान के अनुच्छेद 45 में 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 के माध्यम से संशोधन करके 'छह वर्ष से कम आयु के बालकों के लिए प्रारंभिक बचपन देखरेख और शिक्षा (ECCV/ECE)' का उपबंध अंतःस्थापित किया गया, जबकि मूल रूप से इस अनुच्छेद में चौदह वर्ष की आयु तक के बालकों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के ऐतिहासिक विकास के क्रम में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित अधिनियमों और उनके प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चार्टर अधिनियम, 1853 के द्वारा पहली बार गवर्नर-जनरल की परिषद के विधायी और कार्यकारी कार्यों को पृथक किया गया, तथा परिषद में छह नए पार्षदों जिन्हें 'विधान पार्षद' (Legislative Councillors) कहा गया, को जोड़कर एक अखिल भारतीय केंद्रीय विधान परिषद की स्थापना की गई।
2. भारत सरकार अधिनियम, 1858 के द्वारा 'नियंत्रण बोर्ड' (Board of Control) और 'निदेशक कोर्ट' (Court of Directors) की द्वैध शासन प्रणाली को समाप्त कर दिया गया, तथा भारत के राज्य सचिव (Secretary of State for India) के पद का सृजन किया गया जो ब्रिटिश कैबिनेट का सदस्य था और उसकी सहायता के लिए 15 सदस्यीय परिषद का गठन किया गया।
3. भारतीय परिषद अधिनियम, 1861 के माध्यम से गवर्नर-जनरल की कार्यकारी परिषद में पहली बार किसी भारतीय को गैर-सरकारी सदस्य के रूप में शामिल करने का प्रावधान किया गया, और इसी अधिनियम के तहत लॉर्ड कैनिंग द्वारा 'पोर्टफोलियो प्रणाली' (विभागीय प्रणाली) को औपचारिक मान्यता दी गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
लोकसभा अध्यक्ष अपना इस्तीफा किसे देते हैं?
→
भारतीय नागरिकता (Article 5-11) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 8 के अनुसार, भारत से बाहर रहने वाले भारतीय मूल के कुछ व्यक्तियों (Persons of Indian Origin) की नागरिकता के पंजीकरण का अधिकार केवल भारतीय विदेश मंत्रालय को प्राप्त है, न कि भारत के राजनयिक या कौंसुल्यात्मक प्रतिनिधियों को।
2. भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत 'प्राकृतिक रूप से नागरिकता' (Citizenship by Naturalization) प्राप्त करने के लिए यह एक अनिवार्य शर्त है कि आवेदक संविधान की आठवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट भाषाओं में से कम से कम किसी एक भाषा का पर्याप्त ज्ञान रखता हो।
3. अनुच्छेद 10 के अंतर्गत भारत के प्रत्येक नागरिक की नागरिकता का अधिकार संसद द्वारा बनाई गई विधियों के अधीन रहते हुए निरंतर बना रहता है, जिसका तात्पर्य यह है कि संसद किसी भी नागरिक की नागरिकता को बिना किसी विधिक प्रक्रिया के मनमाने ढंग से समाप्त कर सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.