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Indian Polity
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) में उल्लिखित 'स्वतंत्रता, समता और बंधुता' (Liberty, Equality, and Fraternity) के आदर्शों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान की प्रस्तावना में वर्णित स्वतंत्रता, समता और बंधुता के ये तीनों आदर्श फ्रांसीसी क्रांति (1789) से प्रेरित हैं, जिन्हें भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान भी प्रमुखता से स्वीकार किया गया था।
- 2. प्रस्तावना में पाँच प्रकार की स्वतंत्रताओं — विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना — का उल्लेख किया गया है, तथा यह सभी स्वतंत्रताएँ प्रकृति से न्यायसंगत (Justiciable) हैं, अर्थात इनके उल्लंघन पर सीधे उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जा सकता है।
- 3. प्रस्तावना में 'समता' (Equality) के अंतर्गत प्रतिष्ठा और अवसर की समता का उपबंध किया गया है, जबकि 'बंधुता' का उद्देश्य व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता तथा अखंडता को सुनिश्चित करना है, जिसमें 'अखंडता' शब्द मूल संविधान में नहीं था बल्कि इसे 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़ा गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि भारतीय संविधान की प्रस्तावना में निहित 'स्वतंत्रता, समता और बंधुता' के आदर्श 1789 की फ्रांसीसी क्रांति के आदर्शों से लिए गए हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि प्रस्तावना में उल्लिखित स्वतंत्रता, समता आदि के आदर्श और प्रस्तावना स्वयं 'अप्रवर्तनीय' (Non-justiciable) हैं, अर्थात इन्हें सीधे न्यायालय द्वारा लागू नहीं कराया जा सकता है (इनके प्रवर्तन के लिए भाग III के मूल अधिकार हैं)। कथन 3 सही है क्योंकि प्रस्तावना में प्रतिष्ठा और अवसर की समता की बात की गई है, तथा 'अखंडता' (Integrity) शब्द को 42वें संविधान संशोधन, 1976 द्वारा प्रस्तावना में जोड़ा गया था। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के विस्तृत अध्याय का अध्ययन करें।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति की निर्वाचन प्रक्रिया, प्रधानमंत्री के उत्तरदायित्व और मंत्रिपरिषद से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 66(1) के अनुसार उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सभी सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचकगण द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है, जिसमें संसद के मनोनीत सदस्य भी भाग लेते हैं, किंतु राज्य विधानमंडलों के सदस्य इसमें कोई भाग नहीं लेते हैं।
2. अनुच्छेद 75(3) के उपबंध के अनुसार मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है, जिसका संवैधानिक तात्पर्य यह है कि यदि लोकसभा में किसी एक कैबिनेट मंत्री के विरुद्ध भी अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाता है या प्रधानमंत्री त्यागपत्र दे देता है, तो पूरी मंत्रिपरिषद का विघटन हो जाता है, क्योंकि सभी मंत्री एक साथ तैरते और एक साथ डूबते हैं।
3. अनुच्छेद 78 के अंतर्गत प्रधानमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह संघ के प्रशासन और विधान संबंधी प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राष्ट्रपति को संसूचित करे, और यदि राष्ट्रपति ऐसी कोई सूचना माँगता है, तो उसे उपलब्ध कराए, भले ही वह निर्णय प्रधानमंत्री के व्यक्तिगत अधिकार क्षेत्र का हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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सर्वोच्च न्यायालय के जजों की सेवा निवृत्ति आयु क्या है?
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संसद की बैठक की कोरम?
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भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं के वित्तीय अधिकार, राज्य वित्त आयोग और लेखा परीक्षण (Audit) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 243-H के अनुसार, किसी राज्य का विधानमंडल विधि द्वारा किसी पंचायत को कर, शुल्क, टोल और फीस आदि आरोपित करने, संगृहीत करने तथा विनियमित करने के लिए अधिकृत कर सकता है, साथ ही राज्य की संचित निधि से पंचायतों को सहायता-अनुदान (Grants-in-aid) देने के प्रावधान भी कर सकता है।
2. अनुच्छेद 243-I के तहत प्रत्येक राज्य का राज्यपाल पंचायती राज संस्थाओं की वित्तीय स्थिति की समीक्षा के लिए हर पाँच वर्ष की समाप्ति पर एक 'राज्य वित्त आयोग' का गठन करेगा, और इस आयोग की संरचना तथा सदस्यों की योग्यता का निर्धारण संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा अपने स्वविवेक से किया जाता है, जिसमें राज्य विधानमंडल की कोई विधाई भूमिका नहीं होती है।
3. संविधान के अनुच्छेद 243-J के उपबंधों के अनुसार, राज्य का विधानमंडल विधि द्वारा पंचायतों केaccounts (लेखाओं) के रख-रखाव और उनकी लेखा परीक्षा (Audit) से संबंधित प्रावधान कर सकता है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि सार्वजनिक धन का उपयोग पारदर्शी तरीके से हो रहा है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारत के निर्वाचन आयोग और चुनाव सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अनुसार निर्वाचन आयोग एक स्थायी और स्वतंत्र निकाय है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के अध्यधीन की जाती है, और मुख्य चुनाव आयुक्त को उसके पद से हटाने की प्रक्रिया और आधार उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के समान ही होते हैं, जबकि अन्य चुनाव आयुक्तों को मुख्य चुनाव आयुक्त की संस्तुति के बिना नहीं हटाया जा सकता।
2. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (Representation of the People Act, 1951) की धारा 77 के तहत किसी निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव प्रचार के दौरान राजनीतिक दलों द्वारा व्यय की जाने वाली अधिकतम सीमा तय करने का अधिकार निर्वाचन आयोग के पास है, और इस अधिनियम के अंतर्गत यदि कोई उम्मीदवार अपने चुनाव खर्च का हिसाब निर्धारित समय के भीतर प्रस्तुत नहीं करता है, तो निर्वाचन आयोग उसे तीन साल की अवधि के लिए चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित कर सकता है।
3. वर्ष 1989 के 61वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा मताधिकार की आयु को 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दिया गया, तथा इसी संशोधन के माध्यम से बहु-सदस्यीय निर्वाचन आयोग की अवधारणा को हमेशा के लिए अनिवार्य बनाते हुए संविधान के अनुच्छेद 324 में स्थायी रूप से कम से कम तीन चुनाव आयुक्तों का होना法定 रूप से तय किया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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