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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत प्रधानमंत्री की नियुक्ति, मंत्रिपरिषद के गठन तथा केंद्रीय मंत्रिमंडल की शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 75(1) के अनुसार प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाएगी और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री की सलाह पर की जाएगी, किंतु यह संवैधानिक रूप से आवश्यक नहीं है कि प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने से पूर्व लोकसभा में अपना बहुमत सिद्ध करे, राष्ट्रपति उसे बहुमत सिद्ध करने के लिए एक उचित समय दे सकते हैं।
- 2. 'कैबिनेट' (Cabinet) शब्द का मूल संविधान के अनुच्छेद 352 में कोई उल्लेख नहीं था, और इसे 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा अनुच्छेद 352 में अंतःस्थापित किया गया था ताकि राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा के लिए मंत्रिमंडल की लिखित संस्तुति को अनिवार्य बनाया जा सके।
- 3. केंद्रीय मंत्रिपरिषद के सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धांत के अंतर्गत यदि लोकसभा द्वारा प्रधानमंत्री या संपूर्ण मंत्रिपरिषद के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित कर दिया जाता है, तो प्रधानमंत्री सहित सभी मंत्रियों को त्यागपत्र देना पड़ता है, और यदि किसी एकल मंत्री के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित होता है, तो केवल उस संबंधित मंत्री को ही त्यागपत्र देना होता है, पूरी सरकार पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 75(1) के तहत राष्ट्रपति प्रधानमंत्री को नियुक्त करते हैं। उच्चतम न्यायालय के अनेक निर्णयों (जैसे सरोज रेड्डी बनाम राज्यपाल मामला) में यह स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री की नियुक्ति के समय लोकसभा में बहुमत का पूर्व-परीक्षण अनिवार्य नहीं है, बल्कि राष्ट्रपति अपने विवेक से प्रधानमंत्री नियुक्त कर सकते हैं जो बाद में निर्धारित समयावधि में बहुमत सिद्ध करता है।
कथन 2 सही है: मूल संविधान में 'कैबिनेट' (मंत्रिमंडल) शब्द का प्रयोग नहीं किया गया था। इसे वर्ष 1978 के 44वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा अनुच्छेद 352 के खंड (3) में जोड़ा गया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले मंत्रिमंडल की लिखित संस्तुति पर ही हो।
कथन 3 गलत है: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75(3) के अनुसार मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है। 'सामूहिक उत्तरदायित्व' का अर्थ है कि 'हम सब साथ तैरते हैं और साथ डूबते हैं'। यदि लोकसभा द्वारा किसी एक मंत्री के विरुद्ध भी अविश्वास प्रस्ताव पारित कर दिया जाता है या नीतिगत मामले पर मतभेद के कारण त्यागपत्र देना पड़ता है, तो यह पूरी मंत्रिपरिषद (सरकार) का पतन माना जाता है, न कि केवल उस एकल मंत्री का। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
कथन 2 सही है: मूल संविधान में 'कैबिनेट' (मंत्रिमंडल) शब्द का प्रयोग नहीं किया गया था। इसे वर्ष 1978 के 44वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा अनुच्छेद 352 के खंड (3) में जोड़ा गया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले मंत्रिमंडल की लिखित संस्तुति पर ही हो।
कथन 3 गलत है: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75(3) के अनुसार मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है। 'सामूहिक उत्तरदायित्व' का अर्थ है कि 'हम सब साथ तैरते हैं और साथ डूबते हैं'। यदि लोकसभा द्वारा किसी एक मंत्री के विरुद्ध भी अविश्वास प्रस्ताव पारित कर दिया जाता है या नीतिगत मामले पर मतभेद के कारण त्यागपत्र देना पड़ता है, तो यह पूरी मंत्रिपरिषद (सरकार) का पतन माना जाता है, न कि केवल उस एकल मंत्री का। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
Related Questions
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भारतीय संसद की विधाई प्रक्रिया और वित्तीय विधньों (Financial Bills) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 117(1) के अंतर्गत आने वाला 'वित्तीय विधेयक (श्रेणी-I)' केवल लोकसभा में ही पुनःस्थापित किया जा सकता है और इसे प्रस्तुत करने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश आवश्यक होती है, किंतु राज्यसभा इस विधेयक को पारित करने, अस्वीकार करने या इसमें संशोधन करने की पूर्ण शक्ति रखती है (बशर्ते संशोधन करों से संबंधित न हो)।
2. 'वित्तीय विधेयक (श्रेणी-II)', जिसमें संचित निधि से व्यय करने के उपबंध होते हैं, को संसद के किसी भी सदन में पुनःस्थापित किया जा सकता है और इसके लिए राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश का होना आवश्यक नहीं होता है, लेकिन इसे पारित कराने के लिए संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) का प्रावधान नहीं है।
3. लोकसभा द्वारा पारित किसी धन विधेयक (Money Bill) को जब राज्यसभा के पास भेजा जाता है, तो राज्यसभा के पास इसे अधिकतम 14 दिनों तक रोकने की शक्ति होती है, और यदि इस अवधि के भीतर राज्यसभा विधेयक को वापस नहीं करती है या अपनी सिफारिशें नहीं भेजती है, तो वह दोनों सदनों द्वारा उस रूप में पारित मान लिया जाता है जिस रूप में वह लोकसभा द्वारा पारित किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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राज्य की कार्यपालिका के संदर्भ में राज्यपाल की शक्तियों, अध्यादेश निर्माण तथा मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद के संबंधों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 213 के अंतर्गत राज्यपाल को अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति प्राप्त है, और यह शक्ति राज्य विधानमंडल के विश्राम काल में प्रयोग की जाती है, किंतु राज्यपाल अपनी इस विधाई शक्ति का प्रयोग बिना मंत्रिपरिषद की सलाह के अपने स्वविवेक से किसी भी समय कर सकता है, बशर्ते राष्ट्रपति के निर्देश की आवश्यकता न हो।
2. राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित प्रत्येक अध्यादेश को राज्य विधानमंडल के पुनः समवेत होने पर उसके समक्ष प्रस्तुत किया जाना अनिवार्य है, और यदि विधानमंडल उस अध्यादेश को अस्वीकृत करने वाला संकल्प पारित कर देता है या उसकी समयावधि (छह सप्ताह) समाप्त हो जाती है, तो वह निष्प्रभावी हो जाता है।
3. संविधान के अनुच्छेद 167 के अनुसार मुख्यमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह राज्य के प्रशासन से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय और विधान के लिए प्रस्ताव राज्यपाल को संसूचित करे तथा राज्यपाल द्वारा माँगी गई ऐसी सूचना प्रदान करे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के निर्माण और संविधान सभा की कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कैबिनेट मिशन योजना (1946) के प्रावधानों के तहत संविधान सभा के लिए कुल 389 सीटें निर्धारित की गई थीं, जिनमें से ब्रिटिश प्रांतों को 292 सीटें, मुख्य आयुक्तों के 4 क्षेत्रों (दिल्ली, अजमेर-मारवाड़, कुर्ग और ब्रिटिश बलूचिस्तान) को 4 सीटें तथा देशी रियाساतों को 93 सीटें आवंटित की गईं, और देशी रियासतों के इन प्रतिनिधियों का चयन रियासतों के शासकों द्वारा किया जाना था, न कि प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा।
2. संविधान सभा की प्रथम बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई थी, जिसमें मुस्लिम लीग ने इस बैठक का पूर्ण बहिष्कार किया था, और इस बैठक में फ्रांसिसी प्रथा का अनुसरण करते हुए सभा के सबसे वरिष्ठ सदस्य डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को अस्थायी अध्यक्ष चुना गया था, जबकि डॉ. राजेंद्र प्रसाद को 11 दिसंबर 1946 को सभा का स्थायी अध्यक्ष चुना गया था।
3. संविधान सभा द्वारा संविधान के निर्माण कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए कई समितियों का गठन किया गया था, जिनमें संघ शक्ति समिति के अध्यक्ष पंडित जवाहरलाल नेहरू, प्रांतीय संविधान समिति के अध्यक्ष सरदार वल्लभभाई पटेल, और प्रारूप समिति (Drafting Committee) के अध्यक्ष डॉ. बी.आर. अंबेडकर थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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राज्य निर्वाचन आयोग का कार्य क्या है?
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भारत के राष्ट्रपति पर महाभियोग का आधार क्या है?
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