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Indian Polity
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राज्य विधानमंडल के अंतर्गत विधानसभा और विधान परिषद के सदस्यों की अर्हताओं (Qualifications), निर्वाचन प्रक्रियाओं तथा विधान परिषद के गठन व विघटन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 173 के अनुसार राज्य की विधानसभा का सदस्य बनने के लिए न्यूनतम आयु 25 वर्ष और विधान परिषद का सदस्य बनने के लिए न्यूनतम आयु 30 वर्ष होनी चाहिए, तथा दोनों ही सदनों के लिए यह अनिवार्य है कि वह भारत का नागरिक हो और निर्वाचन आयोग द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी व्यक्ति के समक्ष शपथ या प्रतिज्ञान ले।
  2. 2. विधान परिषद एक स्थायी सदन है और इसका विघटन नहीं होता है, किंतु इसके एक-तिहाई सदस्य प्रत्येक दो वर्ष की समाप्ति पर सेवानिवृत्त होते हैं, और विधान परिषद के सदस्यों का निर्वाचन प्रत्यक्ष रूप से सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर किया जाता है जिसमें 18 वर्ष से अधिक आयु का प्रत्येक पंजीकृत नागरिक भाग लेता है।
  3. 3. राज्य विधानसभा के विघटन की स्थिति में विधान परिषद में लंबित कोई भी विधेयक समाप्त नहीं होता है, क्योंकि विधान परिषद एक निरंतर चलने वाला सदन है, किंतु यदि कोई विधेयक विधान परिषद में लंबित है और विधानसभा के विघटन के कारण वह समाप्त हो जाता है, तो विधान परिषद के पास उस लंबित विधेयक को आगे बढ़ाने की कोई स्वतंत्र शक्ति नहीं रहती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 173 के तहत विधानसभा के लिए न्यूनतम आयु 25 वर्ष और विधान परिषद के लिए 30 वर्ष निर्धारित की गई है। कथन 2 गलत है क्योंकि विधान परिषद के सदस्यों का निर्वाचन प्रत्यक्ष रूप से सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर नहीं होता है, बल्कि इनका निर्वाचन अप्रत्यक्ष रूप से विभिन्न निर्वाचन मंडलों (जैसे स्थानीय निकाय, स्नातक, शिक्षक, विधानसभा के सदस्य और राज्यपाल द्वारा मनोनयन) के माध्यम से होता है। कथन 3 सही है क्योंकि विधानसभा के विघटन से विधान परिषद में लंबित विधेयक समाप्त नहीं होते हैं, क्योंकि विधान परिषद एक स्थायी निकाय है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत अंतर-राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) की स्थापना, संरचना और उसके कार्य-प्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 263 के अंतर्गत अंतर-राज्यीय परिषद् की स्थापना का अधिकार राष्ट्रपति को प्रदत्त है, और यह परिषद् केवल उन विषयों की जांच और चर्चा कर सकती है जिनमें राज्यों या केंद्र और एक या अधिक राज्यों के सामान्य हित हों। 2. वर्ष 1990 में सरकारी आयोग (Sarkaria Commission) की संस्तुतियों के आधार पर गठित स्थायी अंतर-राज्यीय परिषद् की संरचना में प्रधानमंत्री इसके अध्यक्ष होते हैं, और सभी राज्यों के मुख्यमंत्री इसके सदस्य होते हैं। 3. अनुच्छेद 263 के अधीन अंतर-राज्यीय परिषद् द्वारा दिए जाने वाले निर्णय और संस्तुतियाँ प्रकृति से सभी संबंधित राज्यों तथा केंद्र सरकार पर विधिक रूप से पूर्णतः बाध्यकारी (Binding) होती हैं, जिनका उल्लंघन करने पर संबंधित राज्य के विरुद्ध आपातकालीन प्रावधान लागू किए जा सकते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के भाग I के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) के प्रावधानों और राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित ऐतिहासिक संदर्भों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 3 के अंतर्गत संसद को किसी राज्य के भू-भाग को बढ़ाने, घटाने, उसके नाम या सीमा में परिवर्तन करने की शक्ति प्राप्त है, और इस प्रयोजन के लिए प्रस्तुत किए जाने वाले विधेयक के संबंध में संबंधित राज्य के विधानमंडल द्वारा व्यक्त किया गया विचार (View) राष्ट्रपति या संसद के लिए संवैधानिक रूप से बाध्यकारी होता है। 2. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'बेरूबारी यूनियन वाद' (1960) में यह प्रतिपादित किया गया था कि अनुच्छेद 3 के अंतर्गत संसद को प्राप्त 'क्षेत्र में परिवर्तन करने की शक्ति' में किसी भारतीय भू-भाग को किसी विदेशी देश को सौंपना (Cession) भी शामिल है, और इसके लिए संविधान संशोधन की आवश्यकता नहीं होती है, बल्कि इसे साधारण बहुमत से ही पारित किया जा सकता है। 3. भारत और बांग्लादेश के बीच हुए 100वें संविधान संशोधन अधिनियम (2015) के माध्यम से कुछ अंतःक्षेत्रों (Enclaves) का आदान-प्रदान किया गया, क्योंकि किसी भारतीय भू-भाग को विदेशी राज्य को सौंपने के लिए अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन करना अनिवार्य होता है, क्योंकि अनुच्छेद 3 इसके दायरे में नहीं आता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5-11) के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों और नागरिकता (संशोधन) अधिनियमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 8 के अनुसार भारत के बाहर रहने वाले भारतीय मूल के कुछ व्यक्तियों (Persons of Indian Origin) के नागरिकता के अधिकारों का उपबंध किया गया है, जिसके तहत यदि कोई व्यक्ति या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी में से कोई ऐसा व्यक्ति भारत शासन अधिनियम, 1935 में परिभाषित भारत में जन्मा था, तो वह भारत का नागरिक बन सकता है, बशर्ते उसने भारत के कूटनीतिक या कांसular प्रतिनिधि के पास पंजीकरण कराया हो। 2. नागरिकता अधिनियम, 1955 के अंतर्गत 'देशीकरण द्वारा नागरिकता' (By Naturalization) प्राप्त करने के लिए यह आवश्यक है कि वह व्यक्ति भारत सरकार के प्रति निष्ठा की शपथ ले और कम से कम पिछले 14 वर्षों से (यानी आवेदन से ठीक पहले के 12 महीने और उससे पूर्व के 14 वर्षों में से कुल मिलाकर 11 वर्ष) भारत में निवास कर रहा हो या भारत सरकार की सेवा में रहा हो। 3. संविधान के अनुच्छेद 10 के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति, जो इस भाग के पूर्वगामी प्रावधानों में से किसी के अधीन भारत का नागरिक है या समझा जाता है, संसद द्वारा बनाए गए किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए, भारत का नागरिक बना रहेगा, जिसका तात्पर्य यह है कि संसद किसी साधारण कानून द्वारा भी नागरिकों की नागरिकता को बिना किसी विधिक प्रक्रिया के पूर्णतः समाप्त कर सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान में आपातकालीन उपबंधों (Emergency Provisions) और उनसे संबंधित ऐतिहासिक संवैधानिक संशोधनों (विशेषकर 38वें, 42वें और 44वें संविधान संशोधन) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 38वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1975 के द्वारा राष्ट्रपति को यह शक्ति दी गई थी कि वह देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग आधारों पर एक साथ एक से अधिक राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणाएँ कर सकता है, और इस प्रकार की उद्घोषणा को किसी भी न्यायालय में चुनौती (Judicial Review) नहीं दी जा सकती थी। 2. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 के माध्यम से राष्ट्रीय आपातकाल के संचालन को सुगम बनाने के लिए यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल संपूर्ण भारत में लागू होगा या इसके किसी एक या कुछ विशिष्ट भागों में ही लागू होगा, इसका निर्णय राष्ट्रपति कर सकता है। 3. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा यह प्रावधान किया गया कि अनुच्छेद 20 और अनुच्छेद 21 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों के प्रवर्तन को निलंबित करने की शक्ति किसी भी परिस्थिति में आपातकाल के दौरान भी नहीं छीनी जा सकती है, तथा राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा के लिए मंत्रिमंडल (Cabinet) का लिखित अनुमोदन अनिवार्य कर दिया गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? अबीजी (अबीजी/अनावृतबीजी) पादप जिसमें संवहन ऊतक पाया जाता है?
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