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Indian Polity
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) और उसकी विधिक प्रकृति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान की प्रस्तावना इस बात का स्पष्ट उल्लेख करती है कि यह संविधान भारत के लोगों द्वारा अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित किया गया है, जो इसकी संप्रभुता के स्रोत को जनता में निहित बताता है।
- 2. ऐतिहासिक 'बेरूबारी यूनियन मामले' (1960) में उच्चतम न्यायालय ने यह निर्णय दिया था कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न हिस्सा (Integral Part) है और संसद इसमें अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन कर सकती है।
- 3. 'केशवानंद भारती मामले' (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने अपने पूर्ववर्ती निर्णय को पलटते हुए यह स्पष्ट किया कि प्रस्तावना संविधान का भाग है, किंतु इसके मूल ढांचा (Basic Structure) को प्रभावित किए बिना इसमें संशोधन किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि भारतीय संविधान की प्रस्तावना 'हम भारत के लोग' शब्दों से प्रारंभ होती है, जो यह दर्शाती है कि संविधान की शक्ति का अंतिम स्रोत भारत की जनता है। कथन 2 गलत है क्योंकि वर्ष 1960 के 'बेरूबारी यूनियन मामले' में उच्चतम न्यायालय ने यह निर्णय दिया था कि प्रस्तावना संविधान का भाग **नहीं** है। इसके बाद, वर्ष 1973 के प्रसिद्ध 'केशवानंद भारती मामले' में सर्वोच्च न्यायालय ने बेरूबारी बाद के निर्णय को खारिज करते हुए यह माना कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है और इसमें अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन किया जा सकता है, बशर्ते इसके 'मूल ढांचे' (Basic Structure) का उल्लंघन न हो। इसलिए कथन 3 सही है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर विस्तृत अध्ययन करें।
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भारत में 'आपातकाल' (Emergency) की घोषणा करने का अधिकार किसे प्राप्त है?
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राज्य की कार्यपालिका के संदर्भ में राज्यपाल की शक्तियों, अध्यादेश निर्माण तथा मुख्यमंत्री की स्थिति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश की आयु राज्य विधानमंडल के पुनः समवेत होने की तिथि से छह सप्ताह की अवधि समाप्त होने पर स्वतः समाप्त हो जाती है, बशर्ते इस अवधि के भीतर विधानमंडल द्वारा उसे अस्वीकृत करने वाला संकल्प पारित न कर दिया गया हो, तथा राज्यपाल इस शक्ति का प्रयोग अपने स्वविवेक से बिना मंत्रिपरिषद की सलाह के कर सकता है।
2. संविधान के अनुच्छेद 164(1) के अनुसार राज्यों के मंत्रिपरिषद में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या संबंधित राज्य की विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी, किंतु यदि किसी छोटे राज्य की विधानसभा की कुल सदस्य संख्या कम है, तो मंत्रिपरिषद में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की न्यूनतम संख्या बारह से कम नहीं होनी चाहिए (मिजोरम और सिक्किम जैसे राज्यों को छोड़कर)।
3. अनुच्छेद 167 के अंतर्गत मुख्यमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह राज्य के प्रशासन संबंधी और विधान के प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राज्यपाल को संसूचित करे, और यदि राज्यपाल ऐसी अपेक्षा करे तो किसी ऐसे विषय को मंत्रिपरिषद के विचार के लिए प्रस्तुत करे जिस पर किसी मंत्री ने विनिश्चय कर लिया है किन्तु मंत्रिपरिषद ने विचार नहीं किया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के भाग III (मूल अधिकार) के अंतर्गत प्रदत्त अधिकारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 13 के अधीन 'विधि' (Law) के अंतर्गत भारत के राज्यक्षेत्र में विधि का बल रखने वाले अध्यादेश, आदेश, उप-विधि, नियम, विनियम और अधिसूचनाएं तो शामिल हैं, किंतु कोई प्रथा या रीति (Custom or Usage) जिसके पास विधि का बल है, इसके दायरे में नहीं आती है।
2. संविधान का अनुच्छेद 19(1)(g) सभी नागरिकों को कोई भी वृत्ति, व्यापार या कारोबार करने का अधिकार देता है, किंतु राज्य को यह शक्ति प्राप्त है कि वह इस अधिकार पर किसी भी प्रकार का व्यावसायिक या तकनीकी अर्हता (Professional or Technical Qualifications) से संबंधित प्रतिबंध आरोपित कर सके और साथ ही राज्य द्वारा किसी व्यापार, व्यवसाय या सेवा का पूर्ण या आंशिक एकाधिकार (Monopoly) अपने हाथ में लिए जाने को विधि-मान्यता प्रदान कर सके।
3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'ए.के. गोपालन वाद' (1950) में अपनाए गए संकुचित दृष्टिकोण को पलटते हुए 'मेनका गांधी वाद' (1978) में यह अभिनिर्धारित किया गया कि अनुच्छेद 21 के अंतर्गत 'प्राण और दैहिक स्वतंत्रता' के संरक्षण के लिए 'विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया' (Procedure Established by Law) में अमेरिकी संविधान के 'विधि की सम्यक् प्रक्रिया' (Due Process of Law) के तत्वों, अर्थात् प्रक्रिया के न्यायसंगत, निष्पक्ष और तार्किक होने की अनिवार्यता को भी शामिल माना जाएगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के किस संशोधन को 'लघु संविधान' (Mini Constitution) कहा जाता है?
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राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों (विधानसभा और विधान परिषद) की शक्तियों, विधाई प्रक्रिया तथा उनके गठन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 169 के अंतर्गत संसद किसी राज्य में विधान परिषद के सृजन या उत्सादन के लिए विधि बना सकती है, बशर्ते संबंधित राज्य की विधानसभा अपने कुल सदस्यों के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से इस आशय का संकल्प पारित कर दे।
2. धन विधेयक (Money Bill) को केवल राज्य की विधान परिषद में ही पुनः स्थापित किया जा सकता है और विधानसभा को इसे अस्वीकार करने या इसमें संशोधन करने का पूर्ण अधिकार प्राप्त होता है।
3. साधारण विधेयक के मामले में विधान परिषद किसी विधेयक को अधिकतम 4 महीने (प्रथम बार में 3 महीने और दूसरी बार में 1 महीने) तक ही रोक सकती है, और इस अवधि के समाप्त होने पर विधान परिषद की सहमति के बिना भी विधेयक को दोनों सदनों द्वारा पारित मान लिया जाता है, क्योंकि विधानमंडल के सदनों के बीच असहमति को सुलझाने के लिए संसद के समान 'संयुक्त बैठक' (Joint Sitting) का कोई संवैधानिक प्रावधान राज्य विधानमंडल के लिए नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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