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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत प्रदत्त मूल अधिकारों (अनुच्छेद 12-35) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 13 के अंतर्गत 'विधि' (Law) शब्द की व्यापक परिभाषा दी गई है, जिसके तहत संसद या राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाए गए अधिनियमों के अतिरिक्त अध्यादेश, आदेश, उप-विधि, नियम, और रूढ़ि या प्रथा (Custom or Usage) को भी शामिल किया गया है, यदि वे भाग III के मूल अधिकारों का अल्लीकरण करती हैं तो वे शून्य होंगी।
- 2. अनुच्छेद 33 संसद को यह विशिष्ट अधिकार देता है कि वह सशस्त्र बलों, अर्ध-सैनिक बलों, पुलिस बलों, खुफिया एजेंसियों के सदस्यों या लोक व्यवस्था बनाए रखने वाले बलों के मूल अधिकारों के अनुप्रयोग को प्रतिबंधित या निराकृत कर सके ताकि उनके कर्तव्यों का उचित पालन और अनुशासन सुनिश्चित किया जा सके, तथा यह शक्ति प्रयोग करने का अधिकार केवल संसद के पास है, राज्य विधानमंडलों के पास नहीं।
- 3. अनुच्छेद 34 के तहत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर किसी भी क्षेत्र में मार्शल लॉ (सैन्य शासन) लागू होने के दौरान किसी सरकारी कर्मचारी या अन्य व्यक्ति द्वारा लोक शांति बनाए रखने या उसकी पुनस्थापना के लिए किए गए किसी कार्य के संबंध में संसद द्वारा क्षतिपूर्ति (Indemnity) का उपबंध कर सकती है, और इस प्रकार बनाई गई किसी भी विधि को किसी भी न्यायालय में इस आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती कि वह मूल अधिकारों का हनन करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। विस्तृत अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के पोर्टल का संदर्भ ले सकते हैं।
कथन 1 का विश्लेषण: अनुच्छेद 13(3)(a) के अनुसार 'विधि' के अंतर्गत भारत में कानून का बल रखने वाला कोई अध्यादेश, आदेश, उप-विधि, नियम, विनियम, अधिसूचना, और रूढ़ि या प्रथा भी शामिल है। यदि इनमें से कोई भी मूल अधिकारों का उल्लंघन करती है, तो वह मात्रा (To the extent of such inconsistency) तक शून्य (Void) होगी।
कथन 2 का विश्लेषण: अनुच्छेद 33 संसद को यह शक्ति देता है कि वह सशस्त्र बलों आदि के मूल अधिकारों को प्रतिबंधित कर सके। यह शक्ति विशेष रूप से केवल 'संसद' के पास है, किसी राज्य के विधानमंडल के पास नहीं।
कथन 3 का विश्लेषण: अनुच्छेद 34 संसद को मार्शल लॉ के दौरान किए गए कार्यों की क्षतिपूर्ति के लिए कानून बनाने की शक्ति प्रदान करता है और ऐसी विधियों को मूल अधिकारों के उल्लंघन के आधार पर न्यायपालिका द्वारा अवैध घोषित नहीं किया जा सकता।
कथन 1 का विश्लेषण: अनुच्छेद 13(3)(a) के अनुसार 'विधि' के अंतर्गत भारत में कानून का बल रखने वाला कोई अध्यादेश, आदेश, उप-विधि, नियम, विनियम, अधिसूचना, और रूढ़ि या प्रथा भी शामिल है। यदि इनमें से कोई भी मूल अधिकारों का उल्लंघन करती है, तो वह मात्रा (To the extent of such inconsistency) तक शून्य (Void) होगी।
कथन 2 का विश्लेषण: अनुच्छेद 33 संसद को यह शक्ति देता है कि वह सशस्त्र बलों आदि के मूल अधिकारों को प्रतिबंधित कर सके। यह शक्ति विशेष रूप से केवल 'संसद' के पास है, किसी राज्य के विधानमंडल के पास नहीं।
कथन 3 का विश्लेषण: अनुच्छेद 34 संसद को मार्शल लॉ के दौरान किए गए कार्यों की क्षतिपूर्ति के लिए कानून बनाने की शक्ति प्रदान करता है और ऐसी विधियों को मूल अधिकारों के उल्लंघन के आधार पर न्यायपालिका द्वारा अवैध घोषित नहीं किया जा सकता।
Related Questions
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSC) के कार्यों, स्वतंत्रता और उनके क्षेत्राधिकार के विस्तार के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 320 के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग का यह कर्तव्य है कि वह संघ की सेवाओं में नियुक्तियों के लिए परीक्षा आयोजित करे, तथा किसी राज्य के राज्यपाल के अनुरोध पर राष्ट्रपति के अनुमोदन से वह उस राज्य की सभी या किन्हीं ऐसी सेवाओं के लिए जिन्हें विशेष योग्यताबद्ध व्यक्तियों की आवश्यकता है, संयुक्त भर्ती के लिए प्रसंविदाओं (Joint Recruitment) में सहायता कर सकता है।
2. संविधान के अनुच्छेद 321 के अंतर्गत संसद या किसी राज्य के विधानमंडल द्वारा बनाई गई विधियों के माध्यम से क्रमशः संघ लोक सेवा आयोग या राज्य लोक सेवा आयोग के कार्यों के दायरे को बढ़ाया जा सकता है, किंतु राज्य लोक सेवा आयोग के कृत्यों का विस्तार किसी भी परिस्थिति में राज्यपाल के पूर्व अनुमोदन से राज्य के अधीन किसी भी स्थानीय प्राधिकारी या अन्य निगमित निकाय (Corporate Body) या सार्वजनिक संस्था के मामलों तक नहीं किया जा सकता है।
3. अनुच्छेद 323 के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग अपने द्वारा किए गए कार्यों की वार्षिक रिपोर्ट राष्ट्रपति को प्रस्तुत करता है, जिसे राष्ट्रपति संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाता है, और इस रिपोर्ट में आयोग उन मामलों का भी विवरण देता है जिनमें आयोग की सलाह को अस्वीकार कर दिया गया था, तथा अस्वीकृति के कारणों का भी उल्लेख किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के निर्माण के क्रम में संविधान सभा की विभिन्न समितियों और उसकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान सभा की संघ शक्ति समिति (Union Powers Committee) के अध्यक्ष पंडित जवाहरलाल नेहरू थे, जबकि प्रांतीय संविधान समिति (Provincial Constitution Committee) के अध्यक्ष सरदार वल्लभभाई पटेल थे, और इन दोनों प्रमुख समितियों द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों पर विचार करने के लिए ही 29 अगस्त 1947 को प्रसिद्ध 'प्रारूप समिति' (Drafting Committee) का गठन किया गया था।
2. संविधान सभा द्वारा कुल 22 मुख्य समितियों का गठन किया गया था, जिनमें से प्रक्रिया नियम समिति (Rules of Procedure Committee) और संचालन समिति (Steering Committee) के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे, जबकि मौलिक अधिकारों और अल्पसंख्यकों से संबंधित सलाहकार समिति के मुख्य अध्यक्ष डॉ. बी.आर. अंबेडकर थे।
3. संविधान सभा के निर्वाचन के संदर्भ में, इसके सदस्यों का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा किया गया था, तथा इसमें देशी रियासतें (Princely States) आरम्भ से ही शामिल थीं और उनके प्रतिनिधियों का चयन रियासतों के शासकों द्वारा मनोनीत करके सीधे संविधान सभा में भेजा गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारत के प्रधानमंत्री की नियुक्ति संविधान के किस अनुच्छेद के तहत होती है?
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राष्ट्रपति का कार्यकाल कितने वर्ष का होता है?
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भारत में निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) और चुनावी सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग को संसद, राज्य विधानमंडलों, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पदों के निर्वाचनों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति प्रदान की गई है, तथा यह एक अखिल भारतीय संस्था है जो केंद्र और राज्य दोनों के लिए समान रूप से निर्वाचन आयोजित करती है।
2. दिनेश गोस्वामी समिति (1990) ने चुनाव सुधारों पर अपनी संस्तुति देते हुए यह सिफारिश की थी कि एक व्यक्ति को दो से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों से लोकसभा या विधानसभा का चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, और इसे जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में संशोधित करके अधिकतम दो निर्वाचन क्षेत्रों की सीमा निर्धारित कर दी गई।
3. निर्वाचन आयोग एक बहु-सदस्यीय निकाय के रूप में स्थायी रूप से वर्ष 1950 से ही कार्य कर रहा है, जिसमें एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दो अन्य निर्वाचन आयुक्त होते हैं, और इनके निर्णयों में मतभेद होने पर बहुमत के आधार पर निर्णय लिया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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