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Indian Polity
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भारत के निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) और चुनाव सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. मूल संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग को एक स्थायी और स्वतंत्र निकाय के रूप में उपबंधित किया गया था तथा इसमें यह प्रावधान था कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त के अतिरिक्त राष्ट्रपति समय-समय पर जितने चाहें उतने अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति कर सकता है, जिससे यह सदैव से एक बहु-सदस्यीय निकाय रहा है।
- 2. दिनेश गोस्वामी समिति (1990) ने चुनाव सुधारों पर अपनी सिफारिश देते हुए यह संस्तुति की थी कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति करते समय प्रधानमंत्री को लोकसभा के विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) से परामर्श करना चाहिए ताकि नियुक्ति प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष बनाया जा सके।
- 3. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (Representation of the People Act, 1951) की धारा 8 के अंतर्गत यदि संसद या राज्य विधानमंडल के किसी सदस्य को किसी आपराधिक मामले में दोषी ठहराया जाता है और उसे कम से कम दो वर्ष या उससे अधिक की कारावास की सजा सुनाई जाती है, तो उसकी सदस्यता सजा की तिथि से स्वतः समाप्त (Disqualified) हो जाती है तथा वह सजा की समाप्ति के बाद अगले 6 वर्षों तक चुनाव लड़ने के लिए भी अयोग्य रहता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि मूल संविधान में निर्वाचन आयोग को केवल एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) के साथ एक-सदस्यीय निकाय के रूप में स्थापित किया गया था। इसे पहली बार 16 अक्टूबर 1989 को बहु-सदस्यीय निकाय बनाया गया था। कथन 2 सही है; दिनेश गोस्वामी समिति (1990) ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति के लिए एक कॉलेजियम प्रणाली (प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष का नेता और मुख्य न्यायाधीश) की संस्तुति की थी। कथन 3 बिल्कुल सही है; जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(3) के अनुसार 2 वर्ष या उससे अधिक की सजा पाने वाले जनप्रतिनिधि की सदस्यता तुरंत रद्द हो जाती है और वह सजा काटने के बाद अतिरिक्त 6 वर्षों तक चुनाव लड़ने के अयोग्य रहता है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर जाएं।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत अंतर-राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) और केंद्र-राज्य प्रशासनिक संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 263 के अंतर्गत राष्ट्रपति को अंतर-राज्यीय परिषद् की स्थापना करने की शक्ति प्राप्त है, और यह परिषद् एक स्थायी संवैधानिक निकाय (Constitutional Body) है जिसका मुख्य कार्य राज्यों के बीच उत्पन्न विवादों की जाँच करना और उन पर अंतिम एवं बाध्यकारी निर्णय देना है।
2. अंतर-राज्यीय परिषद् की बैठकों की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा की जाती है, और इस परिषद् में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री तथा संघ राज्य क्षेत्रों के प्रशासक इसके सदस्य के रूप में शामिल होते हैं।
3. अनुच्छेद 263 के तहत स्थापित इस परिषद् की प्रकृति मुख्य रूप से संस्तुति प्रदान करने वाली (Advisory) है, न कि न्यायिक निर्णय देने वाली।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के निर्माण और संविधान सभा की अंतरिम कार्यप्रणाली तथा उसकी समितियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान सभा के गठन के लिए हुए चुनावों में ब्रिटिश प्रांतों की 296 सीटों में से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को 208 सीटें और मुस्लिम लीग को 73 सीटें प्राप्त हुई थीं, जबकि देसी रियासतें (Princely States) शुरुआत में इस निर्वाचन प्रक्रिया से अलग रहीं क्योंकि उनके प्रतिनिधियों का चयन रियासतों के प्रमुखों द्वारा नामित किया जाना था न कि निर्वाचित होकर आना था।
2. संविधान सभा की कुल समितियों में संघीय संविधान समिति, प्रांतीय संविधान समिति और संचालन समिति जैसी प्रमुख समितियां शामिल थीं, जिनमें प्रांतीय संविधान समिति के अध्यक्ष सरदार वल्लभभाई पटेल थे, जबकि प्रक्रिया नियम समिति (Rules of Procedure Committee) के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे।
3. संविधान सभा द्वारा कुल 11 सत्रों (Sessions) में कार्य किया गया, और संविधान के प्रारूप (Draft) पर विचार करने के लिए कुल 114 दिनों तक बहस चली, तथा 26 नवंबर 1949 को जब संविधान को अंगीकृत किया गया, उस समय संविधान सभा के कुल 299 उपस्थित सदस्यों में से 284 सदस्यों ने इस पर अपने हस्ताक्षर किए थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्च न्यायालयों (High Courts) की अधिकारिता, रिट क्षेत्राधिकार (Writ Jurisdiction) और अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 226 के अधीन किसी उच्च न्यायालय का रिट क्षेत्राधिकार (Writ Jurisdiction) भौगोलिक सीमाओं के मामले में उच्चतम न्यायालय के अनुच्छेद 32 के अधीन रिट क्षेत्राधिकार की तुलना में अधिक विस्तृत है, क्योंकि उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के साथ-साथ 'किसी अन्य प्रयोजन' के लिए भी रिट जारी कर सकता है, तथा यह रिट ऐसे किसी व्यक्ति या प्राधिकारी के विरुद्ध भी जारी की जा सकती है जो उच्च न्यायालय के प्रादेशिक क्षेत्राधिकार के भीतर स्थित हो, भले ही वह प्राधिकारी या सरकार उस क्षेत्र के बाहर स्थित हो।
2. अनुच्छेद 227 के अनुसार प्रत्येक उच्च न्यायालय को अपने प्रादेशिक क्षेत्राधिकार के भीतर सभी न्यायालयों और अधिकरणों (Tribunals) के अधीक्षण (Superintendence) की शक्ति प्राप्त है, और इस शक्ति में केवल न्यायिक अधीक्षण (Judicial Superintendence) ही शामिल है, प्रशासनिक अधीक्षण (Administrative Superintendence) का अधिकार पूरी तरह से राज्य के राज्यपाल और उच्च न्यायालय के प्रशासनिक नियंत्रण से बाहर रखा गया है।
3. संविधान के अनुच्छेद 235 के अंतर्गत राज्य के जिला न्यायालयों और उनके अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण, जिसमें posting, promotion और छुट्टी का अनुदान शामिल है, संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय में निहित होता है, किंतु राज्यपाल द्वारा जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और प्रमोशन के संबंध में उच्च न्यायालय से परामर्श करना उस समय तक अनिवार्य नहीं होता जब तक कि राज्य लोक सेवा आयोग की संस्तुति प्राप्त न हो चुकी हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भाषाई आधार पर गठित होने वाला भारत का पहला राज्य कौन सा था?
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अनुच्छेद 44 का संबंध किससे है?
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