BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Indian Polity
24 views

भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) और अधीनस्थ न्यायालयों की स्वतंत्रता, अधिकारिता तथा प्रशासनिक नियंत्रण से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत प्रत्येक उच्च न्यायालय को अपने अधिकारक्षेत्र के भीतर आने वाले सभी न्यायालयों और अधिकरणों (Tribunals) पर अधीक्षण (Superintendence) की व्यापक शक्ति प्राप्त है, और यह शक्ति केवल प्रशासनिक नियंत्रण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें न्यायिक अधीक्षण की शक्ति भी शामिल है।
  2. 2. संविधान के अनुच्छेद 233 के प्रावधानों के अनुसार किसी राज्य में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और पदोन्नति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा राज्य के लोक सेवा आयोग और उच्च न्यायालय के साथ विचार-विमर्श करके की जाती है, तथा इसमें राज्यपाल का निर्णय उच्च न्यायालय के परामर्श से सर्वोपरि होता है।
  3. 3. संविधान के अनुच्छेद 234 के अंतर्गत न्यायिक सेवा (जिला न्यायाधीशों के अलावा) के अन्य सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा राज्य लोक सेवा आयोग और उच्च न्यायालय से परामर्श करने के पश्चात् बनाए गए नियमों के अनुसार की जाती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 227 के अनुसार प्रत्येक उच्च न्यायालय को अपने प्राधिकारिता क्षेत्र के सभी न्यायालयों और अधिकरणों पर अधीक्षण की शक्ति प्राप्त है, जिसमें प्रशासनिक और न्यायिक दोनों प्रकार का अधीक्षण शामिल है। कथन 2 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 233 के तहत जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति राज्य के राज्यपाल द्वारा संबंधित राज्य के **उच्च न्यायालय से परामर्श (Consultation) करके** की जाती है, न कि उच्च न्यायालय के ऊपर राज्यपाल का निर्णय सर्वोपरि होता है; उच्च न्यायालय का परामर्श इस प्रक्रिया में अनिवार्य और निर्णायक होता है। कथन 3 सही है क्योंकि अनुच्छेद 234 के अंतर्गत जिला न्यायाधीशों से भिन्न न्यायिक सेवा के अन्य सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा राज्य लोक सेवा आयोग और उच्च न्यायालय से परामर्श के उपरांत नियमों के तहत की जाती है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
Share:

Related Questions

→ भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस अधिनियम द्वारा संविधान में भाग IX-क (Part IX-A) जोड़ा गया तथा अनुच्छेद 243-W के अंतर्गत नगरपालिकाओं की शक्तियों, प्राधिकारों और उत्तरदायित्वों से संबंधित प्रावधान किए गए, जिसके तहत उन्हें आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं तैयार करने का उत्तरदायित्व सौंपा गया है। 2. अनुच्छेद 243-Y के प्रावधानों के अनुसार, प्रत्येक राज्य में एक 'वित्त आयोग' (Finance Commission) का गठन किया जाएगा, जो राज्य की संचित निधि से पंचायतों और नगरपालिकाओं के बीच करों, शुल्कों, टोल और फीसों के शुद्ध आगमों के वितरण तथा नगरपालिकाओं को दिए जाने वाले अनुदानों के सिद्धांतों का निर्धारण करेगा। 3. इस संशोधन के तहत गठित होने वाली नगरपालिकाओं की सभी श्रेणियों के सभी पदों (चाहे वे वार्ड के सदस्य हों या नगर पालिका के अध्यक्ष/चेयरपर्सन) के लिए निर्वाचन हेतु न्यूनतम आयु सीमा 18 वर्ष निर्धारित की गई है, जो कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों के समतुल्य है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → पंचायती राज दिवस कब मनाया जाता है? → भारतीय संविधान के भाग IV में वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP - अनुच्छेद 36-51) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 37 के अनुसार, नीति निर्देशक तत्व देश के शासन में मूलभूत हैं और विधि बनाने में इन तत्वों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा, किंतु ये प्रावधान किसी भी न्यायालय द्वारा न्यायोचित (Justiciable) नहीं हैं, जिसका अर्थ है कि इन्हें किसी न्यायालय द्वारा प्रवर्तित नहीं कराया जा सकता। 2. अनुच्छेद 39(b) और 39(c) के अंतर्गत निहित समाजवादी सिद्धांतों के कार्यान्वयन के संबंध में 25वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1971 द्वारा अनुच्छेद 31C जोड़ा गया, जिसके तहत यह प्रावधान किया गया कि यदि कोई विधि अनुच्छेद 39(b) या (c) में वर्णित नीति निर्देशक तत्वों को प्रभावी बनाने के लिए बनाई जाती है, तो उसे इस आधार पर शून्य नहीं ठहराया जाएगा कि वह अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त अधिकारों का उल्लंघन करती है। 3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'केशवानंद भारती वाद (1973)' में अनुच्छेद 31C के उस प्रावधान को असंवैधानिक घोषित कर दिया गया था, जिसके अंतर्गत नीति निर्देशक तत्वों को प्रभावी बनाने वाली विधियों की न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों (अनुच्छेद 5-11) और संसद की विधायी शक्ति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 11 के अनुसार संसद को नागरिकता के अर्जन और समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों के संबंध में उपबंध करने की संपूर्ण शक्ति प्रदान की गई है, और यह शक्ति संसद को संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन करने की विशेष प्रक्रिया अपनाए बिना साधारण बहुमत से कानून बनाने का अधिकार देती है। 2. अनुच्छेद 9 के अंतर्गत यह स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता अनुच्छेद 5, 6, 7 या 8 के उपबंधों के बावजूद स्वतः समाप्त नहीं होगी, जब तक कि संसद इस संबंध में कोई विशेष दंडात्मक कानून पारित न करे। 3. अनुच्छेद 10 के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति, जो इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों में से किसी के अधीन भारत का नागरिक है या समझा जाता है, संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए, भारत का नागरिक बना रहेगा, जिसका तात्पर्य यह है कि संसद किसी भी नागरिक की नागरिकता को बिना किसी विधिक प्रक्रिया के कार्यपालिका के साधारण आदेश से छीन सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) और अधीनस्थ न्यायालयों (Subordinate Courts) की शक्तियों, संरचना तथा क्षेत्राधिकार के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत किसी उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता (Writ Jurisdiction) का क्षेत्र, उच्चतम न्यायालय के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत प्रदत्त रिट अधिकारिता की तुलना में अधिक विस्तृत है, क्योंकि उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के साथ-साथ किसी अन्य विधिक अधिकार के उल्लंघन पर भी रिट जारी कर सकता है। 2. अनुच्छेद 233 के अनुसार किसी राज्य में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और पदोन्नति उस राज्य के राज्यपाल द्वारा राज्य के उच्च न्यायालय से परामर्श करके की जाती है, तथा जिला न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने वाले व्यक्ति के लिए यह आवश्यक है कि वह कम से कम सात वर्ष तक अधिवक्ता या प्लीडर रहा हो और संघ या राज्य की सेवा में पहले से सेवारत न हो। 3. संविधान के अनुच्छेद 235 के अनुसार राज्य के अधीनस्थ न्यायालयों (जिनमें जिला न्यायालय और उनके नीचे के अन्य न्यायालय शामिल हैं) पर नियंत्रण, जिसमें पोस्टिंग, प्रमोशन और छुट्टियों से जुड़े मामले शामिल हैं, पूरी तरह से संबंधित राज्य के राज्यपाल में निहित होता है, और उच्च न्यायालय की इसमें केवल परामर्शदात्री भूमिका होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.