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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों (अनुच्छेद 5-11) और नागरिकता अधिनियम, 1955 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 7 के अनुसार, जो व्यक्ति 1 मार्च 1947 के पश्चात भारत से पाकिस्तान के लिए प्र्रव्रजन (Migrated) कर गया था, वह भारत का नागरिक नहीं माना जाएगा, भले ही वह बाद में भारत में पुनर्वास के अनुज्ञापत्र (Permit) के आधार पर वापस लौट आए।
- 2. नागरिकता अधिनियम, 1955 के अंतर्गत 'पंजीकरण द्वारा नागरिकता' (Citizenship by Registration) प्राप्त करने के लिए भारत में सामान्य निवास की पूर्ववर्ती शर्त के रूप में आवेदन से ठीक पहले कम से कम 7 वर्षों तक निरंतर भारत में निवास करना अनिवार्य कर दिया गया है।
- 3. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 9 के प्रावधान के अनुसार, यदि कोई भारतीय स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता अर्जित कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता अनुच्छेद 8 के अपवादों को छोड़कर स्वतः समाप्त हो जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 7 के अनुसार, जो व्यक्ति 1 मार्च 1947 के बाद भारत से पाकिस्तान चला गया था, वह भारत का नागरिक नहीं रहेगा; किंतु यदि वह व्यक्ति भारत में पुनर्वास (Resettlement) या स्थायी लौटने के लिए किसी अनुज्ञापत्र (Permit) के तहत वापस आ जाता है और नागरिकता के पंजीकरण के लिए निर्धारित शर्तों को पूरा करता है, तो उसे अनुच्छेद 6 के प्रावधानों के अंतर्गत नागरिकता प्राप्त करने का अधिकार मिल सकता है। अतः केवल यह कहना कि वह कभी नागरिक नहीं माना जाएगा, सही नहीं है क्योंकि पुनर्वास परमिट धारकों को इसमें विशेष छूट दी गई थी।
कथन 2 सही है: नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत 'पंजीकरण द्वारा नागरिकता' प्राप्त करने के लिए (भारतीय मूल के व्यक्तियों या भारतीय नागरिकों से विवाहित व्यक्तियों के संदर्भ में समय-समय पर संशोधित प्रावधानों के अनुसार) सामान्यतः आवेदन करने से ठीक पहले भारत में 7 वर्षों के निवास की शर्त का पालन करना अनिवार्य होता है।
कथन 3 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 9 में स्पष्ट रूप से यह प्रावधान किया गया है कि यदि किसी भारतीय नागरिक ने स्वेच्छा से किसी विदेशी देश की नागरिकता प्राप्त कर ली है, तो अनुच्छेद 5, 6, 7 या 8 की किसी भी बात के होते हुए भी, उसकी भारतीय नागरिकता तुरंत समाप्त हो जाएगी। इसमें अनुच्छेद 8 का कोई अपवाद शामिल नहीं है।
अधिक जानकारी और विस्तृत अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर जा सकते हैं।
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राज्य की कार्यपालिका के संदर्भ में राज्यपाल की शक्तियों, अध्यादेश प्रख्यापित करने की प्रक्रिया और मुख्यमंत्री तथा मंत्रिपरिषद के संबंधों के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 213 के अंतर्गत राज्यपाल को अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति प्राप्त है, और यह शक्ति राज्य विधानमंडल के सत्र में न होने पर ही प्रयोग की जा सकती है, किंतु राज्यपाल अपनी इस विधाई शक्ति का प्रयोग किसी भी स्थिति में तब तक नहीं कर सकता जब तक कि उसे ऐसा अध्यादेश प्रख्यापित करने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व संстуति (Instruction) प्राप्त न हो गई हो, भले ही संबंधित विषय राज्य सूची का ही क्यों न हो।
2. सर्वोच्च न्यायालय के 'एस.आर. बोम्बाई वाद (1994)' के ऐतिहासिक निर्णय के अनुसार, राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री की सलाह पर विधानसभा का विघटन किए जाने या बहुमत परीक्षण (Floor Test) कराए जाने से संबंधित निर्णय की न्यायिक समीक्षा इस आधार पर की जा सकती है कि राज्यपाल का निर्णय मालाफाइड (Malafide) या असंवैधानिक था, तथा विधानसभा के पटल पर ही सरकार के बहुमत का परीक्षण किया जाना संवैधानिक रूप से सर्वाधिक उपयुक्त माध्यम है।
3. संविधान के अनुच्छेद 167 के अंतर्गत मुख्यमंत्री का यह स्पष्ट संवैधानिक कर्तव्य है कि वह राज्य के प्रशासनिक मामलों और विधान के प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राज्यपाल को संसूचित करे, और यदि राज्यपाल किसी विशिष्ट विषय पर प्रशासनिक जानकारी मांगता है, तो मुख्यमंत्री के लिए यह अनिवार्य है कि वह ऐसी सूचना राज्यपाल को उपलब्ध कराए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं के प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस संशोधन द्वारा संविधान में भाग IX जोड़ा गया जिसका शीर्षक 'पंचायते' है और इसे अनुच्छेद 243 से 243-O तक समाविष्ट किया गया है, तथा इसके साथ ही ग्यारहवीं अनुसूची जोड़ी गई जिसमें पंचायतों के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आने वाले कुल 29 कार्यकारी विषयों का उल्लेख किया गया है।
2. अधिनियम के अनुसार प्रत्येक राज्य में ग्राम, मध्यवर्ती और जिला स्तर पर पंचायतों का गठन किया जाना अनिवार्य है, किंतु जिन राज्यों की कुल जनसंख्या 20 लाख से कम है, उन्हें मध्यवर्ती स्तर पर पंचायत का गठन करने की छूट प्रदान की गई है।
3. पंचायतों के सभी स्तरों पर प्रत्यक्ष चुनावों के माध्यम से भरे जाने वाले कुल स्थानों का कम से कम एक-तिहाई (33 प्रतिशत) भाग महिलाओं के लिए आरक्षित होना अनिवार्य है, तथा यह आरक्षण महिलाओं के लिए केवल कुल सीटों तक ही सीमित है और इसे अध्यक्षों के पदों (Offices of Chairpersons) पर लागू नहीं किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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'उद्देश्य प्रस्ताव' (Objectives Resolution) संविधान सभा में किसने प्रस्तुत किया था?
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