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Indian Polity
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भारतीय निर्वाचन आयोग और चुनाव सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (Representation of the People Act, 1951) की धारा 77 के अनुसार, किसी राजनीतिक दल द्वारा अपने स्टार प्रचारकों (Star Campaigners) की सूची निर्वाचन आयोग और संबंधित राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को चुनाव अधिसूचना जारी होने की तारीख से 7 दिनों के भीतर सौंपनी अनिवार्य होती है, और स्टार प्रचारकों की यात्रा पर होने वाला व्यय संबंधित उम्मीदवार के चुनाव खर्च की सीमा में शामिल नहीं किया जाता है।
- 2. सर्वोच्च न्यायालय के 'अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ (2023)' वाद में दिए गए ऐतिहासिक निर्णय के अनुसार, मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा एक उच्च-स्तरीय चयन समिति की सलाह पर की जानी चाहिए, जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) शामिल होने का प्रावधान किया गया था, जिसे संसद ने बाद में अधिनियम बनाकर यथावत रूप से स्वीकार कर लिया।
- 3. वर्ष 1996 में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में किए गए संशोधनों के तहत यह प्रावधान किया गया कि किसी निर्वाचन क्षेत्र में उपचुनाव (By-election) की रिक्ति उत्पन्न होने की तारीख से छह महीने की अवधि के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य होगा, बशर्ते निर्वाचन आयोग यह प्रमाणित कर दे कि उस समयावधि में चुनाव कराना कठिनाइयों या आपदा के कारण व्यावहारिक रूप से असंभव है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 77 के तहत मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को चुनाव अधिसूचना जारी होने की तारीख से 7 दिनों के भीतर (यदि मान्यता प्राप्त दल हैं) या 10 दिनों के भीतर (अन्य दलों के लिए) स्टार प्रचारकों की सूची भेजनी होती है, किंतु कोविड-19 महामारी के दौरान चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों और विभिन्न संशोधनों के तहत स्टार प्रचारकों की संख्या सीमित की गई है, तथा इनकी यात्रा का व्यय सामान्यतः उम्मीदवार के कुल खर्च में नहीं जुड़ता, लेकिन यह नियम सूची जमा करने की समयावधि की तकनीकी बारीकियों के कारण आंशिक रूप से भ्रामक है। कथन 2 गलत है क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय ने 'अनूप बरनवाल वाद' (2023) में चयन समिति में CJI को शामिल करने का आदेश दिया था, किंतु संसद ने बाद में 'मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यालय की अवधि) अधिनियम, 2023' पारित करके CJI की जगह प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक कैबिनेट मंत्री को शामिल कर लिया, जिससे मूल सुप्रीम कोर्ट का सुझाव अधिनियमित रूप में बदल गया। कथन 3 सही है, 1996 के संशोधन के तहत यह प्रावधान जोड़ा गया था कि रिक्ति की तिथि से 6 माह के भीतर उपचुनाव कराना आवश्यक है बशर्ते असाधारण परिस्थितियां न हों। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
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भारत के महान्यायवादी (Attorney General for India) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 76 के तहत भारत के महान्यायवादी को संसद के दोनों सदनों या उनकी संयुक्त बैठकों में बोलने और भाग लेने का अधिकार प्राप्त है, किंतु उसे संसद में मतदान करने का कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है।
2. भारत का नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं होता है और न ही वह संसद में मतदान कर सकता है, किंतु महान्यायवादी के विपरीत CAG अपनी रिपोर्ट सीधे संसद में प्रस्तुत नहीं करता है, बल्कि वह अपनी लेखा परीक्षा रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंपता है, जिसे राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखवाते हैं।
3. संविधान के अनुच्छेद 148 के अनुसार नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को उसके पद से उसी रीति और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति और जिन आधारों पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, जबकि महान्यायवादी राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत (During the Pleasure of the President) पद धारण करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के निर्माण और संविधान सभा की विभिन्न समितियों की कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान सभा द्वारा कुल 22 प्रमुख और छोटी समितियों का गठन किया गया था, जिनमें प्रक्रिया नियम समिति (Rules of Procedure Committee) के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे, जबकि प्रांतीय संविधान समिति (Provincial Constitution Committee) की अध्यक्षता सरदार वल्लभभाई पटेल ने की थी।
2. प्रारूप समिति (Drafting Committee), जिसे संविधान का मसविदा तैयार करने का सबसे महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व सौंपा गया था, का गठन 29 अगस्त 1946 को किया गया था और इसमें अध्यक्ष सहित कुल सात सदस्य शामिल थे।
3. संविधान सभा के शुरुआती चरणों में रियासतों (Princely States) के प्रतिनिधि सभा में शामिल नहीं हुए थे, किंतु बाद में 28 अप्रैल 1947 को प्रस्तुत दूसरे चरण के प्रतिवेदन के बाद अधिकांश रियासतों के प्रतिनिधियों ने संविधान सभा की बैठकों में भाग लेना शुरू कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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राज्य की कार्यपालिका के संदर्भ में राज्यपाल की शक्तियों और मुख्यमंत्री के संवैधानिक दायित्वों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 161 के अंतर्गत राज्यपाल को किसी भी ऐसे विषय से संबंधित विधि के विरुद्ध अपराध के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्ति के दंडादेश को क्षमा करने, उसका प्रविलंबन, विराम या परिहार करने की शक्ति प्राप्त है, जिस विषय तक राज्य की कार्यकारी शक्ति का विस्तार होता है, किंतु राज्यपाल किसी भी परिस्थिति में मृत्युदंड (Death Sentence) को पूर्णतः क्षमा (Pardon) नहीं कर सकता है, क्योंकि यह अधिकार केवल भारत के राष्ट्रपति के पास है।
2. संविधान के अनुच्छेद 167 के अनुसार राज्य के मुख्यमंत्री का यह कर्तव्य है कि वह राज्य کے प्रशासन के संचालन और विधान के प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राज्यपाल को संसूचित करे, तथा राज्यपाल द्वारा मांगे जाने पर ऐसी सूचना तुरंत उपलब्ध कराए।
3. राज्य के महाधिवक्ता (Advocate General) की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और वह राज्यपाल के प्रसादपर्यंत (During the Pleasure of the Governor) पद धारण करता है, और महाधिवक्ता को राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों की बैठकों में बोलने और भाग लेने का अधिकार तो है, किंतु उसे किसी भी स्थिति में मतदान (Voting) करने का अधिकार प्राप्त नहीं होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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संविधान का कौन सा भाग 'निर्वाचन' से संबंधित है?
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वित्त आयोग किस अनुच्छेद में है?
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