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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग IV के अंतर्गत वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान का अनुच्छेद 44 पूरे देश के लिए 'समान नागरिक संहिता' (Uniform Civil Code) प्राप्त करने का प्रयास करने का निर्देश देता है, जो गोवा राज्य को छोड़कर पूरे भारत में तत्कालीन रूप से लागू है क्योंकि गोवा में पुर्तगाली सिविल कोड पहले से अस्तित्व में था।
  2. 2. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा नीति निर्देशक तत्वों में कुछ नए निर्देश जोड़े गए, जिनमें अनुच्छेद 39A (समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता), अनुच्छेद 43A (उद्योगों के प्रबंधन में श्रमिकों की भागीदारी) और अनुच्छेद 48A (पर्यावरण, वन और वन्यजीवों की रक्षा) शामिल हैं।
  3. 3. सर्वोच्च न्यायालय ने कई प्रकरणों (जैसे 'मिनर्वा मिल्स वाद', 1980) में यह प्रतिपादित किया है कि मौलिक अधिकारों और नीति निर्देशक तत्वों के बीच संतुलन संविधान की मूल संरचना (Basic Structure) का एक अनिवार्य हिस्सा है, और किसी भी स्थिति में नीति निर्देशक तत्वों को प्रभावी करने के लिए अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 19 के मूल अधिकारों को पूर्णतः समाप्त नहीं किया जा सकता।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि अनुच्छेद 44 के तहत 'समान नागरिक संहिता' का प्रावधान पूरे देश के लिए एक नीति निर्देशक तत्व है, किंतु गोवा में जो सिविल कोड लागू है वह पुर्तगाली सिविल कोड, 1867 पर आधारित है, न कि सीधे संवैधानिक अनुच्छेद 44 का स्वतः कार्यान्वयन। इसके अलावा, उत्तराखंड राज्य ने हाल ही में समान नागरिक संहिता को अपने यहां अधिनियमित किया है, अतः यह कहना कि यह गोवा को छोड़कर पूरे देश में लागू नहीं है, तथ्यात्मक रूप से ठीक नहीं है क्योंकि यह एक निर्देशक तत्व है जिसे राज्य अपनी सुविधानुसार लागू करते हैं। कथन 2 सत्य है; 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में नए DPSP (अनुच्छेद 39A, 43A और 48A) जोड़े गए थे। कथन 3 सत्य है; 'मिनर्वा मिल्स वाद' (1980) में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मौलिक अधिकार और नीति निर्देशक तत्व एक-दूसरे के पूरक हैं और इनके बीच का संतुलन संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा है। विस्तृत अध्ययन के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
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