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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की शक्तियों, क्षेत्राधिकारों और न्यायिक पुनर्विलोकन (Judicial Review) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत उच्चतम न्यायालय का मूल और अनन्य (Original and Exclusive) क्षेत्राधिकार केंद्र और एक या अधिक राज्यों के बीच या दो या अधिक राज्यों के बीच किसी कानूनी विवाद में तब लागू होता है जब उस विवाद में विधि या तथ्य का ऐसा कोई प्रश्न शामिल हो जिस पर किसी विधिक अधिकार का अस्तित्व निर्भर करता हो, किंतु इसमें किसी निजी नागरिक द्वारा केंद्र या राज्य सरकार के विरुद्ध लाया गया संविदात्मक (contractual) विवाद भी शामिल होता है।
- 2. अनुच्छेद 143 के अंतर्गत राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि वह विधि या तथ्य के किसी ऐसे प्रश्न पर, जो सार्वजनिक महत्व का है, उच्चतम न्यायालय से परामर्श (Advisory Jurisdiction) मांग सकता है, और ऐसी किसी भी सलाह को मानने के लिए राष्ट्रपति सर्वथा बाध्य होता है।
- 3. संविधान के अनुच्छेद 137 के अधीन उच्चतम न्यायालय को संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि या न्यायालय के नियमों के अधीन रहते हुए, अपने द्वारा दिए गए किसी निर्णय या आदेश का पुनरावलोकन (Review) करने की शक्ति प्राप्त है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि अनुच्छेद 131 के तहत उच्चतम न्यायालय के मूल क्षेत्राधिकार में वे विवाद आते हैं जो केंद्र और राज्यों के बीच हों, किंतु इसमें किसी निजी नागरिक द्वारा सरकार के खिलाफ किए गए संविदात्मक (contractual) दावे या राजनीतिक प्रकृति के विवाद शामिल नहीं होते हैं। इसके अलावा, संविधान के लागू होने से पहले की किसी संधि या संविदा से उत्पन्न विवाद भी इसके दायरे से बाहर हो सकते हैं। कथन 2 असत्य है क्योंकि अनुच्छेद 143 के तहत उच्चतम न्यायालय द्वारा दी गई सलाह को मानने के लिए राष्ट्रपति बाध्य **नहीं** होता है (यह राष्ट्रपति का स्वविवेक है)। कथन 3 सत्य है, अनुच्छेद 137 उच्चतम न्यायालय को अपने ही निर्णयों की समीक्षा (Review) करने की शक्ति प्रदान करता है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर अध्ययन करें।
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राष्ट्रपति शासन (President\s Rule) से संबंधित प्रावधान संविधान के किस अनुच्छेद में है?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति के निर्वाचन, प्रधानमंत्री की नियुक्ति और संघीय मंत्रिपरिषद के उत्तरदायित्व एवं कामकाज के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उपराष्ट्रपति के निर्वाचन के लिए बनने वाले निर्वाचक मंडल में संसद के दोनों सदनों के केवल निर्वाचित सदस्य ही शामिल होते हैं, जबकि राज्यों की विधानसभाओं और विधानपरिषदों के सदस्यों को इसमें भाग लेने का कोई अधिकार नहीं होता है।
2. संविधान के अनुच्छेद 75 के अनुसार प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर करता है, तथा कोई भी ऐसा व्यक्ति जो संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं है, प्रधानमंत्री या मंत्री के रूप में नियुक्त होने के पश्चात् अधिकतम छह महीने की अवधि के भीतर संसद के किसी भी सदन का सदस्य बनने की अनिवार्यता पूरी करता है।
3. मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, जिसका व्यावहारिक अर्थ यह है कि लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर संपूर्ण मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है, और व्यक्तिगत रूप से सभी मंत्री राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत (During the pleasure of the President) पद धारण करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) और उसके ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान की प्रस्तावना पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा 13 दिसंबर 1946 को संविधान सभा में प्रस्तुत और 22 जनवरी 1947 को स्वीकार किए गए 'उद्देश्य प्रस्ताव' (Objectives Resolution) पर आधारित है, और इसे संविधान के लागू होने के पश्चात केवल एक बार (42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा) संशोधित किया गया है जिसके तहत इसमें 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष' और 'अखंडता' शब्द जोड़े गए।
2. 'बेरुबारी यूनियन वाद (1960)' में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट रूप से अभिनिर्धारित किया था कि प्रस्तावना भारतीय संविधान का एक अभिन्न अंग (Integral Part) है, तथा संसद अनुच्छेद 368 के तहत इसमें संशोधन करते हुए इसके किसी भी मूल भाग को हटा सकती है।
3. 'केशवानंद भारती वाद (1973)' और 'एल.आई.सी. ऑफ इंडिया वाद (1995)' में उच्चतम न्यायालय ने अपने पूर्ववर्ती निर्णय को पलटते हुए यह व्यवस्था दी कि प्रस्तावना संविधान का एक आंतरिक और अभिन्न अंग है, और यद्यपि यह देश की विधायिका को कोई नई शक्ति प्रदान नहीं करती और न ही उसकी शक्तियों पर कोई प्रतिबंध लगाती है, तथापि यह संविधान के 'मूल ढांचा' (Basic Structure) का एक अनिवार्य हिस्सा है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारत का संविधान 'अर्ध-संघीय' (Quasi-Federal) है, यह किसने कहा था?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति के निर्वाचन, प्रधानमंत्री की नियुक्ति और मंत्रिपरिषद के सामूहिक उत्तरदायित्व के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उपराष्ट्रपति के निर्वाचन के लिए निर्वाचक मंडल में संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित और मनोनीत दोनों सदस्य शामिल होते हैं, जबकि राज्यों की विधानसभाओं के सदस्यों को इसमें भाग लेने का कोई अधिकार नहीं होता है।
2. संविधान के अनुच्छेद 75 के अनुसार प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर करता है, तथा कोई भी व्यक्ति जो संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं है, प्रधानमंत्री या मंत्री के रूप में नियुक्त नहीं किया जा सकता है।
3. मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है, जिसका संवैधानिक अर्थ यह है कि लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर संपूर्ण मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है, और व्यक्तिगत रूप से सभी मंत्री राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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