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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग IV के अंतर्गत वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) और उनसे संबंधित संवैधानिक संशोधनों तथा न्यायिक निर्णयों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 39A के तहत 'समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता' का प्रावधान मूल संविधान में नहीं था, बल्कि इसे 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़ा गया था, तथा इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक या अन्य असमर्थता के कारण कोई भी नागरिक न्याय पाने से वंचित न रहे।
  2. 2. अनुच्छेद 44 में वर्णित 'समान नागरिक संहिता' (Uniform Civil Code) का उद्देश्य पूरे देश में समस्त नागरिकों के लिए एक समान नागरिक कानून लागू करना है, और यह निर्देशक तत्व देश के न्यायालयों द्वारा स्वतः प्रवर्तनीय (Self-executing) है जिसके लिए किसी विधायी अधिनियमन की आवश्यकता नहीं होती है।
  3. 3. सर्वोच्च न्यायालय ने 'मिनर्वा मिल्स वाद' (1980) में यह स्पष्ट किया था कि मौलिक अधिकारों और नीति निर्देशक तत्वों के बीच संतुलन संविधान की मूल संरचना (Basic Structure) का एक अनिवार्य हिस्सा है, और राज्य के नीति निर्देशक तत्वों को मौलिक अधिकारों पर संपूर्ण रूप से प्राथमिकता नहीं दी जा सकती।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 39A को 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा नीति निर्देशक तत्वों में शामिल किया गया था, जो गरीबों को निःशुल्क विधिक सहायता प्रदान करने का निर्देश देता है। कथन 2 असत्य है: अनुच्छेद 44 में उल्लिखित 'समान नागरिक संहिता' एक नीति निर्देशक तत्व है, जो अनुच्छेद 37 के अनुसार देश के शासन में मूलभूत तो है, किंतु यह न्यायोचित (Non-justiciable) और स्वतः प्रवर्तनीय नहीं है; इसे लागू करने के लिए विधायिका द्वारा विधि (Law) का निर्माण किया जाना आवश्यक होता है। कथन 3 सही है: 'मिनर्वा मिल्स लिमिटेड बनाम भारत संघ (1980)' वाद में उच्चतम न्यायालय ने यह अभिनिधारित किया था कि मौलिक अधिकार और नीति निर्देशक तत्व एक-दूसरे के पूरक हैं और इनके बीच संतुलन संविधान की मूल संरचना (Basic Structure) का एक मूल लक्षण है। इस विषय की विस्तृत जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था को पढ़ें।
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