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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग III के अंतर्गत प्रदत्त मूल अधिकारों की प्रकृति, उनके अपवादों और न्यायिक समीक्षा के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान का अनुच्छेद 13 न्यायिक समीक्षा का आधार प्रदान करता है, जिसके तहत संसद या राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाई गई ऐसी कोई भी विधि जो मूल अधिकारों का अल्पीकरण करती है, शून्य (Void) होगी; किंतु सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार संविधान संशोधन अधिनियम (Constitutional Amendment Act) को अनुच्छेद 13 के अंतर्गत 'विधि' (Law) नहीं माना जा सकता और वे मूल अधिकारों को संशोधित करने के लिए पूर्णतः स्वतंत्र हैं।
  2. 2. अनुच्छेद 19(1)(g) के अंतर्गत सभी नागरिकों को कोई भी वृत्ति, व्यापार या कारोबार करने का अधिकार प्राप्त है, किंतु राज्य इस अधिकार के प्रयोग पर किसी पेशेवर या तकनीकी अर्g (Professional or Technical Qualifications) के आवश्यक होने या राज्य द्वारा किसी व्यापार, व्यवसाय या सेवा को पूर्णतः या भागतः अपने नियंत्रण में लेने के लिए कोई भी विधि बनाने से प्रतिबंधित नहीं है।
  3. 3. अनुच्छेद 21 के अंतर्गत 'प्राण और दैहिक स्वतंत्रता के संरक्षण' का अधिकार नागरिकों के साथ-साथ विदेशियों को भी समान रूप से उपलब्ध है, तथा उच्चतम न्यायालय ने 'मेनका गांधी वाद' (1978) में यह स्पष्ट किया कि 'विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया' (Procedure Established by Law) में प्राकृतिक न्याय (Natural Justice) के सिद्धांत, निष्पक्षता और औचित्य का समावेश होना अनिवार्य है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है, क्योंकि ऐतिहासिक 'केशवानंद भारती वाद' (1973) और गोलकनाथ वाद (1967) के पश्चात सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट कर दिया कि संविधान संशोधन अधिनियम भी अनुच्छेद 13 के अंतर्गत 'विधि' (Law) की श्रेणी में आते हैं, और यदि वे संविधान के 'मूल ढांचा' (Basic Structure) का उल्लंघन करते हैं या मूल अधिकारों का अनधिकृत हनन करते हैं, तो उन्हें न्यायपालिका द्वारा असंवैधानिक घोषित किया जा सकता है। कथन 2 सही है, क्योंकि अनुच्छेद 19(6) के अनुसार अनुच्छेद 19(1)(g) के अधिकारों पर युक्तिसंगत प्रतिबंध लगाने का राज्य को पूरा अधिकार है, जिसमें पेशेवर योग्यताएं निर्धारित करना या राज्य द्वारा सरकारी एकाधिकार (Monopoly) स्थापित करना शामिल है। कथन 3 सही है, क्योंकि अनुच्छेद 21 के तहत प्राप्त अधिकार नागरिक और विदेशी दोनों को प्राप्त हैं और मेनका गांधी मामले के बाद से 'विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया' का दायरा 'विधि की उचित प्रक्रिया' (Due Process of Law) जितना व्यापक मान लिया गया है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर जाएं।
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