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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत भारत के राष्ट्रपति की आपातकालीन, कूटनीतिक और कार्यकारी शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा या उसकी समाप्ति के लिए राष्ट्रपति को मंत्रिमंडल (Cabinet) की लिखित संस्तुति प्राप्त होना अनिवार्य है, और 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 के पश्चात राष्ट्रपति इस उद्घोषणा को वापस लेने या जारी रखने के लिए मंत्रिपरिषद की सलाह से स्वतंत्र होकर अपने स्वविवेक का प्रयोग कर सकता है।
  2. 2. भारत का राष्ट्रपति देश का औपचारिक राज्यप्रमुख (Head of the State) होने के नाते सभी अंतर्राष्ट्रीय संधियाँ और समझौते राष्ट्रपति के नाम से ही किए जाते हैं, किंतु अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व और संधियों/समझौतों का वास्तविक अनुसमर्थन (Ratification) केवल प्रधानमंत्री या उनके द्वारा अधिकृत मंत्रिपरिषद द्वारा किया जाता है, जिसके लिए संसद की पूर्व अनुमति सर्वथा अनिवार्य है।
  3. 3. अनुच्छेद 74 के अंतर्गत राष्ट्रपति अपने कृत्यों का प्रयोग करने में मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार कार्य करेगा, किंतु राष्ट्रपति इस सलाह को पुनर्विचार के लिए एक बार वापस भेज सकता है और पुनर्विचार के पश्चात लौटाई गई सलाह के अनुसार कार्य करने के लिए राष्ट्रपति संवैधानिक रूप से बाध्य होता है, जिसे 44वें संविधान संशोधन द्वारा और अधिक स्पष्ट किया गया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा यह जोड़ा गया कि राष्ट्रपति राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा या उसकी समाप्ति मंत्रिमंडल की लिखित सलाह पर ही करेगा, किंतु राष्ट्रपति को अपनी स्वविवेक शक्ति के आधार पर आपातकाल वापस लेने का कोई अनन्य संवैधानिक अधिकार नहीं है जब तक कि मंत्रिपरिषद या लोकसभा द्वारा तदुपरांत संकल्प पारित न किया जाए। कथन 2 गलत है क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय संधियाँ और समझौते राष्ट्रपति के नाम पर होते हैं तथा उनका अनुसमर्थन भी राष्ट्रपति के प्राधिकार से होता है, और सभी संधियाँ संसद की पूर्व अनुमति के बिना लागू नहीं होतीं ऐसा नियम नहीं है (कुछ कार्यपालिका के दायरे में आती हैं)। कथन 3 बिल्कुल सही है; अनुच्छेद 74(1) के अंतर्गत राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार कार्य करेगा, लेकिन वह उस सलाह को एक बार पुनर्विचार के लिए लौटा सकता है। यदि मंत्रिपरिषद बिना किसी संशोधन के या संशोधन के साथ उस सलाह को दोबारा राष्ट्रपति के पास भेजती है, तो राष्ट्रपति उस सलाह के अनुसार कार्य करने के लिए पूरी तरह बाध्य होता है (इस प्रावधान को 44वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया था)। भारतीय संविधान की इस व्यवस्था को गहराई से समझने के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर जा सकते हैं।
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