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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत भारत के उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के संवैधानिक संबंधों, उनकी शक्तियों तथा दायित्वों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 67(b) के अनुसार उपराष्ट्रपति को उसके पद से हटाने के लिए राज्यसभा द्वारा अपने तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत से पारित संकल्प और लोकसभा द्वारा उस संकल्प से सहमत होना अनिवार्य है, किंतु इसके लिए लोकसभा के केवल साधारण बहुमत की आवश्यकता होती है और इस प्रक्रिया को शुरू करने से पहले उपराष्ट्रपति को 14 दिन की पूर्व लिखित सूचना देना आवश्यक है।
  2. 2. अनुच्छेद 75 के अंतर्गत प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री की सलाह पर की जाती है, तथा संविधान के अनुसार प्रधानमंत्री सहित मंत्रिपरिषद के सदस्यों की कुल संख्या किसी भी स्थिति में लोकसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती, जिसमें राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री दोनों सम्मिलित होते हैं।
  3. 3. अनुच्छेद 78 के प्रावधानों के तहत प्रधानमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह संघ के प्रशासन के संज्ञान से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राष्ट्रपति को संसूचित करे और राष्ट्रपति द्वारा मांगे जाने पर प्रशासन संबंधी जानकारी उपलब्ध कराए, किंतु राष्ट्रपति अपनी इच्छा से मंत्रिपरिषद के किसी भी निर्णय को स्वतः संज्ञान लेकर पुनर्विचार के लिए वापस नहीं भेज सकता जब तक कि प्रधानमंत्री ऐसा अनुरोध न करे।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: उपराष्ट्रपति को हटाने के लिए राज्यसभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत (Effective Majority) से प्रस्ताव पारित होना चाहिए तथा लोकसभा की सहमति साधारण बहुमत से होनी चाहिए, साथ ही 14 दिन पूर्व नोटिस देना अनिवार्य है। कथन 2 गलत है क्योंकि 91वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 के अनुसार प्रधानमंत्री सहित मंत्रिपरिषद के सदस्यों की कुल संख्या लोकसभा की कुल सदस्य संख्या के 15% से अधिक नहीं हो सकती है, और इसमें राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल नहीं होते हैं (यह नियम केवल केंद्रीय मंत्रिपरिषद और राज्य मंत्रिपरिषद पर अलग-अलग लागू होता है)। कथन 3 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 78 के तहत प्रधानमंत्री का यह कर्तव्य है कि वह राष्ट्रपति द्वारा मांगी गई जानकारी दे, किंतु राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद के किसी निर्णय को प्रधानमंत्री के माध्यम से या सीधे पुनर्विचार के लिए कह सकता है; इसके अतिरिक्त राष्ट्रपति को यह संवैधानिक शक्ति है कि वह मंत्रिपरिषद के किसी विनिश्चय को (जिसे किसी मंत्री ने रख दिया हो पर मंत्रिपरिषद ने विचार न किया हो) मंत्रिपरिषद के समक्ष विचार के लिए रखवा सके। विस्तृत अध्ययन के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पढ़ें।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रिपरिषद के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 67 के अनुसार उपराष्ट्रपति को उसके पद से हटाने के लिए राज्यसभा द्वारा अपने तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत से पारित संकल्प और लोकसभा की सहमति आवश्यक होती है, किंतु इस प्रकार के संकल्प को प्रस्तुत करने से कम से कम 14 दिन पूर्व उपराष्ट्रपति को लिखित सूचना देना अनिवार्य है। 2. संविधान के अनुच्छेद 75(2) के अनुसार केंद्रीय मंत्रिपरिषद के मंत्री राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत अपने पद पर बने रहते हैं, जिसका तात्पर्य यह है कि राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत सलाह पर किसी भी मंत्री को बिना लोकसभा के अविश्वास प्रस्ताव के भी उसके पद से हटा सकता है। 3. 'सामूहिक उत्तरदायित्व' (Collective Responsibility) के सिद्धांत के अंतर्गत लोकसभा में प्रधानमंत्री या मंत्रिपरिषद के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर संपूर्ण मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है, और यदि किसी एकल मंत्री के विरुद्ध लोकसभा में कोई विशेष नीतिगत निंदा प्रस्ताव (Censure Motion) या अविश्वास पारित हो जाता है, तो भी पूरी सरकार को त्यागपत्र देना अनिवार्य होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के विभिन्न भागों, अनुसूचियों, राजभाषा तथा राजनीतिक दलों के विधिक और संवैधानिक प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के भाग XVII के अंतर्गत अनुच्छेद 348 में यह उपबंध किया गया है कि उच्चतम न्यायालय और प्रत्येक उच्च न्यायालय की सभी कार्यवाहियाँ अंग्रेजी भाषा में ही होंगी, किंतु किसी राज्य का राज्यपाल, राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से, राज्य के उच्च न्यायालय की कार्यवाही में हिंदी भाषा या उस राज्य में आधिकारिक प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त होने वाली किसी अन्य भाषा के प्रयोग को प्राधिकृत कर सकता है। 2. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के प्रावधानों के तहत भारत निर्वाचन आयोग द्वारा राजनीतिक दलों का पंजीकरण किया जाता है, किंतु किसी पंजीकृत दल को 'राष्ट्रीय दल' (National Party) के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए यह अनिवार्य है कि वह कम से कम चार राज्यों में लोकसभा या विधानसभा चुनावों में कुल वैध मतों का कम से कम 6 प्रतिशत मत प्राप्त करे और साथ ही कम से कम चार राज्यों से लोकसभा में चार सांसद निर्वाचित करे। 3. संविधान की नौवीं अनुसूची को प्रथम संविधान संशोधन अधिनियम, 1951 द्वारा जोड़ा गया था, और 'केशवानंद भारती वाद' (1973) के निर्णय के पश्चात यह स्थापित किया गया है कि 24 अप्रैल 1973 के बाद नौवीं अनुसूची में सम्मिलित किए जाने वाले किसी भी अधिनियम या विनिमय की न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) इस आधार पर की जा सकती है कि वे संविधान के मूल ढांचे (Basic Structure) का उल्लंघन करते हैं या नहीं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की अभिलेख न्यायालय (Court of Record) के रूप में स्थिति और न्यायालय की अवमानना (Contempt of Court) की शक्ति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 129 के अनुसार उच्चतम न्यायालय एक अभिलेख न्यायालय है, जिसका अर्थ है कि उसके सभी निर्णयों, अभिलेखों और कार्रवाइयों को साक्ष्य के रूप में स्थायी मान्यता प्राप्त होती है और देश के किसी भी न्यायालय में उनके विधिक मूल्य पर प्रश्न नहीं उठाया जा सकता है। 2. उच्चतम न्यायालय को संविधान के तहत न केवल अपनी अवमानना के लिए, बल्कि देश के उच्च न्यायालयों और अधीनस्थ न्यायालयों की अवमानना के लिए भी दंडित करने की व्यापक और पूर्ण शक्ति प्राप्त है। 3. 'न्यायालय की अवमानना अधिनियम, 1971' के प्रावधानों के तहत सिविल अवमानना (Civil Contempt) का तात्पर्य उच्चतम न्यायालय के किसी निर्णय, डिक्री, आदेश या रिट का जानबूझकर उल्लंघन करना है, जबकि आपराधिक अवमानना (Criminal Contempt) के अंतर्गत ऐसा कोई प्रकाशन या कार्य शामिल है जो उच्चतम न्यायालय के प्राधिकार को कम करता है या न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5-11) के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों और 'भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 9 के अनुसार, यदि किसी भारत के नागरिक ने स्वेच्छा से किसी अन्य विदेशी राज्य की नागरिकता अर्जित कर ली है, तो वह अनुच्छेद 5, 6, 8 या 10 के प्रावधानों के बावजूद भारत का नागरिक नहीं रहेगा, और यह स्वतः समाप्ति का एक स्पष्ट संवैधानिक प्रावधान है। 2. भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत 'पंजीकरण द्वारा' (By Registration) भारत की नागरिकता प्राप्त करने के लिए सामान्यतः यह अनिवार्य शर्त है कि आवेदक को पंजीकरण के आवेदन से ठीक पहले कम से कम सात वर्ष तक भारत में निवास करना आवश्यक होता है (यदि वह भारतीय मूल का व्यक्ति या राष्ट्रमंडल देश का नागरिक नहीं है)। 3. अनुच्छेद 11 संसद को नागरिकता के अर्जन और समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों के संबंध में विधि बनाने की अनन्य शक्ति प्रदान करता है, और इस शक्ति का प्रयोग करते हुए संसद ने नागरिकता अधिनियम में अब तक कई बार संशोधन किए हैं, जैसे कि नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) और अधीनस्थ न्यायालयों (Subordinate Courts) की शक्तियों, अधिकारक्षेत्र और न्यायिक नियंत्रण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 227 के अंतर्गत प्रत्येक उच्च न्यायालय को अपने प्राधिकार क्षेत्र के सभी न्यायालयों और न्यायाधिकरणों (सैन्य न्यायालयों को छोड़कर) पर अधीक्षण (Superintendence) की व्यापक शक्ति प्राप्त है, और यह अधीक्षण शक्ति केवल प्रशासनिक प्रकृति की न होकर न्यायिक अधीक्षण तक भी विस्तृत होती है। 2. संविधान के अनुच्छेद 233 के अनुसार किसी राज्य में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और पदोन्नति राज्यपाल द्वारा राज्य के उच्च न्यायालय से परामर्श करने के पश्चात ही की जाती है, तथा जिला न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने के लिए किसी व्यक्ति के पास केंद्र या राज्य की न्यायिक सेवा में कम से कम सात वर्ष का अभ्यास या अनुभव होना आवश्यक है और वह भारत या किसी राज्य सरकार के अधीन कार्यरत अन्य अधिकारी नहीं होना चाहिए। 3. न्यायिक सेवा के अन्य सदस्यों की नियुक्ति (जिला न्यायाधीशों से भिन्न) संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा राज्य लोक सेवा आयोग और उच्च न्यायालय के परामर्श से नियम बनाकर की जाती है, किंतु ऐसे सदस्यों की पदोन्नति और नियंत्रण से संबंधित विषयों पर अंतिम निर्णय लेने की शक्ति पूरी तरह से राज्य के मंत्रिमंडल (Cabinet) के पास होती है, जिसमें उच्च न्यायालय का कोई परामर्श अनिवार्य नहीं है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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