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Indian Polity
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भारतीय संविधान सभा के गठन और उसकी निर्माण प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान सभा के सदस्यों का निर्वाचन प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के एकल संक्रमणीय मत प्रणाली के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से किया गया था, जिसमें ब्रिटिश भारत के प्रांतों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में कुल 296 सीटें आवंटित की गई थीं।
- 2. संविधान सभा में रियासतों (Princely States) के प्रतिनिधियों का चयन संबंधित रियासतों के शासकों द्वारा नामांकित किया जाना था, किंतु रियासतों के प्रतिनिधियों ने संविधान सभा की प्रारंभिक बैठकों में भाग नहीं लिया क्योंकि वे प्रारंभ में इस सभा से अलग रहना चाहते थे।
- 3. संविधान सभा की कुल सदस्य संख्या 389 निर्धारित की गई थी, जिसमें से 93 सीटें भारतीय रियाਸतों के लिए थीं, तथा ब्रिटिश प्रांतों के लिए निर्धारित 296 सीटों में से 4 सीटें मुख्य आयुक्तों के क्षेत्रों (Chief Commissioners' Provinces) से संबंधित थीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान सभा के सदस्यों का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से प्रांतीय विधानसभाओं द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के एकल संक्रमणीय मत द्वारा हुआ था। ब्रिटिश प्रांतों को 296 सीटें दी गई थीं। कथन 2 असत्य है क्योंकि रियासतों के प्रतिनिधि प्रारंभ में शामिल नहीं हुए थे यह आंशिक रूप से सही लग सकता है, किंतु अधिकांश रियासतों ने धीरे-धीरे संविधान सभा में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर ली थी और वे शुरू से ही पूर्णतः अलग नहीं रहे थे, बल्कि रियासतों की कार्य समिति ने चर्चा के बाद भाग लिया था। (टीका: सटीक संदर्भ में रियासतों ने धीरे-धीरे अपनी उपस्थिति दर्ज कराई)। कथन 3 बिल्कुल सही है: कुल 389 सदस्यों में से 296 ब्रिटिश भारत और 93 देशी रियासतों के लिए थीं। ब्रिटिश भारत की 296 सीटों में से 292 गवर्नर के प्रांतों से और 4 मुख्य आयुक्तों के क्षेत्रों (दिल्ली, अजमेर-मारवाड़, कुर्ग और ब्रिटिश बलूचिस्तान) से थीं। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर विजिट करें।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत केंद्र-राज्य विधाई संबंधों और अंतर-राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) के प्रावधानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 263 के अनुसार राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि यदि किसी समय लोकहित में यह प्रतीत होता है कि अंतर-राज्यीय परिषद् का गठन किया जाना चाहिए, तो वह ऐसी परिषद् की स्थापना कर सकता है और उसके द्वारा किए जाने वाले कृत्यों, उसकी संरचना तथा पद्धति को परिभाषित कर सकता है, तथा इस परिषद् का मुख्य कार्य राज्यों के बीच उत्पन्न विवादों की जाँच करना और उन पर सलाह देना है।
2. अनुच्छेद 249 के उपबंधों के अनुसार, यदि राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से यह संकल्प पारित कर दे कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक या समीचीन है कि संसद राज्य सूची में शामिल किसी भी विषय पर विधि बना सकती है, तो संसद उस विषय पर संपूर्ण देश या उसके किसी भाग के लिए कानून बना सकती है, और ऐसा संकल्प अधिकतम दो वर्ष की अवधि के लिए प्रवृत्त रहता है।
3. प्रशासनिक संबंधों के अंतर्गत संविधान के अनुच्छेद 257 के अनुसार प्रत्येक राज्य की कार्यकारी शक्ति का इस प्रकार प्रयोग किया जाएगा जिससे संघ की कार्यकारी शक्ति के प्रयोग में कोई बाधा न पड़े या उस पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े, और संघ की कार्यकारी शक्ति का विस्तार राज्यों को इस प्रयोजन के लिए आवश्यक निर्देश देने तक होता है कि वे अपने क्षेत्र में रेलमार्गों और संचार के साधनों के रखरखाव तथा उनके संरक्षण के लिए क्या कदम उठाएं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के भाग IV के अंतर्गत वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) और उनके क्रियान्वयन तथा विशिष्ट संशोधनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 39(b) और 39(c) के अंतर्गत भौतिक संसाधनों के स्वामित्व और नियंत्रण को इस प्रकार वितरित करने का निर्देश है कि समुदाय के सामान्य हित की सर्वोत्तम प्राप्ति हो, तथा सर्वोच्च न्यायालय ने अपने ऐतिहासिक निर्णयों में यह स्पष्ट किया है कि इन अनुच्छेदों के कार्यान्वयन के लिए बनाई गई विधियों को अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 19 के उल्लंघन के आधार पर शून्य घोषित नहीं किया जा सकता है, भले ही वे संपत्ति के निजी अधिकारों को प्रभावित करती हों।
2. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा अनुच्छेद 38 में यह नया खंड जोड़ा गया कि राज्य, विशिष्टतया, आय, प्रतिष्ठा, सुविधाओं और अवसरों की असमानताओं को केवल व्यक्तियों के बीच ही नहीं, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले और विभिन्न व्यवसायों में लगे हुए समूहों के बीच भी कम से कम करने का प्रयास करेगा।
3. संविधान के अनुच्छेद 45 में मूल रूप से छह वर्ष से कम आयु के बालकों के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा प्रदान करने का प्रत्यक्ष प्रावधान था, जिसे बाद में 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा बदलकर 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए अनिवार्य शिक्षा का मूल अधिकार बना दिया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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विधानसभा का सदस्य बनने के लिए न्यूनतम आयु क्या है?
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भारतीय संसद की विधाई प्रक्रिया और वित्तीय विधेयकों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 117(1) के अंतर्गत ऐसा वित्तीय विधेयक (Financial Bill Category-I), जिसमें अनुच्छेद 110 में उल्लिखित विशिष्ट मामले शामिल होते हैं, केवल लोकसभा में ही पुनःस्थापित किया जा सकता है और इसे पेश करने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश आवश्यक होती है, किंतु इसके पारित होने की प्रक्रिया साधारण विधेयक के समान ही दोनों सदनों में समान शक्तियों के साथ होती है।
2. अनुच्छेद 117(3) के तहत आने वाले वित्तीय विधेयक (Financial Bill Category-II), जो केवल भारत की संचित निधि से व्यय आकर्षित करते हैं, को संसद के किसी भी सदन में पुनःस्थापित किया जा सकता है, किंतु राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश के बिना इस पर विचार नहीं किया जा सकता है।
3. दोनों सदनों के बीच विधायी गतिरोध की स्थिति में संविधान के अनुच्छेद 108 के तहत बुलाई जाने वाली संयुक्त बैठक का प्रावधान धन विधेयक (Money Bill) और संविधान संशोधन विधेयकों के साथ-साथ वित्तीय विधेयकों (Category-I और Category-II दोनों) के लिए भी पूरी तरह से लागू होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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प्रथम वित्त आयोग के अध्यक्ष कौन थे?
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