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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों और 'भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 9 के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त (Termination) हो जाएगी, और यह नियम युद्ध काल या शांति काल दोनों ही परिस्थितियों में समान रूप से लागू होता है।
  2. 2. भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत 'देशीयकरण' (Naturalization) द्वारा नागरिकता प्राप्त करने के लिए यह एक अनिवार्य शर्त है कि आवेदक किसी ऐसे देश का नागरिक न हो जहाँ भारतीय नागरिकों को देशीयकरण द्वारा नागरिकता प्राप्त करने से प्रतिबंधित किया गया हो।
  3. 3. संसद को संविधान के अनुच्छेद 11 के तहत यह अनन्य शक्ति प्राप्त है कि वह नागरिकता के अर्جين और समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों के संबंध में विधि का विनियमन कर सकती है, किंतु इस शक्ति के प्रयोग के माध्यम से संसद किसी भी व्यक्ति को मौलिक अधिकारों की तरह भू-तक्षी (Retrospective) प्रभाव से नागरिकता से वंचित नहीं कर सकती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 9 के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी देश की नागरिकता ग्रहण कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाती है। कथन 2 सही है: भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 की तीसरी अनुसूची के प्रावधानों के तहत 'देशीयकरण' (Naturalization) द्वारा नागरिकता प्राप्त करने के लिए यह आवश्यक है कि आवेदक उस देश का नागरिक न हो जो भारतीयों को अपने देश की नागरिकता प्राप्त करने से रोकता हो। कथन 3 गलत है: संसद को अनुच्छेद 11 के तहत नागरिकता कानून बनाने की व्यापक और पूर्ण शक्ति प्राप्त है, और संसद को यह अधिकार है कि वह अपनी विधियों को भू-तक्षी (Retrospective) प्रभाव से भी लागू कर सकती है, जैसा कि नागरिकता (संशोधन) अधिनियमों के मामले में देखा गया है। अधिक विस्तृत अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर जा सकते हैं।
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