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Indian Polity
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राज्य की कार्यपालिका और मुख्यमंत्री की शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 167 के अनुसार राज्य के मुख्यमंत्री का यह कर्तव्य है कि वह राज्य के प्रशासन से संबंधित और विधान विषयक प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राज्यपाल को संसूचित करे तथा राज्यपाल द्वारा माँगी गई सभी सूचनाएँ उन्हें प्रदान करे।
  2. 2. यदि मुख्यमंत्री विधानसभा में विश्वास मत खो देता है या उसका त्यागपत्र हो जाता है, तो मंत्रिपरिषद स्वतः विघटित हो जाती है और राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह के बिना अपने स्वविवेक से नए मुख्यमंत्री की नियुक्ति कर सकता है, बशर्ते सदन में किसी अन्य नेता के पास बहुमत का स्पष्ट दावा हो।
  3. 3. राज्य के महाधिवक्ता (Advocate General) की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और वह अपने पद पर राज्यपाल के प्रसादपर्यंत (During the pleasure of the Governor) धारण करता है, किंतु महाधिवक्ता को राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों में बोलने और भाग लेने का अधिकार तो है, परंतु उसे मतदान का अधिकार प्राप्त नहीं है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए तीनों कथन राज्य की कार्यपालिका और मुख्यमंत्री/महाधिवक्ता के संदर्भ में पूर्णतः सत्य हैं। संविधान के अनुच्छेद 167 में मुख्यमंत्री के कर्तव्यों का उल्लेख किया गया है जिसके तहत राज्यपाल को प्रशासन और विधान संबंधी सूचना देना अनिवार्य है। मुख्यमंत्री के त्यागपत्र या मृत्यु के पश्चात मंत्रिपरिषद का विघटन हो जाता है और राज्यपाल नए नेतृत्व के चयन के लिए स्वविवेक का प्रयोग कर सकते हैं। अनुच्छेद 165 के तहत महाधिवक्ता की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा होती है और उसे सदन की कार्यवाही में भाग लेने का अधिकार है किंतु मत देने का अधिकार नहीं होता है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था को पढ़ें।
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