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Indian Polity
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भारतीय संसद की विधाई प्रक्रिया और विशेष विधेयकों (जैसे संविधान संशोधन और धन विधेयक) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 368 के अधीन संविधान संशोधन विधेयक को संसद के किसी भी सदन में पुनःस्थापित किया जा सकता है, और इस विधेयक को पारित करने के लिए प्रत्येक सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत के साथ-साथ सदन की कुल कुल सदस्य संख्या के बहुमत (Absolute Majority) का होना अनिवार्य है, तथा इसके लिए संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) का प्रावधान किसी भी स्थिति में लागू नहीं होता है।
  2. 2. अनुच्छेद 109 के अंतर्गत धन विधेयक (Money Bill) केवल लोकसभा में ही पुनःस्थापित किया जा सकता है, और लोकसभा द्वारा पारित होने के बाद जब इसे राज्यसभा में भेजा जाता है, तो राज्यसभा के पास इस विधेयक को अस्वीकृत करने या इसमें संशोधन करने की शक्ति नहीं होती है, बल्कि वह अधिकतम 14 दिनों की अवधि के भीतर अपनी सिफारिशों के साथ इसे लोकसभा को लौटा सकती है, जिसे मानने या न मानने के लिए लोकसभा पूरी तरह स्वतंत्र है।
  3. 3. अनुच्छेद 117(1) के अंतर्गत उल्लिखित 'वित्तीय विधेयक (श्रेणी-I)' को केवल राज्यसभा में ही प्रथम बार पुनःस्थापित किया जा सकता है, और इसे पुनःस्थापित करने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व संस्तुति की कोई आवश्यकता नहीं होती, बशर्ते इसे अंतिम चरण में लोकसभा द्वारा पारित किया जाए।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन विधेयक संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) में लाया जा सकता है और इसके लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है तथा संविधान संशोधन विधेयकों पर अनुच्छेद 108 के तहत संयुक्त बैठक का कोई प्रावधान नहीं है। कथन 2 सही है क्योंकि धन विधेयक (अनुच्छेद 110/109) केवल लोकसभा में प्रस्तुत होता है और राज्यसभा इसे अधिकतम 14 दिन तक रोक सकती है। कथन 3 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 117(1) के तहत 'वित्तीय विधेयक (श्रेणी-I)' को भी केवल लोकसभा में ही पुनःस्थापित किया जा सकता है, राज्यसभा में नहीं, और इसके लिए राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश अनिवार्य होती है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
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→ भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) की संरचना, निर्वाचन और आरक्षण के प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 243C के अनुसार राज्य का विधानमंडल, विधि द्वारा, पंचायतों की संरचना के संबंध में उपबंध कर सकता है, किंतु इस बात का प्रावधान अनिवार्यतः किया गया है कि किसी भी राज्य के पंचायत के सभी स्तरों पर सदस्यों का निर्वाचन प्रत्यक्ष रूप से उस पंचायत क्षेत्र के क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों से सीधे लोगों द्वारा किया जाएगा, जबकि पंचायत के अध्यक्षों का निर्वाचन प्रत्येक स्तर पर अनिवार्य रूप से अप्रत्यक्ष पद्धति से ही होगा। 2. संविधान के अनुच्छेद 243D के अंतर्गत पंचायतों के सभी स्तरों पर महिलाओं के लिए कुल विहित स्थानों (Seats) की संख्या के कम से कम एक-तिहाई (यानि 33 प्रतिशत) स्थान अनिवार्य रूप से आरक्षित होंगे, तथा यह आरक्षण प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों ही रूपों में चुने जाने वाले अध्यक्षों के कार्यालयों पर भी लागू होता है। 3. 73वें संविधान संशोधन द्वारा पंचायतों की अवधि पांच वर्ष निर्धारित की गई है, और यदि किसी पंचायत का विघटन समय से पूर्व हो जाता है, तो विघटन की तिथि से छह महीने की अवधि के भीतर नए निर्वाचन कराए जाने अनिवार्य हैं, किंतु यदि बची हुई अवधि छह महीने से कम की है, तो नई पंचायत का गठन करना आवश्यक नहीं होगा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? 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→ संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 316 के अनुसार संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या अन्य सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है, किंतु उन्हें उनके पद से हटाने का अधिकार केवल और केवल भारत के राष्ट्रपति को ही प्राप्त है, राज्यपाल को नहीं। 2. संघ लोक सेवा आयोग के सदस्य अपना कार्यकाल समाप्त होने पर या पद से हटने के पश्चात भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य रोजगार के लिए पूर्णतः अपात्र हो जाते हैं, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष अपने कार्यकाल की समाप्ति के बाद संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य के रूप में अथवा किसी अन्य राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति का पात्र होता है, बशर्ते वह भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य नियोजन का पात्र नहीं होता है। 3. अनुच्छेद 323 के अंतर्गत संघ लोक सेवा आयोग आयोग के कार्यों के संबंध में एक वार्षिक प्रतिवेदन (Annual Report) राष्ट्रपति को प्रस्तुत करता है, जिसे राष्ट्रपति संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाता है, और इसी प्रकार राज्य लोक सेवा आयोग अपनी रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपता है जो उसे राज्य के विधानमंडल के समक्ष रखवाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? 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