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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राजभाषा, राजनीतिक दलों की मान्यता तथा संविधान की विभिन्न अनुसूचियों और भागों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के भाग XVII के अनुच्छेद 348 के अनुसार उच्चतम न्यायालय और प्रत्येक उच्च न्यायालय में सभी कार्रवाइयां अंग्रेजी भाषा में ही होंगी, जब तक कि संसद विधि द्वारा कोई अन्य प्रावधान न करे, और किसी भी राज्य का राज्यपाल राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से उस राज्य के उच्च न्यायालय की कार्रवाइयों में हिंदी या किसी अन्य राजभाषा के प्रयोग को प्राधिकृत कर सकता है।
- 2. संविधान की नौवीं अनुसूची को प्रथम संविधान संशोधन अधिनियम, 1951 द्वारा जोड़ा गया था, और इसके तहत यह प्रावधान किया गया कि इस अनुसूची में शामिल किए गए विधियों को इस आधार पर शून्य घोषित नहीं किया जा सकता कि वे किसी मौलिक अधिकार का उल्लंघन करते हैं, किंतु उच्चतम न्यायालय के 'केशवानंद भारती मामले' (1973) के निर्णय के पश्चात 24 अप्रैल 1973 के बाद इस अनुसूची में शामिल कानूनों की न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) की जा सकती है यदि वे संविधान के बुनियादी ढांचे का उल्लंघन करते हैं।
- 3. दलबदल विरोधी कानून (संविधान की दसवीं अनुसूची) के अंतर्गत किसी राजनीतिक दल के 'विलय' (Merger) की वैधता के लिए यह संवैधानिक आवश्यकता है कि मूल राजनीतिक दल के कम से कम आधे (50%) सदस्य विलय के पक्ष में हों, अन्यथा उन सभी सदस्यों को दलबदल के आधार पर अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के भाग XVII के अंतर्गत अनुच्छेद 348 में यह प्रावधान किया गया है कि उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों की सभी कार्यवाहियां अंग्रेजी भाषा में होंगी, किंतु राज्यपाल राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से उच्च न्यायालय की कार्यवाहियों में हिंदी या राज्य की राजभाषा के प्रयोग को प्राधिकृत कर सकता है। कथन 2 सही है: प्रथम संविधान संशोधन (1951) द्वारा जोड़ी गई नौवीं अनुसूची को न्यायिक समीक्षा से संरक्षण प्रदान किया गया था, किंतु 1973 के केशवानंद भारती वाद के बाद न्यायालय ने स्पष्ट किया कि 24 अप्रैल 1973 के पश्चात इस अनुसूची में जोड़े गए कानूनों की न्यायिक समीक्षा की जा सकती है यदि वे बुनियादी ढांचे (Basic Structure) का हनन करते हैं। कथन 3 गलत है: 52वें संशोधन (1985) के तहत विलय के लिए मूल दल के कम से कम दो-तिहाई (2/3) सदस्यों का सहमत होना अनिवार्य किया गया था, न कि आधे (50%) सदस्यों का। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर जाएं।
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भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत अंतर-राज्यीय परिषद (Inter-State Council) के गठन का प्रावधान किया गया है, और इसकी स्थापना सर्वप्रथम किस वर्ष की गई थी?
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भारत के महान्यायवादी (Attorney General) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) के संवैधानिक पदों, उनकी योग्यताओं तथा उनके विशेषाधिकारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार, महान्यायवादी को नियुक्त होने के लिए वही योग्यताएँ होनी चाहिए जो उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश होने के लिए आवश्यक होती हैं, तथा वह अपने पद पर राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत (During the pleasure of the President) पद धारण करता है, किंतु संविधान ने उसका कोई निश्चित कार्यकाल निर्धारित नहीं किया है।
2. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) का पदभार संभालने वाला व्यक्ति अपने पद की अवधि (6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो) समाप्त होने के पश्चात भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी अन्य कार्यालय या पद का पात्र नहीं रहता है, और वह संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही में महान्यायवादी की भाँति भाग ले सकता है किंतु उसे सदन में मतदान करने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है।
3. भारत के महान्यायवादी को भारत के राज्यक्षेत्र के सभी न्यायालयों में audiencia (सुनवाई का अधिकार) प्राप्त है, और उसे संसद के दोनों सदनों या उनकी किसी संयुक्त बैठक में बोलने तथा भाग लेने का अधिकार तो है, किंतु सदन की किसी संसदीय समिति का सदस्य बनाए जाने पर उसे उस समिति में मतदान करने का भी विधिक अधिकार प्राप्त होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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'कॉलेजियम प्रणाली' (Collegium System) किससे संबंधित है?
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSC) के गठन, स्वतंत्रता, सदस्यों की पदावधि और उनके सेवा की शर्तों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 316 के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग या राज्य लोक सेवा आयोग के प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल अपने पद ग्रहण करने की तिथि से छह वर्ष की अवधि या पैंसठ वर्ष की आयु प्राप्त करने तक (जो भी पहले हो) होता है, बशर्ते किसी राज्य लोक सेवा आयोग के मामले में यह आयु सीमा पैंसठ के स्थान पर बासठ वर्ष निर्धारित की गई है।
2. संविधान के अनुच्छेद 317 के अंतर्गत संघ लोक सेवा आयोग या किसी राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य को केवल 'कदाचार' (Misbehavior) के आधार पर ही राष्ट्रपति के आदेश से उसके पद से हटाया जा सकता है, तथा कदाचार के ऐसे प्रत्येक मामले में राष्ट्रपति द्वारा उच्चतम न्यायालय को जाँच के लिए भेजा जाना अनिवार्य है और उच्चतम न्यायालय द्वारा दी गई सलाह राष्ट्रपति के लिए पूर्ण रूप से बाध्यकारी होती है।
3. अनुच्छेद 319 के उपबंधों के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त होने के पश्चात वह भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी अन्य नियोजन (Employment) का पात्र नहीं होता है, किंतु राज्य लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य के रूप में अथवा किसी अन्य राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति के लिए पूर्णतः पात्र होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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दलबदल विरोधी कानून किस अनुसूची में है?
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