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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के संवैधानिक प्रावधानों, शक्तियों तथा उत्तरदायित्वों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 67(क) के अनुसार उपराष्ट्रपति अपने पद ग्रहण करने की तारीख से पाँच वर्ष की अवधि तक पद धारण करता है, किंतु वह राष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपने पद से त्यागपत्र दे सकता है, या उसे राज्यसभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत द्वारा पारित संकल्प और लोकसभा द्वारा सहमत प्रस्ताव द्वारा पद से हटाया जा सकता है, जिसके लिए राष्ट्रपति के महाभियोग जैसी औपचारिक प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होती है, बशर्ते इस आशय का प्रस्ताव लाने से कम से कम चौदह दिन पूर्व लिखित सूचना दी गई हो।
  2. 2. अनुच्छेद 74(1) के प्रावधान के अनुसार राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी जिसका प्रधान प्रधानमंत्री होगा, और राष्ट्रपति अपने कृत्यों का प्रयोग करने में ऐसी सलाह के अनुसार कार्य करेगा, किंतु 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा यह जोड़ा गया कि राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद से ऐसी सलाह पर "एक बार" पुनर्विचार करने की अपेक्षा कर सकता है और राष्ट्रपति पुनर्विचार के पश्चात दी गई सलाह के अनुसार ही कार्य करेगा।
  3. 3. अनुच्छेद 75(5) के अनुसार कोई भी मंत्री जो निरंतर छह मास की किसी अवधि तक संसद के किसी सदन का सदस्य नहीं है, उस अवधि की समाप्ति पर मंत्री नहीं रहेगा, और यदि प्रधानमंत्री स्वयं संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं है, तो वह छह महीने के भीतर संसद के किसी भी सदन की सदस्यता प्राप्त किए बिना अपने पद पर बने रहने का संवैधानिक अधिकार रखता है, बशर्ते उसे लोकसभा में बहुमत का विश्वास प्राप्त हो।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: उपराष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्ष होता है। उसे राज्यसभा के तत्कालीन सदस्यों के बहुमत (Effective Majority) द्वारा पारित संकल्प और लोकसभा की सहमति से हटाया जा सकता है, और इसके लिए राष्ट्रपति की तरह महाभियोग प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होती है। इस प्रस्ताव को लाने से पूर्व 14 दिन की लिखित सूचना देना अनिवार्य है। कथन 2 सही है: अनुच्छेद 74(1) के तहत राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार कार्य करता है। 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा राष्ट्रपति को यह शक्ति दी गई कि वह मंत्रिपरिषद की सलाह को एक बार पुनर्विचार के लिए वापस भेज सकता है, किंतु पुनर्विचार के बाद दी गई सलाह का पालन करना राष्ट्रपति के लिए अनिवार्य होता है। कथन 3 गलत है: अनुच्छेद 75(5) के अनुसार कोई भी मंत्री (चाहे वह प्रधानमंत्री ही क्यों न हो) जो छह महीने की निरंतर अवधि तक संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं रहता, वह उस अवधि की समाप्ति पर मंत्री पद पर नहीं रह सकता। प्रधानमंत्री के लिए भी संसद के किसी एक सदन (लोकसभा या राज्यसभा) का सदस्य होना अनिवार्य है, भले ही वह नियुक्ति के समय सदस्य न हो, किंतु उसे 6 माह के भीतर सदस्यता लेनी ही होगी। इस प्रकार के महत्वपूर्ण संवैधानिक अनुच्छेदों और अवधारणाओं की विस्तृत जानकारी के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था का अध्ययन कर सकते हैं।
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