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Indian Polity
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भारतीय उच्चतम न्यायालय की अधिकारिता, अवमानना और न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 137 के तहत उच्चतम न्यायालय को यह शक्ति प्राप्त है कि वह अपने द्वारा दिए गए किसी निर्णय या आदेश का पुनरावलोकन (Review) कर सके, और यह पुनरावलोकन शक्ति केवल संसद द्वारा बनाई गई विधि के अधीन ही प्रयोग की जा सकती है, इसके लिए न्यायालय अपनी स्वविवेक शक्ति का प्रयोग नहीं कर सकता।
- 2. अनुच्छेद 142 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय अपनी अधिकारिता का प्रयोग करते हुए ऐसा कोई भी 'डिग्री या आदेश' पारित कर सकता है जो किसी मामले में पूर्ण न्याय (Complete Justice) करने के लिए आवश्यक हो, और ऐसा प्रत्येक आदेश पूरे भारत में प्रवर्तनीय होता है।
- 3. न्यायालय की अवमानना (Contempt of Court) के संदर्भ में, संविधान के अनुच्छेद 129 के तहत उच्चतम न्यायालय एक 'अभिलेख न्यायालय' (Court of Record) है जिसे अपनी अवमानना के लिए दंडित करने की शक्ति प्राप्त है, जिसमें सिविल अवमानना के साथ-साथ आपराधिक अवमानना भी शामिल है, और संसद को इस शक्ति को सीमित करने या समाप्त करने का पूर्ण संवैधानिक अधिकार प्राप्त है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि अनुच्छेद 137 के तहत उच्चतम न्यायालय की पुनरावलोकन (Review) की शक्ति संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि या नियमों के अधीन तो होती है, किंतु यह उसकी अपनी अंतर्निहित और संवैधानिक शक्ति है जो न्यायिक स्वतंत्रता का महत्वपूर्ण अंग है। कथन 2 सत्य है; अनुच्छेद 142 उच्चतम न्यायालय को किसी भी लंबित वाद या मामले में 'पूर्ण न्याय' (Complete Justice) करने के लिए व्यापक और विशिष्ट शक्तियाँ प्रदान करता है। कथन 3 असत्य है क्योंकि हालांकि अनुच्छेद 129 के तहत उच्चतम न्यायालय एक अभिलेख न्यायालय है और उसे अपनी अवमानना के लिए दंड देने की शक्ति प्राप्त है, किंतु संसद इस संवैधानिक शक्ति को कानून बनाकर समाप्त या सीमित नहीं कर सकती, क्योंकि यह न्यायालय की स्वतंत्रता और संविधान के बुनियादी ढाँचे का हिस्सा है। विषय की अधिक जानकारी के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर जा सकते हैं।
Related Questions
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भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा पंचायती राज व्यवस्था के संदर्भ में जोड़े गए प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम द्वारा संविधान में नया भाग IX जोड़ा गया, जिसका शीर्षक 'पंचायते' है और अनुच्छेद 243 से 243-O तक के प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिसके तहत प्रत्येक राज्य में ग्राम, मध्यवर्ती और जिला स्तर पर त्रि-स्तरीय पंचायती राज प्रणाली का गठन करना अनिवार्य किया गया है, बशर्ते उन राज्यों को छोड़कर जिनकी जनसंख्या बीस लाख से कम है, जिन्हें मध्यवर्ती स्तर के गठन से छूट दी गई है।
2. इस संशोधन के माध्यम से संविधान में ग्यारहवीं अनुसूची जोड़ी गई, जिसमें पंचायतों की शक्तियों, प्राधिकार और उत्तरदायित्वों से संबंधित कुल 29 कार्यात्मक मदों (Functional Items) का उल्लेख किया गया है, जिन पर पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं तैयार करने का अधिकार दिया गया है।
3. पंचायतों के वित्तीय सुदृढ़ता के लिए प्रत्येक राज्य के राज्यपाल द्वारा हर पांच वर्ष की समाप्ति पर एक वित्त आयोग (Finance Commission) का गठन किया जाना अनिवार्य किया गया है, जो पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करता है और राज्य की संचित निधि से पंचायतों को दिए जाने वाले अनुदानों के वितरण की संस्तुति करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान सभा के गठन, समितियों और उसकी निर्माण प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान सभा के लिए जुलाई-अगस्त 1946 में हुए चुनावों में ब्रिटिश भारत के प्रांतों के लिए निर्धारित 296 सीटों में से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 208 सीटें जीती थीं, जबकि मुस्लिम लीग को 73 सीटें प्राप्त हुई थीं, और इस निर्वाचन प्रक्रिया में सार्वभौम वयस्क मताधिकार का प्रयोग नहीं किया गया था।
2. संविधान के निर्माण हेतु संविधान सभा द्वारा कुल 22 प्रमुख और गौण समितियों का गठन किया गया था, जिनमें संघ संविधान समिति, प्रांतीय संविधान समिति और प्रारूप समिति (Drafting Committee) सम्मिलित थीं, तथा सरदार वल्लभभाई पटेल को 'प्रारूप समिति' का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था।
3. संविधान सभा द्वारा संविधान के निर्माण में कुल 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन का समय लगा था, तथा संविधान के प्रारूप पर कुल तीन वाचन (Readings) हुए थे, जिसके उपरांत 26 नवंबर 1949 को संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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राज्यपाल का कार्यकाल?
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प्रारूप समिति (Drafting Committee) का गठन कब हुआ था?
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान की प्रस्तावना में उल्लिखित 'न्याय (सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक)' के आदर्श को वर्ष 1917 की रूसी क्रांति से प्रेरणा लेकर शामिल किया गया है, जबकि 'स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व' के आदर्श को फ्रांसीसी क्रांति (1789) से लिया गया है।
2. 'गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य' (1967) के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने पहली बार यह स्पष्ट रूप से प्रतिपादित किया था कि प्रस्तावना संविधान का एक अनन्य और अभिन्न अंग है, जिसमें संसद अपने संविधान संशोधन की अधिकारिता के तहत मूल अधिकारों की भाँति संशोधन कर सकती है।
3. प्रस्तावना न तो विधायिका की शक्तियों का स्रोत है और न ही उसकी शक्तियों पर कोई प्रतिबंध लगाती है, तथा यह गैर-न्यायिक (Non-justiciable) प्रकृति की है अर्थात् इसके प्रावधानों को किसी भी न्यायालय में लागू नहीं कराया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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