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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों (अनुच्छेद 5-11) और नागरिकता (संशोधन) अधिनियमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 9 के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाएगी, और यह नियम भारत के बाहर जन्मे उन सभी व्यक्तियों पर भी लागू होता है जो पंजीकरण द्वारा नागरिकता प्राप्त करना चाहते हैं।
  2. 2. नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 के अंतर्गत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के प्रवासियों को अवैध प्रवासी नहीं माना जाएगा और उन्हें देशीयकरण (Naturalisation) के माध्यम से नागरिकता प्राप्त करने के लिए निर्धारित निवास की सामान्य अवधि (11 वर्ष) को छूट देकर 5 वर्ष कर दिया गया है।
  3. 3. अनुच्छेद 11 के तहत भारतीय संसद को नागरिकता के अर्जन और समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों के संबंध में विधि बनाने की संपूर्ण और अनन्य शक्ति प्रदान की गई है, और इस संवैधानिक शक्ति के प्रयोग में संसद द्वारा पारित किसी भी कानून की न्यायिक समीक्षा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नहीं की जा सकती।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 9 केवल स्वेच्छा से विदेशी नागरिकता प्राप्त करने पर भारतीय नागरिकता की समाप्ति (Termination) का प्रावधान करता है, और यह नियम विदेशी जन्म वाले सभी व्यक्तियों पर स्वतः लागू नहीं होता क्योंकि पंजीकरण के नियम अलग हैं। कथन 2 बिल्कुल सही है; नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 (CAA) उपर्युक्त छह अल्पसंख्यक समुदायों के प्रवासियों के लिए देशीयकरण की आवश्यक निवास अवधि को 11 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष करता है। कथन 3 गलत है क्योंकि संसद को अनुच्छेद 11 के तहत कानून बनाने की शक्ति अवश्य प्राप्त है, किंतु संसद द्वारा बनाया गया कोई भी कानून यदि संविधान के मूलभूत ढाँचे (Basic Structure) या मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है, तो वह न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे से बाहर नहीं है। विस्तृत अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल देख सकते हैं।
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