BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Indian Polity
1 views

भारतीय संविधान के भाग-IVक के अंतर्गत उल्लिखित 'मूल कर्तव्यों' (Fundamental Duties) के प्रावधानों और उनके ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. मूल कर्तव्यों को सरदार स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में जोड़ा गया था, जिसमें समिति ने नागरिकों द्वारा करों का भुगतान (Payment of Taxes) करने को भी एक मूल कर्तव्य के रूप में शामिल करने की संस्तुति की थी, जिसे इंदिरा गांधी सरकार ने स्वीकार नहीं किया था।
  2. 2. अनुच्छेद 51क के तहत प्रदत्त मूल कर्तव्य केवल भारतीय नागरिकों पर ही लागू होते हैं, विदेशी नागरिकों पर नहीं, और इनकी प्रकृति न्यायोचित (Justiciable) है, जिसका अर्थ यह है कि यदि कोई नागरिक किसी मूल कर्तव्य का उल्लंघन करता है, तो उसे सीधे उच्चतम न्यायालय द्वारा दंडित किया जा सकता है।
  3. 3. न्यायमूर्ति जे.एस. वर्मा समिति (1999) ने मूल कर्तव्यों के शिक्षण और उनके प्रभावी क्रियान्वयन से संबंधित संस्तुतियाँ दी थीं, और इस समिति ने यह स्पष्ट किया था कि संविधान के कई मूल कर्तव्यों का सार भारतीय सांस्कृतिक और पारंपरिक मूल्यों जैसे पर्यावरण संरक्षण और भाईचारे में पहले से ही निहित है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: सरदार स्वर्ण सिंह समिति (1976) ने संविधान में मूल कर्तव्यों को जोड़ने की सिफारिश की थी। इस समिति ने नागरिकों के लिए करों का भुगतान करने को भी एक मूल कर्तव्य बनाने का सुझाव दिया था, जिसे सरकार ने उस समय स्वीकार नहीं किया था। कथन 2 गलत है: मूल कर्तव्य प्रकृति से 'न्यायोचित' (Justiciable) नहीं हैं, अर्थात इनके उल्लंघन पर सीधे न्यायालय द्वारा कोई कानूनी दंड स्वतः नहीं दिया जा सकता जब तक कि संसद इसके प्रवर्तन के लिए कोई विशेष विधि (जैसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम आदि) न बना दे। इसके अलावा, ये केवल भारतीय नागरिकों पर लागू होते हैं, विदेशियों पर नहीं। कथन 3 सही है: न्यायमूर्ति जे.एस. वर्मा समिति (1999) ने मूल कर्तव्यों के कानूनी प्रावधानों और उनके कार्यान्वयन के तरीकों का अध्ययन किया था और यह रेखांकित किया कि कई कर्तव्य प्राचीन भारतीय परंपराओं और संस्कृति से जुड़े हैं। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
Share:

Related Questions

मौलिक अधिकार का रक्षक कौन? भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं के प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस संशोधन द्वारा संविधान में भाग IX जोड़ा गया जिसका शीर्षक 'पंचायते' है और इसे अनुच्छेद 243 से 243-O तक समाविष्ट किया गया है, तथा इसके साथ ही ग्यारहवीं अनुसूची जोड़ी गई जिसमें पंचायतों के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आने वाले कुल 29 कार्यकारी विषयों का उल्लेख किया गया है। 2. अधिनियम के अनुसार प्रत्येक राज्य में ग्राम, मध्यवर्ती और जिला स्तर पर पंचायतों का गठन किया जाना अनिवार्य है, किंतु जिन राज्यों की कुल जनसंख्या 20 लाख से कम है, उन्हें मध्यवर्ती स्तर पर पंचायत का गठन करने की छूट प्रदान की गई है। 3. पंचायतों के सभी स्तरों पर प्रत्यक्ष चुनावों के माध्यम से भरे जाने वाले कुल स्थानों का कम से कम एक-तिहाई (33 प्रतिशत) भाग महिलाओं के लिए आरक्षित होना अनिवार्य है, तथा यह आरक्षण महिलाओं के लिए केवल कुल सीटों तक ही सीमित है और इसे अध्यक्षों के पदों (Offices of Chairpersons) पर लागू नहीं किया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) की संरचना, नियुक्ति प्रक्रिया और चुनाव सुधारों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मूल संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग को केवल एक 'एकल-सदस्यीय' निकाय के रूप में उपबंधित किया गया था, जिसमें केवल मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) होते थे, किंतु 1989 में पहली बार राष्ट्रपति द्वारा इसे बहु-सदस्यीय निकाय बनाया गया, और वर्तमान में मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली एक चयन समिति की सिफारिश पर की जाती है। 2. मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की शक्तियां, वेतन और भत्ते सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान होते हैं, किंतु यदि मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों के बीच किसी मतभेद की स्थिति उत्पन्न होती है, तो अंतिम निर्णय मुख्य निर्वाचन आयुक्त की व्यक्तिगत विवेकीय शक्ति के आधार पर लिया जाता है, न कि बहुमत के आधार पर। 3. चुनाव सुधारों के संदर्भ में 'बोहरा समिति' (1993) ने राजनीति के अपराधीकरण (Criminalisation of Politics) की समस्या की गहराई से जाँच की थी और अपराधियों, राजनेताओं तथा नौकरशाहों के बीच सांठगांठ को तोड़ने के लिए संस्थागत तंत्र स्थापित करने की महत्वपूर्ण सिफारिश की थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के भाग IV में वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) और उनके क्रियान्वयन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 39(b) और 39(c) के अंतर्गत निहित नीति निर्देशक सिद्धांतों को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से यदि संसद या राज्य विधानमंडल द्वारा कोई कानून बनाया जाता है और वह कानून अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों का उल्लंघन करता है, तो उसे केवल इस आधार पर असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता कि वह इन मूल अधिकारों को सीमित करता है (यह प्रावधान 25वें संविधान संशोधन, 1971 द्वारा जोड़ा गया था)। 2. सर्वोच्च न्यायालय ने 'मिनर्वा मिल्स वाद' (1980) में यह स्पष्ट रूप से प्रतिपादित किया था कि भारतीय संविधान की नींव मूल अधिकारों और नीति निर्देशक तत्वों के बीच संतुलन के संतुलन चक्र (Balance Wheel) पर टिकी है, और इनमें से किसी एक को दूसरे पर सर्वोच्चता देने से संविधान का मूल ढांचा प्रभावित होता है। 3. अनुच्छेद 44 के तहत राज्य पूरे भारत के राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता (UCC) को सुरक्षित करने का प्रयास करेगा, तथा गोवा एकमात्र ऐसा राज्य है जहाँ संविधान लागू होने के समय से ही पुर्तगाली सिविल कोड, 1867 के रूप में साझी सिविल संहिता लागू है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के ऐतिहासिक विकास के क्रम में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित अधिनियमों और उनके विशिष्ट प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 के द्वारा बंगाल के गवर्नर को 'बंगाल का गवर्नर-जनरल' पदनाम दिया गया तथा उसकी सहायता के लिए चार सदस्यीय कार्यकारी परिषद का गठन किया गया, और इसी अधिनियम के अंतर्गत वर्ष 1774 में कलकत्ता में एक उच्चतम न्यायालय की स्थापना की गई जिसके प्रथम मुख्य न्यायाधीश सर एलिजा इम्पे थे। 2. पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 द्वारा कंपनी के राजनैतिक और वाणिज्यिक कार्यों के बीच अंतर किया गया तथा नियंत्रण बोर्ड (Board of Control) के माध्यम से ब्रिटिश सरकार का कंपनी के नागरिक, सैन्य और राजस्व संबंधी मामलों पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित हो गया, जिससे भारत में 'द्वैध शासन' की शुरुआत हुई। 3. चार्टर अधिनियम, 1813 के द्वारा भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापारिक एकाधिकार को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया, किंतु चीन के साथ व्यापार और चाय के व्यापार पर कंपनी का एकाधिकार अगले 20 वर्षों के लिए सुरक्षित रखा गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.