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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों (अनुच्छेद 5-11) और संसद की विधायी शक्ति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 11 के अनुसार संसद को नागरिकता के अर्जन और समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों के संबंध में उपबंध करने की संपूर्ण शक्ति प्रदान की गई है, और यह शक्ति संसद को संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन करने की विशेष प्रक्रिया अपनाए बिना साधारण बहुमत से कानून बनाने का अधिकार देती है।
  2. 2. अनुच्छेद 9 के अंतर्गत यह स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता अनुच्छेद 5, 6, 7 या 8 के उपबंधों के बावजूद स्वतः समाप्त नहीं होगी, जब तक कि संसद इस संबंध में कोई विशेष दंडात्मक कानून पारित न करे।
  3. 3. अनुच्छेद 10 के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति, जो इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों में से किसी के अधीन भारत का नागरिक है या समझा जाता है, संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए, भारत का नागरिक बना रहेगा, जिसका तात्पर्य यह है कि संसद किसी भी नागरिक की नागरिकता को बिना किसी विधिक प्रक्रिया के कार्यपालिका के साधारण आदेश से छीन सकती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 11 के तहत संसद को यह स्पष्ट अधिकार दिया गया है कि वह नागरिकता के अर्जन और समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों पर कानून बना सकती है। इसके लिए संसद को अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि यह कार्य साधारण बहुमत (Ordinary Majority) से किया जाता है। कथन 2 गलत है: अनुच्छेद 9 के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता अर्जित कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः (Automatically) समाप्त हो जाती है। इसके लिए संसद द्वारा किसी अतिरिक्त दंडात्मक कानून की आवश्यकता नहीं होती है। कथन 3 गलत है: अनुच्छेद 10 के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति भारत का नागरिक बना रहेगा यदि वह इस भाग के प्रावधानों के तहत नागरिक है, किंतु यह संसद द्वारा बनाई गई विधियों के अधीन है। इसका अर्थ यह है कि संसद कानून बनाकर नागरिकता नियंत्रित कर सकती है, परंतु कार्यपालिका को यह अधिकार नहीं है कि वह साधारण प्रशासनिक आदेश से किसी वैध नागरिक की नागरिकता छीन सके। नागरिकता के विस्तृत अध्ययन के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर विजिट करें।
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