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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों और अंतर-राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत गठित 'वित्त आयोग' एक अर्ध-न्यायिक निकाय है, जो केंद्र और राज्यों के बीच करों के नेट राजस्व वितरण तथा राज्यों को दी जाने वाली अनुदान सहायता (Grants-in-Aid) के सिद्धांतों की संस्तुति करता है, किंतु इसकी सिफारिशें सरकार पर पूर्णतः बाध्यकारी होती हैं।
  2. 2. संविधान के अनुच्छेद 263 के अंतर्गत राष्ट्रपति को 'अंतर-राज्यीय परिषद्' की स्थापना करने की शक्ति प्राप्त है, और इस परिषद् का मुख्य कार्य राज्यों के बीच उत्पन्न विवादों की जाँच करना, तथा ऐसे विषयों पर सलाह देना जिनमें राज्यों के समान हित हों, किंतु यदि कोई विवाद कानूनी प्रकृति का है और सर्वोच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार में आता है, तो अंतर-राज्यीय परिषद् उस विवाद पर विचार नहीं कर सकती।
  3. 3. अंतर-राज्यीय परिषद् की बैठकों की अध्यक्षता प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है, और इसके स्थायी सदस्यों में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री (जहाँ विधानसभा है), तथा प्रधानमंत्री द्वारा मनोनीत केंद्रीय मंत्रिपरिषद के कैबिनेट स्तर के कम से कम छह मंत्री शामिल होते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि वित्त आयोग (अनुच्छेद 280) की सिफारिशें प्रकृति से केवल सलाहकारी (Advisory) होती हैं, वे सरकार पर बाध्यकारी नहीं होती हैं। सरकार यह निर्णय लेती है कि उन सिफारिशों को लागू किया जाए या नहीं। कथन 2 सत्य है; अनुच्छेद 263 के तहत अंतर-राज्यीय परिषद् की स्थापना की जाती है, और यह परिषद् राज्यों के बीच उत्पन्न होने वाले सामान्य विवादों की जाँच कर सकती है, किंतु संविधान के अनुच्छेद 131 के अंतर्गत आने वाले मूल क्षेत्राधिकार (Original Jurisdiction) से संबंधित कानूनी विवाद सर्वोच्च न्यायालय के दायरे में आते हैं। कथन 3 सत्य है; अंतर-राज्यीय परिषद् के अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं तथा इसके सदस्यों में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, संघ राज्य क्षेत्रों के मुख्यमंत्री तथा प्रधानमंत्री द्वारा मनोनीत केंद्र के कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर विजिट करें।
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