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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की अपीलीय अधिकारिता (Appellate Jurisdiction) और संविधान की व्याख्या से जुड़े मामलों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 132 के तहत उच्च न्यायालय के किसी सिविल, दांडिक या अन्य कार्यवाही में दिए गए किसी निर्णय, डिक्री या अंतिम आदेश की अपील उच्चतम न्यायालय में तभी की जा सकती है जब संबंधित उच्च न्यायालय यह प्रमाणित कर दे कि मामले में संविधान के निर्वचन से संबंधित विधि का कोई सारवान प्रश्न अंतर्ग्रस्त है।
- 2. संविधान के अनुच्छेद 133 के अनुसार सिविल मामलों में उच्चतम न्यायालय में अपील करने के लिए केवल यही एकमात्र शर्त है कि मामले का आर्थिक मूल्य दो लाख रुपये से अधिक होना चाहिए, तथा उच्च न्यायालय के प्रमाण पत्र की कोई आवश्यकता नहीं होती है।
- 3. यदि किसी उच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 132 के अधीन प्रमाण पत्र देने से इंकार कर दिया है, तो उच्चतम न्यायालय को यह विशेष शक्ति प्राप्त है कि वह अनुच्छेद 136 के तहत 'विशेष अनुमति अपील' (Special Leave to Appeal) की आड़ में किसी भी निर्णय के विरुद्ध अपील करने की अनुमति प्रदान कर सके, बशर्ते मामला केवल उच्च न्यायालयों के निर्णयों तक ही सीमित हो और न्यायाधिकरणों (Tribunals) के निर्णय इसके दायरे से बाहर हों।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 132 के अंतर्गत किसी उच्च न्यायालय के सिविल, दांडिक या अन्य कार्यवाही में दिए गए निर्णय, डिक्री या अंतिम आदेश की अपील उच्चतम न्यायालय में तभी की जा सकती है जब उच्च न्यायालय यह प्रमाणित कर दे कि मामले में संविधान के निर्वचन (Interpretation) से संबंधित विधि का कोई सारवान प्रश्न अंतर्ग्रस्त है। कथन 2 गलत है क्योंकि सिविल मामलों में अनुच्छेद 133 के तहत अपील के लिए केवल आर्थिक मूल्य की शर्त पर्याप्त नहीं थी (मूल्य संबंधी सीमा को पूर्व में संशोधित भी किया गया है), और इसके लिए भी उच्च न्यायालय का यह प्रमाण पत्र आवश्यक होता है कि मामले में विधि का कोई व्यापक महत्व का प्रश्न है और उसका उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्णय किया जाना आवश्यक है। कथन 3 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 136 के तहत उच्चतम न्यायालय की 'विशेष अनुमति अपील' (SLP) की शक्ति अत्यंत व्यापक है, जिसके अंतर्गत भारत के राज्यक्षेत्र में किसी भी न्यायालय या न्यायाधिकरण (Tribunals) द्वारा दिए गए किसी भी निर्णय, डिक्री, निर्धारण, आदेश या सेंटेंस के विरुद्ध अपील की अनुमति देने के लिए न्यायालय विवेकाधीन शक्ति रखता है, यह केवल उच्च न्यायालयों तक सीमित नहीं है। भारतीय संविधान और उसकी न्यायिक प्रणाली के विस्तृत अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर जा सकते हैं।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय की शक्तियों, अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) तथा न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 131 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय के आरंभिक अधिकार क्षेत्र (Original Jurisdiction) में केंद्र और एक या अधिक राज्यों के बीच, या दो या अधिक राज्यों के बीच किसी भी कानूनी विवाद का निर्णय करना शामिल है, किंतु इस अधिकार क्षेत्र में किसी राज्य और भारत सरकार के बीच उत्पन्न वह विवाद शामिल नहीं किया जा सकता जो किसी अंतर-राज्यीय जल विवाद अधिनियम के तहत गठित न्यायाधिकरण (Tribunal) के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आता हो।
2. अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति को उच्चतम न्यायालय से परामर्श करने की शक्ति प्राप्त है, और यदि राष्ट्रपति विधि या तथ्य के किसी ऐसे प्रश्न पर जो सार्वजनिक महत्व का है, उच्चतम न्यायालय की राय मांगता है, तो उच्चतम न्यायालय के लिए राष्ट्रपति को अपनी राय देना संवैधानिक रूप से अनिवार्य (Mandatory) होता है।
3. संविधान के अनुच्छेद 137 के अनुसार उच्चतम न्यायालय को संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि या अनुच्छेद 145 के अधीन बनाए गए नियमों के अधीन रहते हुए, अपने द्वारा दिए गए किसी निर्णय या आदेश का पुनरावलोकन (Review) करने की शक्ति प्राप्त है, और इसके अतिरिक्त उच्चतम न्यायालय को एक 'अभिलेख न्यायालय' (Court of Record) होने के नाते अपनी अवमानना के लिए दंडित करने की अनन्य शक्ति भी प्राप्त है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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राज्य विधानमंडल के अंतर्गत विधानसभा और विधान परिषद के सदस्यों की अर्हताओं (Qualifications), निर्वाचन प्रक्रियाओं तथा विधान परिषद के गठन व विघटन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 173 के अनुसार राज्य की विधानसभा का सदस्य बनने के लिए न्यूनतम आयु 25 वर्ष और विधान परिषद का सदस्य बनने के लिए न्यूनतम आयु 30 वर्ष होनी चाहिए, तथा दोनों ही सदनों के लिए यह अनिवार्य है कि वह भारत का नागरिक हो और निर्वाचन आयोग द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी व्यक्ति के समक्ष शपथ या प्रतिज्ञान ले।
2. विधान परिषद एक स्थायी सदन है और इसका विघटन नहीं होता है, किंतु इसके एक-तिहाई सदस्य प्रत्येक दो वर्ष की समाप्ति पर सेवानिवृत्त होते हैं, और विधान परिषद के सदस्यों का निर्वाचन प्रत्यक्ष रूप से सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर किया जाता है जिसमें 18 वर्ष से अधिक आयु का प्रत्येक पंजीकृत नागरिक भाग लेता है।
3. राज्य विधानसभा के विघटन की स्थिति में विधान परिषद में लंबित कोई भी विधेयक समाप्त नहीं होता है, क्योंकि विधान परिषद एक निरंतर चलने वाला सदन है, किंतु यदि कोई विधेयक विधान परिषद में लंबित है और विधानसभा के विघटन के कारण वह समाप्त हो जाता है, तो विधान परिषद के पास उस लंबित विधेयक को आगे बढ़ाने की कोई स्वतंत्र शक्ति नहीं रहती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य विधानमंडल (विधानसभा और विधान परिषद) के गठन, संरचना और विधाई शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 169 के अनुसार संसद किसी राज्य में विधान परिषद के सृजन या उत्सादन के लिए विधि बना सकती है, बशर्ते संबंधित राज्य की विधानसभा इस आशय का एक प्रस्ताव कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से पारित कर दे।
2. राज्य की विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या उस राज्य की विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती है, और किसी भी स्थिति में विधान परिषद में सदस्यों की न्यूनतम संख्या 40 से कम नहीं होनी चाहिए, सिवाय इसके कि जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के पश्चात यह नियम अब सभी राज्यों पर समान रूप से लागू होता है।
3. धन विधेयक (Money Bill) को केवल राज्य की विधानसभा में ही पुनः स्थापित किया जा सकता है, विधान परिषद में नहीं; और यदि विधानसभा द्वारा कोई धन विधेयक पारित करके विधान परिषद में भेजा जाता है, तो विधान परिषद के पास उसे अस्वीकार करने की शक्ति होती है, बशर्ते वह इसे अधिकतम चौदह दिनों की अवधि तक ही रोक सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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संविधान का कौन सा भाग 'नागरिकता' (Citizenship) से संबंधित है?
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संविधान के अनुसार लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या कितनी निर्धारित है?
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