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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्यों के उच्च न्यायालयों और अधीनस्थ न्यायालयों की संरचना, अधिकारिता एवं नियंत्रण से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 233 के अनुसार किसी राज्य में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और पदोन्नति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा उस राज्य के उच्च न्यायालय से परामर्श करने के पश्चात की जाती है, तथा जिला न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए यह अनिवार्य है कि व्यक्ति कम से कम सात वर्ष तक अधिवक्ता या प्लीडर रहा हो और संघ या राज्य की सेवा में पहले से कार्यरत न हो।
- 2. संविधान के अनुच्छेद 235 के अंतर्गत राज्य के अधीनस्थ न्यायालयों पर प्रशासनिक नियंत्रण, जिसमें जिला न्यायालयों के नीचे के न्यायिक अधिकारियों की पोस्टिंग, पदोन्नति और छुट्टियों का अनुदान शामिल है, पूरी तरह से संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय में निहित होता है, किंतु इन न्यायालयों के अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने और उन्हें सेवा से बर्खास्त करने की अंतिम शक्ति राज्य के राज्यपाल के पास होती है।
- 3. अनुच्छेद 236 के निर्वचन के अनुसार 'जिला न्यायाधीश' (District Judge) की व्यापक परिभाषा में नगर सिविल न्यायालय का न्यायाधीश, अपर जिला न्यायाधीश, संयुक्त जिला न्यायाधीश, सहायक जिला न्यायाधीश, लघु वाद न्यायालय (Small Cause Court) का मुख्य न्यायाधीश तथा सेशन जज शामिल होते हैं, किंतु इसमें मुख्य प्रेसिडेंसी मजिस्ट्रेट को शामिल नहीं किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 233 के प्रावधानों के तहत किसी राज्य में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और पदोन्नति राज्यपाल द्वारा उस राज्य के उच्च न्यायालय से परामर्श करके की जाती है। इसके लिए व्यक्ति केंद्र या राज्य की सेवा में कार्यरत नहीं होना चाहिए और कम से कम सात वर्ष तक अधिवक्ता या प्लीडर होना चाहिए। कथन 2 गलत है: अनुच्छेद 235 के अनुसार अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण (जिसमें पोस्टिंग, पदोन्नति और छुट्टियों का अनुदान शामिल है) उच्च न्यायालय में निहित है, और इन न्यायिक अधिकारियों पर अनुशासनात्मक नियंत्रण भी उच्च न्यायालय का ही होता है, न कि राज्यपाल का। कथन 3 गलत है: अनुच्छेद 236 के तहत 'जिला न्यायाधीश' की परिभाषा में नगर सिविल न्यायालय का न्यायाधीश, अपर जिला न्यायाधीश, संयुक्त जिला न्यायाधीश, सहायक जिला न्यायाधीश, लघु वाद न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश, मुख्य प्रेसिडेंसी मजिस्ट्रेट और सेशन जज—सभी शामिल होते हैं। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति की निर्वाचन प्रक्रिया, प्रधानमंत्री की शक्तियों तथा मंत्रिपरिषद के उत्तरदायित्व के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार उपराष्ट्रपति के निर्वाचन के लिए गठित होने वाले निर्वाचकगण (Electoral College) में संसद के दोनों सदनों के केवल निर्वाचित सदस्य ही भाग लेते हैं, जबकि मनोनीत सदस्य इस प्रक्रिया से पूरी तरह बाहर रहते हैं, जो कि राष्ट्रपति के निर्वाचकगण से इसे भिन्न बनाता है।
2. अनुच्छेद 75(3) के प्रावधान के अनुसार मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, जिसका अर्थ यह है कि यदि लोकसभा में प्रधानमंत्री के विरुद्ध या किसी अन्य मंत्री के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो संपूर्ण मंत्रिपरिषद को सामूहिक रूप से त्यागपत्र देना पड़ता है।
3. अनुच्छेद 78 के अंतर्गत प्रधानमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह संघ के प्रशासन और विधान संबंधी प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राष्ट्रपति को संसूचित करे, और यदि राष्ट्रपति ऐसी कोई सूचना माँगता है, तो उसे उपलब्ध कराए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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अनुच्छेद 51A में कर्तव्य किस संशोधन से आए?
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भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) की संरचना, निर्वाचन और आरक्षण के प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 243C के अनुसार राज्य का विधानमंडल, विधि द्वारा, पंचायतों की संरचना के संबंध में उपबंध कर सकता है, किंतु इस बात का प्रावधान अनिवार्यतः किया गया है कि किसी भी राज्य के पंचायत के सभी स्तरों पर सदस्यों का निर्वाचन प्रत्यक्ष रूप से उस पंचायत क्षेत्र के क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों से सीधे लोगों द्वारा किया जाएगा, जबकि पंचायत के अध्यक्षों का निर्वाचन प्रत्येक स्तर पर अनिवार्य रूप से अप्रत्यक्ष पद्धति से ही होगा।
2. संविधान के अनुच्छेद 243D के अंतर्गत पंचायतों के सभी स्तरों पर महिलाओं के लिए कुल विहित स्थानों (Seats) की संख्या के कम से कम एक-तिहाई (यानि 33 प्रतिशत) स्थान अनिवार्य रूप से आरक्षित होंगे, तथा यह आरक्षण प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों ही रूपों में चुने जाने वाले अध्यक्षों के कार्यालयों पर भी लागू होता है।
3. 73वें संविधान संशोधन द्वारा पंचायतों की अवधि पांच वर्ष निर्धारित की गई है, और यदि किसी पंचायत का विघटन समय से पूर्व हो जाता है, तो विघटन की तिथि से छह महीने की अवधि के भीतर नए निर्वाचन कराए जाने अनिवार्य हैं, किंतु यदि बची हुई अवधि छह महीने से कम की है, तो नई पंचायत का गठन करना आवश्यक नहीं होगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के निर्माण और संविधान सभा (Constituent Assembly) की कार्यप्रणाली के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. केबिनेट मिशन योजना (1946) के प्रावधानों के तहत संविधान सभा के लिए जुलाई-अगस्त 1946 में हुए चुनावों में कांग्रेस को 208 सीटें और मुस्लिम लीग को 73 सीटें प्राप्त हुई थीं, तथा इस सभा में ब्रिटिश भारत के गवर्नरों के प्रांतों को 292 सीटें और मुख्य आयुक्तों के क्षेत्रों को 4 सीटें आवंटित की गई थीं।
2. संविधान सभा की प्रथम बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई थी, जिसमें कुल 211 सदस्यों ने भाग लिया था, और मुस्लिम लीग द्वारा पाकिस्तान की मांग को लेकर इस बैठक का पूर्ण बहिष्कार किया गया था, तथा डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को सभा का स्थायी अध्यक्ष चुना गया था।
3. उद्देश्य प्रस्ताव (Objectives Resolution), जिसे 13 दिसंबर 1946 को पं. जवाहरलाल नेहरू द्वारा प्रस्तुत किया गया था, में भारत को एक स्वतंत्र, संप्रभु गणराज्य घोषित करने तथा इसके नागरिकों के लिए सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय की गारंटी देने का संकल्प लिया गया था, जिसे संविधान सभा द्वारा 22 जनवरी 1947 को सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति की पदाच्युति, प्रधानमंत्री की नियुक्ति और मंत्रिपरिषद के सामूहिक उत्तरदायित्व के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 67(क) के परंतुक के अनुसार उपराष्ट्रपति को उसके पद से हटाने के लिए राज्यसभा के ऐसे प्रस्ताव द्वारा ही हटाया जा सकता है जिसे राज्यसभा के तत्कालीन सभी सदस्यों के बहुमत द्वारा पारित किया गया हो और जिससे लोकसभा सहमत हो, किंतु इस प्रस्ताव को प्रस्तुत करने के लिए चौदह दिन की पूर्व लिखित सूचना देना अनिवार्य है।
2. संविधान के अनुच्छेद 75(1) के तहत प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री की सलाह पर की जाती है, तथा यदि लोकसभा में प्रधानमंत्री बहुमत खो देता है, तो राष्ट्रपति किसी अन्य सांसद को मंत्रिपरिषद के गठन के लिए आमंत्रित कर सकता है, भले ही उस सांसद के पास सदन में स्पष्ट बहुमत का समर्थन न हो।
3. संविधान के अनुच्छेद 75(3) के अनुसार मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है, जिसका विधिक निहितार्थ यह है कि लोकसभा में यदि किसी एक मंत्री के विरुद्ध भी अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) पारित हो जाता है, तो संपूर्ण मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना अनिवार्य होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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