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Indian Polity
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भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों और आपातकालीन उपबंधों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 38वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1975 के द्वारा यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा को किसी भी न्यायालय में न्यायसमीक्षा (Judicial Review) के दायरे से पूरी तरह बाहर कर दिया गया था, जिसे बाद में 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा समाप्त कर दिया गया।
  2. 2. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा राष्ट्रपति को यह शक्ति दी गई कि वह राष्ट्रीय आपातकाल के संचालन के लिए देश के विभिन्न भागों में अलग-अलग प्रकार की आपातकाल की घोषणाएँ एक साथ कर सकता है (इसे 'विभाजित आपातकाल' या 'Staged/Sliced Emergency' कहा गया)।
  3. 3. राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 353 के अंतर्गत केंद्र सरकार को राज्यों को कार्यपालिका संबंधी निर्देश देने की शक्ति प्राप्त हो जाती है, किंतु इसके तहत राज्य सरकारों को बर्खास्त करने या राज्य विधानसभा को निलंबित करने का अधिकार केंद्र को स्वतः प्राप्त नहीं होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: 38वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1975 द्वारा यह प्रावधान किया गया था कि राष्ट्रपति द्वारा की गई राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा को किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती (अर्थात इसे न्यायिक समीक्षा से बाहर कर दिया गया था)। हालांकि, 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा इस प्रावधान को हटा दिया गया और यह स्पष्ट किया गया कि आपातकाल की घोषणा न्यायिक समीक्षा के दायरे में आएगी। कथन 2 गलत है: 42वें संविधान संशोधन द्वारा देश के किसी विशिष्ट भाग तक आपातकाल को सीमित करने (क्षेत्रीय आपातकाल) का प्रावधान जोड़ा गया था, न कि विभिन्न भागों में एक साथ अलग-अलग प्रकार के विभाजित आपातकाल की व्यवस्था का। कथन 3 सही है: राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) के दौरान अनुच्छेद 353 के अंतर्गत केंद्र की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार राज्यों को निर्देश देने तक हो जाता है, लेकिन इसके तहत राज्य विधानसभा या सरकार को स्वतः विघटित नहीं किया जाता; ऐसा राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356) के तहत ही संभव है। अधिक अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के विस्तृत नोट्स पढ़ सकते हैं।
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