त्वरित लिंक्स
Indian Polity
23 views
भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं के वित्तीय अधिकार, राज्य वित्त आयोग और लेखा परीक्षण (Audit) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 243-H के अनुसार, किसी राज्य का विधानमंडल विधि द्वारा किसी पंचायत को कर, शुल्क, टोल और फीस आदि आरोपित करने, संगृहीत करने तथा विनियमित करने के लिए अधिकृत कर सकता है, साथ ही राज्य की संचित निधि से पंचायतों को सहायता-अनुदान (Grants-in-aid) देने के प्रावधान भी कर सकता है।
- 2. अनुच्छेद 243-I के तहत प्रत्येक राज्य का राज्यपाल पंचायती राज संस्थाओं की वित्तीय स्थिति की समीक्षा के लिए हर पाँच वर्ष की समाप्ति पर एक 'राज्य वित्त आयोग' का गठन करेगा, और इस आयोग की संरचना तथा सदस्यों की योग्यता का निर्धारण संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा अपने स्वविवेक से किया जाता है, जिसमें राज्य विधानमंडल की कोई विधाई भूमिका नहीं होती है।
- 3. संविधान के अनुच्छेद 243-J के उपबंधों के अनुसार, राज्य का विधानमंडल विधि द्वारा पंचायतों केaccounts (लेखाओं) के रख-रखाव और उनकी लेखा परीक्षा (Audit) से संबंधित प्रावधान कर सकता है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि सार्वजनिक धन का उपयोग पारदर्शी तरीके से हो रहा है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 243-H के अंतर्गत राज्य के विधानमंडल को यह शक्ति दी गई है कि वह पंचायतों को कर, शुल्क, टोल और फीस लगाने तथा एकत्र करने का प्राधिकार दे सके और राज्य की संचित निधि से उन्हें अनुदान दे सके। कथन 2 गलत है: अनुच्छेद 243-I के तहत राज्य वित्त आयोग का गठन राज्यपाल द्वारा किया जाता है, किंतु आयोग की संरचना, सदस्यों की योग्यता और उनके चयन के तरीके का निर्धारण करने की शक्ति 'राज्य के विधानमंडल' को दी गई है, न कि राज्यपाल के स्वविवेक को। कथन 3 सही है: अनुच्छेद 243-J के अनुसार, राज्य का विधानमंडल विधि द्वारा पंचायतों के लेखाओं के रख-रखाव और उनके लेखा परीक्षण (Audit) का प्रावधान कर सकता है। पंचायती राज और स्थानीय शासन के विस्तृत अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर जा सकते हैं।
Related Questions
→
भारत के उपराष्ट्रपति पदेन (ex-officio) किस सदन के सभापति होते हैं?
→
वित्त आयोग का उल्लेख किस अनुच्छेद में है?
→
संविधान भाग 15 क्या है?
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की तदर्थ न्यायाधीशों (Ad-hoc Judges) की नियुक्ति और न्यायालय की गणपूर्ति (Quorum) से संबंधित प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 127 के अनुसार, यदि किसी समय उच्चतम न्यायालय के सत्र को आयोजित करने या चालू रखने के लिए न्यायाधीशों की कोरम (गणपूर्ति) पूरी नहीं होती है, तो भारत का मुख्य न्यायाधीश (CJI) राष्ट्रपति की पूर्व सहमति और संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करने के पश्चात, किसी उच्च न्यायालय के ऐसे न्यायाधीश को जो उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए अर्ह है, तदर्थ न्यायाधीश के रूप में कुछ समय के लिए नियुक्त कर सकता है।
2. तदर्थ न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने के लिए यह अनिवार्य है कि वह संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की लिखित अनुमति के बिना उच्चतम न्यायालय की बैठकों में भाग न ले, तथा राष्ट्रपति की स्वीकृति इस प्रक्रिया में केवल एक औपचारिक औपचारिकता मात्र होती है जिसके लिए मुख्य न्यायाधीश को किसी केंद्रीय मंत्रिपरिषद की सलाह की आवश्यकता नहीं होती है।
3. अनुच्छेद 128 के अंतर्गत भारत का मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से, उच्चतम न्यायालय या किसी उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से यह अनुरोध कर सकता है कि वह उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में बैठकों में उपस्थित रहे, और ऐसे सेवानिवृत्त न्यायाधीश को राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित ऐसे भत्ते प्राप्त करने का अधिकार होगा जो वह उचित समझें।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान सभा के गठन और उसकी निर्माण प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान सभा के सदस्यों का निर्वाचन प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष निर्वाचन पद्धति (आनुपातिक प्रतिनिधित्व और एकल संक्रमणीय मत) के माध्यम से किया गया था, जिसमें ब्रिटिश प्रांतों और रियासतों दोनों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में सीटें आवंटित की गई थीं।
2. संविधान सभा के लिए जुलाई-अगस्त 1946 में हुए चुनावों में कुल 296 सीटों के लिए ब्रिटिश भारत की प्रांतों से चुनाव संपन्न हुए थे, जिसमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को 208 सीटें और मुस्लिम लीग को 73 सीटें प्राप्त हुई थीं।
3. संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को आयोजित की गई थी, जिसमें मुस्लिम लीग ने भाग नहीं लिया था, और इस बैठक में डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को सभा का अस्थायी अध्यक्ष (Interim President) चुना गया था, जो फ्रांस की संसदीय परंपरा पर आधारित था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.