BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Indian Polity
21 views

भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की तदर्थ न्यायाधीशों (Ad-hoc Judges) की नियुक्ति और न्यायालय की गणपूर्ति (Quorum) से संबंधित प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 127 के अनुसार, यदि किसी समय उच्चतम न्यायालय के सत्र को आयोजित करने या चालू रखने के लिए न्यायाधीशों की कोरम (गणपूर्ति) पूरी नहीं होती है, तो भारत का मुख्य न्यायाधीश (CJI) राष्ट्रपति की पूर्व सहमति और संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करने के पश्चात, किसी उच्च न्यायालय के ऐसे न्यायाधीश को जो उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए अर्ह है, तदर्थ न्यायाधीश के रूप में कुछ समय के लिए नियुक्त कर सकता है।
  2. 2. तदर्थ न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने के लिए यह अनिवार्य है कि वह संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की लिखित अनुमति के बिना उच्चतम न्यायालय की बैठकों में भाग न ले, तथा राष्ट्रपति की स्वीकृति इस प्रक्रिया में केवल एक औपचारिक औपचारिकता मात्र होती है जिसके लिए मुख्य न्यायाधीश को किसी केंद्रीय मंत्रिपरिषद की सलाह की आवश्यकता नहीं होती है।
  3. 3. अनुच्छेद 128 के अंतर्गत भारत का मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से, उच्चतम न्यायालय या किसी उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से यह अनुरोध कर सकता है कि वह उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में बैठकों में उपस्थित रहे, और ऐसे सेवानिवृत्त न्यायाधीश को राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित ऐसे भत्ते प्राप्त करने का अधिकार होगा जो वह उचित समझें।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 127 के अनुसार, यदि उच्चतम न्यायालय के सत्र को आयोजित करने या चालू रखने के लिए न्यायाधीशों की गणपूर्ति (Quorum) पूरी नहीं होती है, तो भारत का मुख्य न्यायाधीश (CJI) राष्ट्रपति की पूर्व सहमति और संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद किसी उच्च न्यायालय के योग्य न्यायाधीश को तदर्थ न्यायाधीश के रूप में नियुक्त कर सकता है। कथन 2 गलत है क्योंकि राष्ट्रपति की पूर्व सहमति लेने से तात्पर्य मंत्रिपरिषद की सलाह से होता है, और इसके लिए उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की 'लिखित अनुमति' जैसा कोई विशेष प्रतिबंध संविधान में नहीं है, बल्कि संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से केवल 'परामर्श' करना आवश्यक होता है तथा राष्ट्रपति की अनुमति सांविधानिक परामर्श प्रक्रिया के अधीन होती है। कथन 3 सही है क्योंकि अनुच्छेद 128 के अंतर्गत भारत का मुख्य न्यायाधीश राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से उच्चतम न्यायालय या किसी उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश को भी कुछ समय के लिए उच्चतम न्यायालय की बैठकों में बैठने का अनुरोध कर सकता है, जिन्हें राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित भत्ते मिलते हैं। तदर्थ न्यायाधीशों की इस व्यवस्था से जुड़े और अधिक विस्तृत तथ्यों को पढ़ने के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर जा सकते हैं।
Share:

Related Questions

→ अनुच्छेद 32 को 'आत्मा' किसने कहा? → भारतीय संविधान की अनुसूचियों, राजभाषा तथा राजनीतिक दलों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें बाद में विभिन्न संवैधानिक संशोधनों (जैसे 21वें, 71वें और 92वें संशोधन) के माध्यम से जोड़कर वर्तमान में कुल 22 राजभाषाएँ कर दिया गया है, तथा अंग्रेजी इस अनुसूची में शामिल भाषाओं में से एक है। 2. संविधान के भाग XVII के अंतर्गत अनुच्छेद 343 से 351 तक संघ की राजभाषा का प्रावधान किया गया है, जिसके अनुसार संघ की राजभाषा देवनागरी लिपि में हिंदी होगी, किंतु संसद को यह अधिकार दिया गया है कि वह विधि द्वारा सरकारी कार्यों के लिए अंग्रेजी के निरंतर प्रयोग को प्राधिकृत कर सके। 3. वर्ष 1985 के 52वें संविधान संशोधन अधिनियम के माध्यम से संविधान में दसवीं अनुसूची जोड़ी गई, जिसे 'दल-बदल विरोधी कानून' कहा जाता है, तथा इस अनुसूची के प्रावधानों के अंतर्गत किसी राजनीतिक दल के विलय (Merger) के लिए यह आवश्यक है कि उस दल के कम से कम दो-तिहाई (2/3rd) सदस्य अन्य दल में विलय के पक्ष में हों। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) किस संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया? → भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा शहरी स्थानीय शासन (नगरपालिकाओं) को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया है। इस संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस संशोधन द्वारा संविधान में 'भाग IX-क' जोड़ा गया, जिसमें अनुच्छेद 243-P से 243-ZG तक के प्रावधान शामिल हैं, तथा इसके अंतर्गत बारहवीं अनुसूची जोड़ी गई जिसमें नगरपालिकाओं के क्षेत्राधिकार के लिए 18 कार्यात्मक विषयों को सूचीबद्ध किया गया है। 2. अनुच्छेद 243-Q के अनुसार प्रत्येक राज्य में संक्रमणकालीन क्षेत्र के लिए नगर पंचायत, लघुतर नगरीय क्षेत्र के लिए नगरपालिका परिषद और बृहत्तर नगरीय क्षेत्र के लिए नगर निगम का गठन किया जाना अनिवार्य है, किंतु राज्यपाल को यह शक्ति दी गई है कि वह किसी औद्योगिक प्रतिष्ठान द्वारा प्रदत्त या प्रदान की जाने वाली सेवाओं को ध्यान में रखते हुए उस नगरीय क्षेत्र को नगरपालिका क्षेत्र घोषित करने से छूट दे सकता है और वहाँ 'औद्योगिक नगरी' (Industrial Township) स्थापित कर सकता है। 3. अनुच्छेद 243-S के तहत प्रत्येक नगरपालिका क्षेत्र में वार्ड समितियों (Wards Committees) का गठन किया जाना आवश्यक है, और यह प्रावधान उन सभी राज्यों पर अनिवार्य रूप से लागू होता है जिनकी कुल जनसंख्या तीन लाख या उससे अधिक है, तथा इसमें राज्य के विधानमंडल की कोई विवेककारी शक्ति नहीं है। 4. अनुच्छेद 243-W के अनुसार राज्य का विधानमंडल, विधि द्वारा, नगरपालिकाओं को ऐसी शक्तियां और प्राधिकार प्रदान कर सकता है जो उन्हें स्वशासन की संस्थाओं के रूप में कार्य करने योग्य बनाने के लिए आवश्यक हों, तथा इसके अंतर्गत बारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध विषयों से संबंधित योजनाओं को तैयार करने और उनका क्रियान्वयन करने की जिम्मेदारी नगरपालिकाओं को सौंपी जा सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारत के उपराष्ट्रपति के निर्वाचन, उनकी पदाच्युति और प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद के संवैधानिक संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों (निर्वाचित एवं मनोनीत दोनों सदस्यों) के सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचक गण के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है, और इसमें राज्य विधानमंडलों के सदस्य भाग नहीं लेते हैं। 2. उपराष्ट्रपति को उसके पद से हटाने के लिए राज्य सभा द्वारा अपने कुल सदस्यों के बहुमत से पारित ऐसा संकल्प लोकसभा द्वारा अपनी सहमति दे दिए जाने पर ही प्रभावी होता है, किंतु इसके लिए लोक सभा की कुल सदस्य संख्या के विशेष बहुमत का होना संविधान द्वारा अनिवार्य किया गया है। 3. अनुच्छेद 75(3) के अनुसार मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, जिसका अर्थ यह है कि प्रधानमंत्री की मृत्यु या उसके त्यागपत्र देने से संपूर्ण मंत्रिपरिषद स्वतः विघटित हो जाती है, जबकि किसी कैबिनेट मंत्री की मृत्यु होने पर मंत्रिपरिषद का पुनर्गठन आवश्यक नहीं होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.