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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति की निर्वाचन पद्धति, प्रधानमंत्री के उत्तरदायित्व और केंद्रीय मंत्रिपरिषद की कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों (निर्वाचित एवं मनोनीत दोनों सदस्यों) के सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचक गण के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है, और राज्य विधानमंडलों के सदस्य इस निर्वाचन में किसी भी प्रकार से भाग नहीं लेते हैं।
  2. 2. अनुच्छेद 75 के उपबंधों के अनुसार, प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर करता है, तथा मंत्रिपरिषद में प्रधानमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या लोकसभा के सदस्यों की कुल संख्या के पंद्रह प्रतिशत से अधिक नहीं होगी, और यह नियम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार के मामले में भी समान रूप से लागू होता है।
  3. 3. अनुच्छेद 78 के अंतर्गत प्रधानमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह देश के प्रशासनिक मामलों और विधान के प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राष्ट्रपति को संसूचित करे, किंतु यदि राष्ट्रपति किसी विशिष्ट विषय पर प्रशासनिक जानकारी मांगता है, तो प्रधानमंत्री अपनी स्वविवेक शक्ति का प्रयोग करते हुए ऐसी सूचना देने से मना कर सकता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों (निर्वाचित और मनोनीत दोनों) के सदस्यों से बने निर्वाचक मंडल द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है। इसमें राज्य विधानमंडलों के सदस्य भाग नहीं लेते हैं (जबकि राष्ट्रपति के चुनाव में राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य भाग लेते हैं)। कथन 2 सही है: अनुच्छेद 75(1क) के अनुसार मंत्रिपरिषद में प्रधानमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या लोकसभा के सदस्यों की कुल संख्या के 15% से अधिक नहीं होगी। 69वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1991 द्वारा जोड़े गए अनुच्छेद 239AA(4ए) के तहत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के लिए भी मंत्रिपरिषद की कुल संख्या विधानसभा के सदस्यों की कुल संख्या के 10% से अधिक नहीं होने का प्रावधान किया गया है, और केंद्र के समान यहाँ भी 15% की सीमा लागू होती है। कथन 3 गलत है: अनुच्छेद 78 के तहत प्रधानमंत्री का यह बाध्यकारी संवैधानिक कर्तव्य है कि वह संघ के प्रशासन से संबंधित और विधान के प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राष्ट्रपति को संसूचित करे तथा राष्ट्रपति द्वारा माँगी गई कोई भी प्रशासनिक या विधाई जानकारी प्रदान करे। प्रधानमंत्री राष्ट्रपति को ऐसी जानकारी देने से मना नहीं कर सकता। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था को पढ़ें।
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भारत के पहले मुख्य चुनाव आयुक्त कौन थे? भारत के महान्यायवादी (Attorney General) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) के संवैधानिक पदों, अधिकारों और कृत्यों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है, तथा उसके लिए यह संवैधानिक रूप से अनिवार्य है कि वह अपने पद पर रहते हुए किसी भी आपराधिक मामले या निजी प्रैक्टिस में भारत सरकार के विरुद्ध विधिक सलाह न दे। 2. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) को भारत के संचित निधि से किए जाने वाले सभी व्ययों की लेखापरीक्षा करने की शक्ति प्राप्त है, किंतु उसे राज्यों की संचित निधियों से होने वाले व्ययों की लेखापरीक्षा करने का कोई संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है, क्योंकि राज्यों के लेखाओं का परीक्षण संबंधित राज्य के महालेखाकार द्वारा किया जाता है। 3. महान्यायवादी को संसद के दोनों सदनों या उनकी संयुक्त बैठकों में बोलने और भाग लेने का अधिकार प्राप्त है, किंतु उसे मतदान करने का कोई अधिकार नहीं है; जबकि CAG संसद की लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee) के एक 'मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक' (Friend, Philosopher and Guide) के रूप में कार्य करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारत के महान्यायवादी (Attorney General) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 76 के तहत नियुक्त भारत का महान्यायवादी देश का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है, जिसे अपने कर्तव्यों के पालन में भारत के राज्यक्षेत्र के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार प्राप्त है, तथा उसे संसद के दोनों सदनों या उनकी समितियों की बैठकों में बोलने और भाग लेने का अधिकार तो है, किंतु उसे संसद की किसी भी प्रक्रिया में मतदान (Voting) करने का कोई अधिकार नहीं है। 2. संविधान के अनुच्छेद 148 के अनुसार नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और उसे उसके पद से उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति से उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, तथा अपनी पदमुक्ति के पश्चात् वह भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी प्रकार का अन्य पद (Office of Profit) धारण करने का पात्र नहीं होता है। 3. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) संसद की लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee) के 'मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक' के रूप में कार्य करता है, और CAG द्वारा तैयार की गई केंद्र के लेखा-परीक्षा प्रतिवेदनों को सीधे प्रधानमंत्री को प्रस्तुत किया जाता है, जो उन्हें संसद के दोनों सदनों के पटल पर रखवाते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत प्रदत्त मूल अधिकारों (Fundamental Rights) और उनसे संबंधित न्यायिक सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 13 के अंतर्गत 'विधि' (Law) की व्यापक परिभाषा में संसद या राज्य विधानमंडल द्वारा बनाए गए अधिनियमों के अलावा अध्यादेश, आदेश, उप-विधि, नियम, विनियम और अधिसूचनाएं तो शामिल हैं, किंतु इसमें रूढ़ि या प्रथा (Custom or Usage) को शामिल नहीं किया गया है, भले ही उनका बल विधि जैसा क्यों न हो। 2. 'पृथक्करण का सिद्धांत' (Doctrine of Severability) यह सुनिश्चित करता है कि यदि मूल अधिकारों से असंगत कोई कानून (या उसका कोई भाग) इस प्रकार का है कि असंगत भाग को संगत भाग से अलग नहीं किया जा सकता, तो पूरा का पूरा अधिनियम ही शून्य हो जाएगा, न कि केवल असंगत भाग। 3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'केशवानंद भारती वाद (1973)' में यह स्पष्ट रूप से अभिनिर्धारित किया गया था कि संसद को अनुच्छेद 368 के तहत संविधान के किसी भी भाग में संशोधन करने की शक्ति प्राप्त है, किंतु वह इस शक्ति का प्रयोग करके मूल अधिकारों के आधारभूत ढांचे (Basic Structure) को समाप्त या क्षीण नहीं कर सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्यों के उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति, स्थानांतरण, उनकी स्वतंत्रता तथा अधीनस्थ न्यायपालिका के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 217 के अनुसार उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा भारत के मुख्य न्यायमूर्ति और संबंधित राज्य के राज्यपाल से परामर्श करने के पश्चात की जाती है, तथा मुख्य न्यायाधीश से भिन्न किसी अन्य न्यायाधीश की नियुक्ति के मामले में उस उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करना भी अनिवार्य होता है। 2. संविधान के अनुच्छेद 222 के अंतर्गत राष्ट्रपति, भारत के मुख्य न्यायमूर्ति से परामर्श करने के पश्चात, किसी उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश का एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय को स्थानांतरण कर सकता है, और इस प्रकार के स्थानांतरण के एवज में उस न्यायाधीश को कोई भी पूरक भत्ता (Compensatory Allowance) प्राप्त करने का अधिकार नहीं होता है। 3. अनुच्छेद 233क के प्रावधानों के तहत किसी राज्य में कुछ जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति या उससे संबंधित अन्य कार्य जो भूतकाल में विधिवत नहीं किए गए थे, उन्हें इस आधार पर अवैध घोषित नहीं किया जा सकता कि ऐसा परामर्श या प्रक्रिया में कोई संवैधानिक त्रुटि थी, बशर्ते वह संपुष्टि राज्य के विधानमंडल द्वारा कानून बनाकर कर दी गई हो। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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