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Indian Polity
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राज्य विधानमंडल के संदर्भ में, विधानसभा और विधान परिषद की संरचना, धन विधेयकों तथा साधारण विधेयकों की विधाई प्रक्रिया से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 171 के प्रावधानों के अनुसार, किसी राज्य की विधान परिषद (Legislative Council) की कुल सदस्य संख्या उस राज्य की विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती है, किंतु विधान परिषद में सदस्यों की न्यूनतम संख्या किसी भी परिस्थिति में चालीस से कम नहीं होनी चाहिए, हालांकि इसके अपवादस्वरूप संसद विधि द्वारा किसी राज्य विशेष के लिए न्यूनतम सीमा को संशोधित कर सकती है।
- 2. संविधान के अनुच्छेद 197 के अंतर्गत यदि राज्य की विधान परिषद किसी साधारण विधेयक को अस्वीकार कर देती है, या ऐसे संशोधन प्रस्तुत करती है जिससे विधानसभा असहमत है, या विधान परिषद द्वारा विधेयक को बिना किसी कार्रवाई के तीन महीने तक रोक लिया जाता है, तो ऐसी स्थिति में गतिरोध दूर करने के लिए संसद की तर्ज पर दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) बुलाए जाने का स्पष्ट संवैधानिक प्रावधान किया गया है।
- 3. धन विधेयक (Money Bill) के संबंध में, विधान परिषद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह धन विधेयक प्राप्ति की तिथि से अधिकतम चौदह दिनों की अवधि के भीतर अपनी सिफारिशों के साथ या बिना सिफारिशों के विधानसभा को वापस लौटाए, और यदि विधान परिषद इस अवधि के भीतर विधेयक को वापस नहीं करती है, तो वह दोनों सदनों द्वारा उसी रूप में पारित समझा जाता है जिस रूप में वह विधानसभा द्वारा पारित किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 171(1) के अनुसार विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या संबंधित विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के 1/3 से अधिक नहीं होगी और न्यूनतम संख्या 40 निर्धारित की गई है। कथन 2 गलत है: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 197 के तहत राज्य विधानमंडल में साधारण विधेयकों पर गतिरोध उत्पन्न होने पर दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) बुलाए जाने का कोई प्रावधान नहीं है; राज्य विधानसभा की स्थिति विधान परिषद की तुलना में अत्यंत शक्तिशाली है और विधानसभा द्वारा दोबारा पारित किए जाने पर विधेयक दोनों सदनों से पारित मान लिया जाता है। कथन 3 सही है: संविधान के अनुच्छेद 198 के अनुसार धन विधेयक केवल विधानसभा में प्रस्तुत किया जाता है और विधान परिषद इसे अधिकतम 14 दिनों तक ही रोक सकती है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पढ़ें।
Related Questions
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 40 के तहत राज्य को ग्राम पंचायतों के संगठन के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया गया है, जिसे बाद में 73वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा संवैधानिक दर्जा और अनिवार्य रूप प्रदान किया गया।
2. अनुच्छेद 44 के अंतर्गत 'समान नागरिक संहिता' (Uniform Civil Code) का प्रावधान किया गया है, जो पूरे देश में लागू है और इसे देश के किसी भी राज्य द्वारा अपनी नीति के तहत बदला या निरस्त नहीं किया जा सकता है।
3. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा नीति निर्देशक तत्वों में अनुच्छेद 39A (समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता) और अनुच्छेद 48A (पर्यावरण, वन और वन्यजीवों की रक्षा) को जोड़ा गया था।
4. नीति निर्देशक तत्वों को देश के शासन में मूलभूत माना गया है और अनुच्छेद 37 के अनुसार ये देश के कानून बनाने में लागू करने के लिए राज्य के कर्तव्य हैं, भले ही ये न्यायालय द्वारा सीधे प्रवर्तनीय (Justiciable) न हों।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) और उससे संबंधित विभिन्न आयामों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान की प्रस्तावना में 'गणराज्य' (Republic) शब्द का तात्पर्य यह है कि भारत का राज्याध्यक्ष (राष्ट्रपति) वंशानुगत नहीं होता है, बल्कि वह प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से एक निश्चित अवधि के लिए जनता द्वारा निर्वाचित होता है।
2. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'बेरूबारी यूनियन वाद (1960)' में यह स्पष्ट निर्णय दिया गया था कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है और इसमें संसद द्वारा अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संशोधन किया जा सकता है।
3. प्रस्तावना में अभी तक केवल एक बार वर्ष 1976 में 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष' और 'अखंडता' शब्दों को जोड़ा गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान में आपातकालीन उपबंधों (Emergency Provisions) और उनसे संबंधित संवैधानिक संशोधनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा राष्ट्रपति को यह शक्ति दी गई कि वह संपूर्ण देश या उसके किसी भाग में 'राष्ट्रीय आपातकाल' की उद्घोषणा कर सकता है, तथा इसी संशोधन के माध्यम से यह भी प्रावधान किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल की न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) किसी भी न्यायालय में नहीं की जा सकती।
2. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा यह अनिवार्य किया गया कि राष्ट्रपति राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा तभी कर सकता है जब मंत्रिमंडल (Cabinet) द्वारा इसका लिखित निर्णय प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में राष्ट्रपति को संसूचित किया गया हो।
3. अनुच्छेद 356 के अंतर्गत 'राष्ट्रपति शासन' की घोषणा को 44वें संविधान संशोधन द्वारा यह प्रावधानित किया गया कि इसे एक वर्ष से अधिक समय तक तभी जारी रखा जा सकता है जब देश में राष्ट्रीय आपातकाल लागू हो या चुनाव आयोग यह प्रमाणित करे कि राज्य में विधानसभा के चुनाव कराना तुरंत संभव नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSC) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 316 के अनुसार संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, तथा यदि अध्यक्ष का पद रिक्त हो जाता है या वह अनुपस्थिति के कारण अपने कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ है, तो राष्ट्रपति आयोग के अन्य सदस्यों में से किसी एक को कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में नियुक्त कर सकता है, भले ही वह सदस्य यूपीएससी का सदस्य न हो।
2. राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य को केवल राष्ट्रपति के आदेश द्वारा ही उसके पद से हटाया जा सकता है, भले ही उनकी नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है, और हटाने के आधार वही होते हैं जो संघ लोक सेवा आयोग के सदस्यों के लिए संविधान के अनुच्छेद 317 में निर्धारित किए गए हैं।
3. संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य अपना कार्यकाल समाप्त होने के बाद भारत सरकार या किसी राज्य की सरकार के अधीन किसी अन्य रोजगार के पात्र नहीं होते हैं, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष अपने कार्यकाल की समाप्ति के पश्चात संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य के रूप में अथवा किसी अन्य राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति का पात्र होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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चार्टर अधिनियम, 1793 (Charter Act of 1793) और चार्टर अधिनियम, 1813 (Charter Act of 1813) के ऐतिहासिक प्रावधानों और उनके प्रशासनिक प्रभावों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चार्टर अधिनियम, 1793 द्वारा गवर्नर-जनरल को अपनी परिषद के निर्णयों को ओवरराइड करने (पलटने) की शक्ति प्रदान की गई, और इस शक्ति का विस्तार भविष्य के सभी गवर्नर-जनरल और गवर्नरों को भी कर दिया गया, तथा कंपनी के नियंत्रण बोर्ड के सदस्यों और कर्मचारियों का वेतन भारतीय राजस्व से दिए जाने की व्यवस्था की गई।
2. चार्टर अधिनियम, 1813 के द्वारा भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापारिक एकाधिकार को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया, जिसके तहत चीन के साथ व्यापार और चाय के व्यापार पर भी कंपनी का एकाधिकार तुरंत प्रभाव से समाप्त हो गया।
3. चार्टर अधिनियम, 1813 के माध्यम से ही पहली बार भारत में स्थानीय सरकारों को व्यक्तियों पर कर (Taxes on persons) लगाने की अनुमति दी गई, और कर न चुकाने वालों के लिए दंडात्मक प्रावधान करने की वैधानिक शक्ति भी प्रदान की गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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