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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत केंद्र-राज्य विधाई संबंधों और अंतर-राज्यीय परिषद् के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 249 के अंतर्गत यदि राज्यसभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से कोई संकल्प पारित करती है कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक या expedient है कि संसद राज्य सूची में शामिल किसी भी विषय पर कानून बनाए, तो संसद को पूरे देश या उसके किसी भाग के लिए उस विषय पर विधि बनाने की शक्ति मिल जाती है, और ऐसा संकल्प अधिकतम दो वर्ष की अवधि के लिए प्रवृत्त रहता है।
- 2. अंतर-राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) की स्थापना का प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 263 के अंतर्गत किया गया है, और यह एक स्थायी संवैधानिक निकाय नहीं है, बल्कि राष्ट्रपति जब भी लोक हित में आवश्यक समझे, आदेश द्वारा इसका गठन कर सकता है, तथा इस परिषद् द्वारा लिए गए निर्णय और संस्तुतियाँ सभी राज्य सरकारों पर वैधानिक रूप से बाध्यकारी होती हैं।
- 3. संविधान के अनुच्छेद 252 के अनुसार यदि दो या अधिक राज्यों के विधानमंडल इस आशय के संकल्प पारित करते हैं कि राज्य सूची के किसी विषय पर संसद को विधि बनानी चाहिए, तो संसद उस विषय पर उन राज्यों के लिए कानून बना सकती है, किंतु इस प्रकार निर्मित कानून में संशोधन या उसका निरसन (Repeal) केवल संबंधित राज्यों के विधानमंडलों द्वारा ही किया जा सकता है, संसद को उसे बदलने की शक्ति नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
इस प्रश्न के तीनों कथन गलत हैं। आइए इसका विस्तृत विश्लेषण देखें: कथन 1 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 249 के तहत राज्यसभा के संकल्प द्वारा संसद को राज्य सूची के विषय पर कानून बनाने की जो शक्ति मिलती है, वह संकल्प अधिकतम **एक वर्ष** (ना कि दो वर्ष) की अवधि के लिए प्रवृत्त रहता है, हालांकि इसे हर बार एक वर्ष के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है। कथन 2 गलत है क्योंकि यद्यपि अनुच्छेद 263 के अंतर्गत राष्ट्रपति अंतर-राज्यीय परिषद् का गठन करता है, इसके द्वारा दी गई संस्तुतियाँ और निर्णय **सलाहकारी (advisory)** प्रकृति के होते हैं, राज्य सरकारों पर कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होते हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 252 के अंतर्गत यदि संसद दो या अधिक राज्यों की सहमति से राज्य सूची के विषय पर कानून बनाती है, तो उस कानून में संशोधन या उसका निरसन केवल **संसद** द्वारा ही किया जा सकता है, संबंधित राज्यों के विधानमंडलों द्वारा नहीं। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के विस्तृत अध्यायों का अध्ययन करें।
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संविधान में कितनी अनुसूचियाँ हैं?
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 316 के अनुसार संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या अन्य किसी सदस्य को राष्ट्रपति द्वारा उसके पद से केवल साबित कदाचार या असमर्थता के आधार पर सर्वोच्च न्यायालय की संस्तुति के पश्चात ही हटाया जा सकता है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य को हटाने की शक्ति भी केवल राष्ट्रपति के पास ही होती है, राज्यपाल के पास नहीं।
2. संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष का कार्यकाल 6 वर्ष की अवधि या 65 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) तक होता है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष का कार्यकाल 6 वर्ष की अवधि या 62 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) तक निर्धारित किया गया है।
3. राज्य लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष अपने कार्यकाल की समाप्ति के पश्चात संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य के रूप में अथवा किसी अन्य राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त होने के लिए पात्र होता है, किंतु वह भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य रोजगार का पात्र नहीं होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत 'मूल कर्तव्यों' (Fundamental Duties) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल कर्तव्यों को मूल संविधान में शामिल नहीं किया गया था, बल्कि इन्हें स्वर्ण सिंह समिति की संस्तुति पर वर्ष 1976 के 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा संविधान के भाग IV-A के अनुच्छेद 51A के तहत जोड़ा गया, जिसके अंतर्गत वर्तमान में कुल ग्यारह मूल कर्तव्य संनिहित हैं।
2. ये मूल कर्तव्य केवल भारतीय नागरिकों पर ही लागू होते हैं, विदेशी नागरिकों पर नहीं, और प्रकृति से ये न्यायोचित (Justiciable) हैं, अर्थात यदि कोई नागरिक इनका उल्लंघन करता है, तो संसद या राज्य विधानमंडल इन्हें लागू करने के लिए सीधे न्यायालय के माध्यम से कानूनी दंड का प्रावधान कर सकती है।
3. वर्ष 2002 में पारित 86वें संविधान संशोधन अधिनियम के माध्यम से ग्यारहवें मूल कर्तव्य को जोड़ा गया, जिसके तहत छह से चौदह वर्ष की आयु के बीच के अपने बच्चे या प्रपाल्य (Ward) को शिक्षा के अवसर प्रदान करने का कर्तव्य उस माता-पिता या संरक्षक का होगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के ऐतिहासिक विकास के अंतर्गत लाए गए 'रेगुलेटिंग एक्ट, 1773' और 'पिट्स इंडिया एक्ट, 1784' के प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 के माध्यम से बंगाल के गवर्नर को 'बंगाल का गवर्नर-जनरल' पदनाम दिया गया, और उसकी सहायता के लिए एक चार सदस्यीय कार्यकारी परिषद का गठन किया गया, तथा इसी अधिनियम के तहत वर्ष 1774 में कलकत्ता में एक उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की स्थापना की गई जिसके प्रथम मुख्य न्यायाधीश सर एलिजा इम्पे थे।
2. पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 द्वारा कंपनी के राजनीतिक और वाणिज्यिक कार्यों को पृथक कर दिया गया, जिसके तहत व्यापारिक मामलों के प्रबंधन के लिए 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' (Board of Control) और राजनीतिक मामलों के प्रबंधन के लिए 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' (Court of Directors) की स्थापना की गई।
3. रेगुलेटिंग एक्ट के तहत कलकत्ता के उच्चतम न्यायालय को बंगाल, बिहार और उड़ीसा के सभी ब्रिटिश विषयों और भारतीय नागरिकों के मामलों में मूल और अपीलीय अधिकारिता प्रदान की गई थी, और इसके निर्णयों के विरुद्ध सीधे ब्रिटेन की प्रिवी काउंसिल (Privy Council) में अपील की जा सकती थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संसद के गठन, लोकसभा और राज्यसभा की संरचना तथा विधाई प्रक्रिया के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 79 के अनुसार भारत की संसद के तीन अंग हैं—राष्ट्रपति, लोकसभा और राज्यसभा, और यद्यपि राष्ट्रपति संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं होता है और न ही वह संसद के सत्र में बैठता है, तथापि संसद द्वारा पारित कोई भी विधेयक तब तक कानून नहीं बन सकता जब तक राष्ट्रपति उसे अपनी अनुमति (Assent) प्रदान न कर दे।
2. संविधान के अनुच्छेद 83(2) के प्रावधानों के तहत लोकसभा का कार्यकाल उसकी प्रथम बैठक के लिए नियत तारीख से पाँच वर्ष होता है, और इसे समय से पहले विघटित करने की शक्ति प्रधानमंत्री के पास होती है, तथा आपातकाल (National Emergency) की उद्घोषणा के प्रवर्तन में रहने के दौरान संसद विधि द्वारा लोकसभा के कार्यकाल को एक बार में एक वर्ष के लिए किसी भी सीमा तक बढ़ा सकती है।
3. अनुच्छेद 100 के अंतर्गत संसद के दोनों सदनों की बैठकों के लिए कोरम (गणपूर्ति) कुल सदस्य संख्या का दसवाँ हिस्सा निर्धारित किया गया है, और यदि सदन की बैठक के दौरान कोरम पूरा नहीं होता है, तो पीठासीन अधिकारी का यह वैधानिक दायित्व है कि वह सदन को स्थगित कर दे या बैठक को तब तक के लिए निलंबित कर दे जब तक कोरम पूरा न हो जाए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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