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Indian Polity
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भारत के राष्ट्रपति की शक्तियों और उसके संवैधानिक विशेषाधिकारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 72 के अंतर्गत राष्ट्रपति को किसी भी ऐसे मामले में जिसमें दंड ऐसे विषय संबंधी विधि के विरुद्ध दिया गया है जिस पर संघ की कार्यकारी शक्ति का विस्तार होता है, क्षमादान, प्रविलंबन, विराम या परिहार करने की शक्ति प्राप्त है, और इस न्यायिक शक्ति के प्रयोग के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में केवल तभी अपील की जा सकती है जब राष्ट्रपति का आदेश मालाफाइड (Malafide) या दुर्भावनापूर्ण साबित हो जाए।
  2. 2. अनुच्छेद 123 के अनुसार राष्ट्रपति को अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति संसद के अवकाश काल में प्राप्त है, किंतु राष्ट्रपति इस विधाई शक्ति का प्रयोग किसी भी स्थिति में तब तक नहीं कर सकता जब तक कि उसे ऐसा अध्यादेश जारी करने के लिए केंद्रीय मंत्रिपरिषद द्वारा लिखित रूप में संस्तुति न दी गई हो, क्योंकि 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 के पश्चात राष्ट्रपति के लिए मंत्रिपरिषद की लिखित सलाह बाध्यकारी कर दी गई है।
  3. 3. सर्वोच्च न्यायालय के 'शमशेर सिंह बनाम पंजाब राज्य (1974)' वाद के ऐतिहासिक निर्णय के अनुसार राष्ट्रपति अपनी कार्यपालिका शक्तियों का प्रयोग सामान्यतः मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार ही करता है, किंतु कुछ विशिष्ट परिस्थितियों जैसे कि लोकसभा में किसी दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने पर प्रधानमंत्री की नियुक्ति के समय राष्ट्रपति अपने 'विवेकशील अधिकारों' (Discretionary Powers) का स्वतंत्र रूप से प्रयोग कर सकता है, भले ही इसके लिए कोई लिखित संवैधानिक उपबंध स्पष्ट रूप से उल्लिखित न हो।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति (अनुच्छेद 72) की न्यायिक समीक्षा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की जा सकती है यदि उसका प्रयोग विवेकहीन, arbitrary, भेदभावपूर्ण या राजनीतिक दुर्भावना (mala fide) से ग्रसित पाया जाए, लेकिन यह कहना कि अपील केवल 'मालाफाइड' साबित होने पर ही हो सकती है, सीमित और त्रुटिपूर्ण है; साथ ही दया याचिका पर अत्यधिक विलंब भी न्यायिक समीक्षा का आधार बनता है। कथन 2 बिल्कुल सही है; 44वें संविधान संशोधन 1978 के बाद राष्ट्रपति के लिए मंत्रिपरिषद की लिखित सलाह पर कार्य करना अनिवार्य बना दिया गया है। कथन 3 भी सही है; 'शमशेर सिंह बनाम पंजाब राज्य (1974)' के निर्णय के अनुसार राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह से कार्य करता है, परंतु कुछ अंतर्निहित (Implied) और परिस्थितिजन्य विवेकीय शक्तियाँ जैसे त्रिशंकु लोकसभा की स्थिति में प्रधानमंत्री का चयन राष्ट्रपति के पास होती हैं। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
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