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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग III (मूल अधिकार) के अंतर्गत प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों और उससे संबंधित संवैधानिक व्यवस्थाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 25 के अंतर्गत प्रत्येक व्यक्ति को अंतःकरण की स्वतंत्रता और धर्म को अबाध रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने का अधिकार प्राप्त है, किंतु यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था, सदाचार और स्वास्थ्य के अधीन है तथा राज्य को सामाजिक कल्याण और सुधार के लिए हिंदुओं के सभी वर्गों के धार्मिक संस्थानों को हिंदुओं के लिए खोलने हेतु विधि निर्माण करने की शक्ति प्रदान करता है।
- 2. अनुच्छेद 26 के अनुसार प्रत्येक धार्मिक संप्रदाय या उसके किसी अनुभाग को धार्मिक और पूर्त प्रयोजनों के लिए संस्थाओं की स्थापना और पोषण करने, अपने धर्म के विषयों में कार्यों का प्रबंधन करने, तथा ऐसे संस्थानों की संपत्ति के अर्जन, स्वामित्व और प्रशासन का पूर्ण संवैधानिक अधिकार प्राप्त है, जिसे राज्य किसी भी परिस्थिति में अपने नियंत्रण में नहीं ले सकता है।
- 3. अनुच्छेद 27 के तहत किसी भी व्यक्ति को ऐसे करों का भुगतान करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है, जिनकी आय किसी विशिष्ट धर्म की अभिवृद्धि या संरक्षण के लिए विशेष रूप से व्यय की जाती है, जिसका तात्पर्य यह है कि राज्य कर के रूप में एकत्र किए गए धन का उपयोग किसी एक धर्म के विशेष प्रचार के लिए कर सकता है बशर्ते वह संचित निधि से बाहर हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 25(2)(b) के अनुसार राज्य को सामाजिक कल्याण और सुधार के लिए या सार्वजनिक प्रकार के हिंदुओं के धार्मिक संस्थानों को हिंदुओं के सभी वर्गों और खंडों के लिए खोलने के वास्ते विधि बनाने का अधिकार है। कथन 2 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 26 के अंतर्गत धार्मिक संप्रदायों को अपनी संपत्ति के प्रशासन का अधिकार तो है, किंतु इस संपत्ति का प्रशासन विधि के अनुसार किया जाएगा और राज्य इस पर विधيय नियंत्रण रख सकता है, संपत्ति का अर्जन या स्वामित्व पूर्णतः अमर्यादित नहीं है। कथन 3 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 27 स्पष्ट रूप से यह प्रतिबंधित करता है कि राज्य किसी भी व्यक्ति को ऐसे कर देने के लिए बाध्य नहीं कर सकता जिसकी आय किसी विशिष्ट धर्म की अभिवृद्धि के लिए व्यय की जाए; राज्य करों के धन का उपयोग किसी एक धर्म के विशेष प्रचार के लिए बिल्कुल नहीं कर सकता है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पढ़ें।
Related Questions
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भारतीय संविधान के भाग IVA के अंतर्गत वर्णित मूल कर्तव्यों (Fundamental Duties) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल कर्तव्यों को स्वर्ण सिंह समिति (Swaran Singh Committee) की संस्तुति के आधार पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में जोड़ा गया था, और मूलतः संविधान में 10 मूल कर्तव्य शामिल किए गए थे, जबकि 11वां मूल कर्तव्य 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा जोड़ा गया।
2. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51A के अंतर्गत ये मूल कर्तव्य केवल भारत के नागरिकों पर ही लागू होते हैं, विदेशी नागरिकों पर नहीं; और प्रकृति से ये सभी कर्तव्य न्यायोचित (Justiciable) हैं, जिसका अर्थ है कि इनके उल्लंघन पर संसद द्वारा बनाए गए किसी कानून के तहत सीधे उच्चतम न्यायालय में कानूनी कार्यवाही की जा सकती है।
3. मूल कर्तव्यों की सूची में यह भी शामिल है कि भारत के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि वह प्राकृतिक पर्यावरण की, जिसके अंतर्गत वन, झील, नदी और वन्य जीव हैं, रक्षा करें और उसका संवर्धन करें तथा प्राणी मात्र के प्रति दया भाव रखें।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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राष्ट्रपति चुनाव में कौन भाग नहीं लेता?
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भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 और शहरी स्थानीय शासन (नगरपालिकाओं) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 74वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा संविधान में जोड़े गए भाग IX-A के अंतर्गत अनुच्छेद 243-W में यह प्रावधान किया गया है कि राज्य का विधान-मंडल, विधि द्वारा, नगरपालिकाओं को ऐसी शक्तियां और प्राधिकार प्रदान कर सकता है जिससे वे बारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 18 कार्य-विषयों के संबंध में आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाओं को तैयार करने तथा उन्हें कार्यान्वित करने का उत्तरदायित्व निभा सकें।
2. महानगर योजना समिति (Metropolitan Planning Committee - MPC) के गठन का प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 243-ZE के तहत किया गया है, जिसके अंतर्गत महानगर क्षेत्र के लिए विकास योजना तैयार करने वाली इस समिति के कुल सदस्यों में से कम से कम दो-तिहाई सदस्य उस महानगर क्षेत्र में स्थित नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों और जिला पंचायतों के अध्यक्षों द्वारा अपने में से ही चुने जाने अनिवार्य हैं।
3. इस संशोधन के अनुसार प्रत्येक नगरपालिका के लिए निर्वाचन वित्तीय मामलों और खातों के संवीक्षा (Audit) के लिए राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों पर निर्भर करता है, जिसे मूल रूप से केवल 73वें संविधान संशोधन (पंचायतों) के लिए ही उपबंधित किया गया था और 74वें संशोधन में इसे नगरपालिकाओं पर स्वतः लागू नहीं किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा प्रस्तुत और संविधान सभा द्वारा 22 जनवरी 1947 को स्वीकृत 'उद्देश्य प्रस्ताव' (Objectives Resolution) ही परिवर्धित रूप से भारतीय संविधान की प्रस्तावना बना, जिसमें प्रस्तावना को संविधान के एक विशिष्ट भाग के रूप में स्वीकार करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने 'बेरूबारी यूनियन वाद' (1960) में यह प्रतिपादित किया कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है।
2. प्रस्तावना में उल्लिखित 'न्याय' (सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक) के आदर्श को रूस की क्रांति (1917) से प्रेरित होकर लिया गया है, जबकि 'स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व' (Liberty, Equality and Fraternity) के आदर्शों को फ्रांस की क्रांति (1789) के प्रेरणास्त्रोत से अपनाया गया है।
3. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा प्रस्तावना में अब तक केवल एक बार संशोधन किया गया है, जिसके माध्यम से इसमें 'समाजवादी' (Socialist), 'पंथनिरपेक्ष' (Secular) और 'अखंडता' (Integrity) शब्दों को जोड़ा गया, और इन संशोधनों की वैधानिकता को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'केशवानंद भारती वाद' (1973) के उस सिद्धांत के आलोक में वैध ठहराया गया जिसके तहत प्रस्तावना को संविधान का मूल ढांचा (Basic Structure) माना गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारत का संविधान कैसा है?
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