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Indian Polity
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा प्रस्तुत और संविधान सभा द्वारा 22 जनवरी 1947 को स्वीकृत 'उद्देश्य प्रस्ताव' (Objectives Resolution) ही परिवर्धित रूप से भारतीय संविधान की प्रस्तावना बना, जिसमें प्रस्तावना को संविधान के एक विशिष्ट भाग के रूप में स्वीकार करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने 'बेरूबारी यूनियन वाद' (1960) में यह प्रतिपादित किया कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है।
  2. 2. प्रस्तावना में उल्लिखित 'न्याय' (सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक) के आदर्श को रूस की क्रांति (1917) से प्रेरित होकर लिया गया है, जबकि 'स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व' (Liberty, Equality and Fraternity) के आदर्शों को फ्रांस की क्रांति (1789) के प्रेरणास्त्रोत से अपनाया गया है।
  3. 3. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा प्रस्तावना में अब तक केवल एक बार संशोधन किया गया है, जिसके माध्यम से इसमें 'समाजवादी' (Socialist), 'पंथनिरपेक्ष' (Secular) और 'अखंडता' (Integrity) शब्दों को जोड़ा गया, और इन संशोधनों की वैधानिकता को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'केशवानंद भारती वाद' (1973) के उस सिद्धांत के आलोक में वैध ठहराया गया जिसके तहत प्रस्तावना को संविधान का मूल ढांचा (Basic Structure) माना गया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय ने 'बेरूबारी यूनियन वाद' (1960) में यह निर्णय दिया था कि प्रस्तावना संविधान का अंग **नहीं** है, जबकि बाद में 'केशवानंद भारती वाद' (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने अपने पूर्ववर्ती निर्णय को बदलते हुए यह स्पष्ट किया कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है। कथन 2 बिल्कुल सही है; भारतीय संविधान की प्रस्तावना में न्याय (सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक) के आदर्श को 1917 की रूसी क्रांति से तथा स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्शों को 1789 की फ्रांसीसी क्रांति से लिया गया है। कथन 3 आंशिक रूप से गलत है क्योंकि 42वें संविधान संशोधन, 1976 द्वारा 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष' और 'अखंडता' शब्द जोड़े गए थे और केशवानंद भारती वाद में यह कहा गया कि प्रस्तावना संविधान का भाग है तथा इसमें अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन किया जा सकता है, बशर्ते इसका 'मूल ढांचा' (Basic Structure) प्रभावित न हो, किंतु बेरूबारी और केशवानंद भारती के ऐतिहासिक संदर्भों से संबंधित तथ्यात्मक तालमेल कथन 1 में त्रुटिपूर्ण है। अधिक गहन अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर जा सकते हैं।
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