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Indian Polity
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भारतीय संविधान की अनुसूचियों, राजभाषा और राजनैतिक दलों से संबंधित दलबदल विरोधी व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान की दसवीं अनुसूची, जिसे 52वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 द्वारा जोड़ा गया था, के अंतर्गत दलबदल के आधार पर किसी सांसद या विधायक की अयोग्यता से संबंधित प्रश्नों पर अंतिम निर्णय लेने की शक्ति संबंधित सदन के पीठासीन अधिकारी के पास होती है, तथा 'कीशोटो होहो बनाम जाचिला वाद' (1992) में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि पीठासीन अधिकारी का यह निर्णय न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे से पूरी तरह बाहर होता है।
  2. 2. संविधान के भाग XVII के अंतर्गत अनुच्छेद 343 से 351 तक संघ की राजभाषा का उपबंध किया गया है, और अनुच्छेद 351 के अनुसार संघ का यह कर्तव्य है कि वह हिंदी भाषा का प्रसार बढ़ाए, उसका विकास करे ताकि वह भारत की सामासिक संस्कृति के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके।
  3. 3. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें बाद में संशोधनों द्वारा बढ़ाकर 22 कर दिया गया है, और इस अनुसूची में 'अंग्रेज़ी' तथा 'राजस्थानी' दोनों ही भाषाएँ वर्तमान में आधिकारिक रूप से शामिल हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि वर्ष 1992 के प्रसिद्ध 'कीशोटो होहो बनाम जाचिला वाद' में उच्चतम न्यायालय ने यह निर्णय दिया था कि पीठासीन अधिकारी (Speaker/Chairman) द्वारा दलबदल के मामले में लिया गया निर्णय न्यायिक समीक्षा के अधीन है, यानी इस पर न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है। कथन 2 सत्य है; संविधान के भाग XVII के अनुच्छेद 351 में हिंदी भाषा के विकास और प्रसार के लिए संघ के कर्तव्यों का स्पष्ट उल्लेख किया गया है। कथन 3 असत्य है क्योंकि संविधान की आठवीं अनुसूची में वर्तमान में 22 भाषाएँ तो शामिल हैं, किंतु इसमें 'अंग्रेज़ी' और 'राजस्थानी' भाषाओं को शामिल नहीं किया गया है। भारतीय संविधान और राजव्यवस्था के विस्तृत अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर विजिट कर सकते हैं।
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