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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्यों के उच्च न्यायालयों की प्रशासनिक नियंत्रण शक्ति और अधीनस्थ न्यायालयों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 235 के तहत राज्य के अधीनस्थ न्यायालयों (जिनमें जिला न्यायालय और उनके नीचे के अन्य न्यायिक पद शामिल हैं) पर नियंत्रण, जिसमें उनकी पोस्टिंग, प्रमोशन और छुट्टी देना शामिल है, पूर्ण रूप से संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा उच्च न्यायालय के परामर्श से किया जाता है, और इस प्रक्रिया में उच्च न्यायालय की सिफारिशें राज्यपाल पर सर्वथा बाध्यकारी होती हैं।
  2. 2. संविधान के अनुच्छेद 227 के अनुसार प्रत्येक उच्च न्यायालय को अपने अधिकार क्षेत्र के भीतर आने वाले सभी न्यायालयों और न्यायाधिकरणों (Tribunals) पर अधीक्षण (Superintendence) की शक्ति प्राप्त है, और उच्च न्यायालय इस शक्ति का प्रयोग करते हुए प्रशासनिक निर्देश जारी कर सकता है तथा अधीनस्थ न्यायालयों से रिटर्न या रिपोर्ट भी मांग सकता है, भले ही वह मामला उच्च न्यायालय के अपीलीय क्षेत्राधिकार में सीधा न आता हो।
  3. 3. अनुच्छेद 233क (Article 233A) के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया है कि जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति या उनके द्वारा किए गए न्यायिक और प्रशासनिक निर्णय केवल इस तकनीकी आधार पर अवैध घोषित नहीं किए जाएंगे कि उनकी नियुक्ति में उच्च न्यायालय या संबंधित राज्य लोक सेवा आयोग के परामर्श की प्रक्रिया में कोई असांविधानिक त्रुटि या औपचारिकता रह गई थी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 235 के तहत राज्य के अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण (Control over district courts and subordinate courts) उच्च न्यायालय में निहित होता है, न कि राज्यपाल में। राज्यपाल केवल नियुक्ति, पदोन्नति और पोस्टिंग (अनुच्छेद 233 और 234 के तहत) करते हैं, वह भी उच्च न्यायालय से परामर्श के पश्चात; किंतु 'नियंत्रण' (Control) यानी पोस्टिंग, प्रमोशन, अनुशासनिक कार्रवाई आदि की शक्ति उच्च न्यायालय की होती है। कथन 2 बिल्कुल सही है; अनुच्छेद 227 प्रत्येक उच्च न्यायालय को अपने प्रादेशिक क्षेत्राधिकार के सभी न्यायालयों व न्यायाधिकरणों पर अधीक्षण की व्यापक शक्ति प्रदान करता है। कथन 3 सही है; संविधान के अनुच्छेद 233क के अनुसार जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति आदि को कुछ विशिष्ट संवैधानिक सुरक्षा प्रदान की गई है ताकि प्रक्रियात्मक त्रुटियों के आधार पर पिछले निर्णय अवैध न घोषित हों। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पढ़ें।
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