त्वरित लिंक्स
Indian Polity
14 views
भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद की शक्तियों और उनके निर्वाचन प्रक्रियाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचक गण के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है, जिसमें राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य भी भाग लेते हैं।
- 2. संविधान के अनुच्छेद 75(3) के प्रावधान के अनुसार मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, जिसका तात्पर्य यह है कि लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर केवल प्रधानमंत्री को त्यागपत्र देना पड़ता है, और मंत्रिपरिषद के अन्य मंत्रियों को अपने पद पर बने रहने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त रहता है।
- 3. अनुच्छेद 88 के अंतर्गत प्रधानमंत्री और अन्य मंत्री किसी भी सदन में, दोनों सदनों की संयुक्त बैठकों में, और संसद की किसी भी समिति के सदस्य के रूप में भाग ले सकते हैं और बोल सकते हैं, किंतु उन्हें उस सदन में मतदान देने का अधिकार केवल तभी होता है जब वे उस विशिष्ट सदन के निर्वाचित या मनोनीत सदस्य हों।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि उपराष्ट्रपति के निर्वाचन में संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सभी सदस्य (निर्वाचित और मनोनीत दोनों) भाग लेते हैं, जबकि इसमें राज्य विधानसभाओं के सदस्य भाग नहीं लेते हैं (राष्ट्रपति के चुनाव के विपरीत)। कथन 2 असत्य है क्योंकि मंत्रिपरिषद का सामूहिक उत्तरदायित्व लोकसभा के प्रति होता है, और लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पारित होने या सरकार के अल्पमत में आने पर पूरी मंत्रिपरिषद (प्रधानमंत्री सहित) को सामूहिक रूप से त्यागपत्र देना पड़ता है, न कि केवल प्रधानमंत्री को। कथन 3 सत्य है क्योंकि अनुच्छेद 88 के अनुसार प्रत्येक मंत्री और महान्यायवादी को संसद के दोनों सदनों में बोलने और उनकी कार्यवाहियों में भाग लेने का अधिकार है, किंतु मतदान का अधिकार उसी सदन में होता है जिसके वे सदस्य होते हैं। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
Related Questions
→
अनुच्छेद 110 का संबंध?
→
मौलिक अधिकार कहाँ से लिए गए?
→
अनुच्छेद 23 क्या रोकता है?
→
भारतीय संविधान के प्रथम भाग के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 2 के तहत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना ऐसे निबंधनों और शर्तों पर कर सके जो वह ठीक समझे, और इस शक्ति के अंतर्गत भारतीय संघ में किसी विदेशी भू-भाग को शामिल करने के लिए संविधान संशोधन करना अनिवार्य होता है।
2. अनुच्छेद 3 के अंतर्गत संसद को किसी राज्य के क्षेत्र को बढ़ाने, घटाने, उसके नाम या सीमा में परिवर्तन करने की शक्ति प्राप्त है, किंतु इस प्रकार का कोई भी अध्यादेश या विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश के बिना संसद के किसी भी सदन में पुनः स्थापित नहीं किया जा सकता है, तथा राष्ट्रपति इस विधेयक को संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसका मत जानने के लिए भेजता है, जो राष्ट्रपति या संसद पर बाध्यकारी होता है।
3. 'बेरूबारी संघ मामला (1960)' में उच्चतम न्यायालय ने यह निर्धारित किया था कि भारतीय संघ के किसी भू-भाग को किसी अन्य देश को सौंपने (Cession of territory) के लिए अनुच्छेद 3 के अंतर्गत संसद द्वारा साधारण बहुमत से साधारण विधि पारित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन अधिनियम पारित करना अनिवार्य है।
4. संविधान के अनुच्छेद 4 के अनुसार अनुच्छेद 2 और अनुच्छेद 3 के अधीन नए राज्यों के प्रवेश, स्थापना, सीमा परिवर्तन आदि से संबंधित विधियों को अनुच्छेद 368 के प्रयोजन के लिए संविधान का संशोधन नहीं माना जाएगा, जिसका अर्थ है कि ऐसी विधियाँ साधारण बहुमत और सामान्य विधायी प्रक्रिया द्वारा ही पारित की जा सकती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSC) के अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति, पदावधि, निष्कासन तथा आयोग की स्वायत्तता से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 316 के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है, और दोनों के मामलों में यह संवैधानिक अनिवार्यता है कि आयोग के आधे सदस्यों के पास केंद्र या राज्य सरकार के अधीन कम से कम दस वर्ष का प्रशासनिक अनुभव होना चाहिए।
2. संविधान के अनुच्छेद 317 के अंतर्गत संघ या राज्य लोक सेवा आयोग के किसी अध्यक्ष या सदस्य को केवल राष्ट्रपति द्वारा ही साबित कदाचार या असमर्थता के आधार पर उसके पद से हटाया जा सकता है, भले ही वह राज्य लोक सेवा आयोग का सदस्य या अध्यक्ष क्यों न हो, और इस प्रक्रिया में उच्चतम न्यायालय द्वारा जाँच किए जाने का प्रावधान अनिवार्य किया गया है।
3. संघ लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष अपने पद की अवधि समाप्त होने के पश्चात भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी अन्य कार्यालय या पद को ग्रहण करने के लिए पूर्णतः अपात्र (Ineligible) होता है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष अपने कार्यकाल की समाप्ति पर संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य के रूप में अथवा किसी अन्य राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त होने के लिए पात्र होता है, किंतु वह भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य नियोजन का पात्र नहीं होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.