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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) और अधीनस्थ न्यायालयों (Subordinate Courts) की शक्तियों, संरचना तथा क्षेत्राधिकार के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 227 के अनुसार प्रत्येक उच्च न्यायालय को अपने प्रादेशिक क्षेत्राधिकार के भीतर सभी न्यायालयों और अधिकरणों (Tribunals) पर अधीक्षण (Superintendence) करने की शक्ति प्राप्त है, और इस शक्ति में केवल प्रशासनिक नियंत्रण ही शामिल है, जबकि न्यायिक अधीक्षण या पुनरीक्षण (Judicial Superintendence) का अधिकार उच्च न्यायालय के पास नहीं होता है।
- 2. संविधान के अनुच्छेद 233 के अंतर्गत किसी राज्य में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और पदोन्नति उस राज्य के राज्यपाल द्वारा राज्य के उच्च न्यायालय से परामर्श करके की जाती है, तथा जिला न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने वाले व्यक्ति के लिए यह आवश्यक है कि वह कम से कम सात वर्ष तक अधिवक्ता या प्लीडर रहा हो और संघ या राज्य की न्यायिक सेवा में पहले से सेवारत न हो।
- 3. अनुच्छेद 239 नहीं बल्कि संविधान के अनुच्छेद 236 के निर्वचन के तहत 'जिला न्यायाधीश' की परिभाषा में नगर सिविल न्यायालय का न्यायाधीश, अपर जिला न्यायाधीश, संयुक्त जिला न्यायाधीश, सहायक जिला न्यायाधीश, लघु वाद न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश, मुख्य प्रजि magistrate और सत्र न्यायाधीश आदि सम्मिलित किए गए हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 227 के अंतर्गत उच्च न्यायालय को अपने क्षेत्राधिकार के सभी न्यायालयों और अधिकरणों पर अधीक्षण की जो शक्ति प्राप्त है, उसमें प्रशासनिक अधीक्षण के साथ-साथ न्यायिक अधीक्षण (Judicial Superintendence) की शक्ति भी व्यापक रूप से शामिल है। उच्च न्यायालय यह देख सकता है कि अधीनस्थ अदालतें अपनी अधिकार सीमा में रहकर कार्य कर रही हैं या नहीं। कथन 2 बिल्कुल सही है; अनुच्छेद 233 के अनुसार जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा उच्च न्यायालय के परामर्श से की जाती है और इसके लिए व्यक्ति का कम से कम 7 वर्ष का अधिवक्ता/प्लीडर होना तथा केंद्र या राज्य की सेवा में पहले से न होना अनिवार्य अर्हता है। कथन 3 असत्य है क्योंकि अनुच्छेद 236 में 'जिला न्यायाधीश' की परिभाषा दी गई है, किंतु 'संघ राज्य क्षेत्रों के प्रशासन' से संबंधित अनुच्छेद 239 का इस परिभाषा से कोई संबंध नहीं है। इस प्रकार केवल कथन 2 सही है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 69 के अनुसार प्रत्येक उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति या उसके द्वारा इस प्रयोजन के लिए नियुक्त किसी व्यक्ति के समक्ष शपथ या प्रतिज्ञान लेगा और उस पर हस्ताक्षर करेगा, तथा उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों के सभी सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचकगण के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है, जिसमें राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित और मनोनीत सदस्य भाग नहीं लेते हैं।
2. अनुच्छेद 75(3) के प्रावधानों के अनुसार मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, और इस सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धांत का अर्थ यह है कि लोकसभा में प्रधानमंत्री या किसी अन्य मंत्री के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर संपूर्ण मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना होता है, तथा कोई भी मंत्री व्यक्तिगत रूप से राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत अपने पद पर रहता है।
3. अनुच्छेद 78 के अंतर्गत प्रधानमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह संघ के प्रशासन से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राष्ट्रपति को संसूचित करे तथा राष्ट्रपति द्वारा माँगी गई प्रशासनिक और विधायी मामलों की सूचनाएँ प्रदान करे, किंतु यदि राष्ट्रपति किसी ऐसे विषय पर मंत्रिपरिषद के विचारार्थ प्रस्तुत करने को कहे जिस पर किसी मंत्री ने विनिश्चय कर लिया है किन्तु मंत्रिपरिषद ने विचार नहीं किया है, तो प्रधानमंत्री ऐसा करने के लिए बाध्य नहीं है।
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भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद को डॉ. अंबेडकर ने "संविधान की आत्मा" कहा था?
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