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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग-IV के अंतर्गत वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 39(b) और 39(c) में निहित समाजवादी सिद्धांतों के क्रियान्वयन के लिए बनाई गई विधियों को केवल इस आधार पर अमान्य नहीं किया जा सकता है कि वे अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों का उल्लंघन करती हैं, बशर्ते उन्हें अनुच्छेद 31C का संरक्षण प्राप्त हो।
  2. 2. सर्वोच्च न्यायालय ने 'मिनर्वा मिल्स वाद' (1980) के निर्णय में यह स्पष्ट रूप से अभिनिर्धारित किया था कि संविधान के मूल ढांचे (Basic Structure) को बनाए रखने के लिए भाग-III (मूल अधिकार) और भाग-IV (नीति निर्देशक तत्व) के बीच संतुलन का होना अनिवार्य है, और इनमें से किसी एक को दूसरे पर पूर्ण प्राथमिकता नहीं दी जा सकती।
  3. 3. यद्यपि नीति निर्देशक तत्व देश के शासन में मौलिक हैं और देश की विधि बनाने में इन तत्वों को लागू करना राज्य का कर्तव्य है, तथापि संविधान के अनुच्छेद 37 के अनुसार इन्हें किसी भी न्यायालय द्वारा बलपूर्वक प्रवर्तित (Enforceable) कराया जा सकता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: 25वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1971 द्वारा अनुच्छेद 31C को अंतःस्थापित किया गया था, जिसके तहत यह प्रावधान किया गया कि यदि कोई कानून समाज के भौतिक संसाधनों के स्वामित्व और नियंत्रण के वितरण (अनुच्छेद 39b) तथा धन के संकेंद्रण को रोकने (अनुच्छेद 39c) के लिए बनाया जाता है, तो उसे इस आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती कि वह अनुच्छेद 14 या 19 का उल्लंघन करता है। कथन 2 सही है: 'मिनर्वा मिल्स वाद' (1980) में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि मूल अधिकार और नीति निर्देशक तत्व एक-दूसरे के पूरक हैं तथा इनके बीच का संतुलन संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा है। कथन 3 गलत है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 37 में स्पष्ट रूप से यह उपबंध किया गया है कि नीति निर्देशक तत्व देश के शासन में मौलिक अवश्य हैं, किंतु इन्हें किसी भी न्यायालय द्वारा प्रवर्तित (Non-justiciable) **नहीं** कराया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
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