BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
1 views

सिंधु घाटी सभ्यता के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. सैंधव सभ्यता के नगरों में ग्रिड पद्धति (Grid System) का अनुसरण किया जाता था, जहाँ सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं।
  2. 2. लोथल और चान्हूदरो दोनों ही स्थलों से मनके बनाने के कारखाने (Bead-making factories) के अवशेष प्राप्त हुए हैं।
  3. 3. मोहनजोदड़ो से प्राप्त 'पशुपतिनाथ' की मुहर पर हाथी, बाघ, गैंडा और भैंसा के अतिरिक्त दो हिरणों का अंकन भी मिलता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए तीनों कथन सही हैं। सिंधु घाटी सभ्यता की नगर योजना ग्रिड पद्धति पर आधारित थी, जिसमें सड़कें उत्तर से दक्षिण तथा पूरब से पश्चिम की ओर जाती हुई एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं। लोथल और चान्हूदरो दोनों ही स्थलों से मनके (Beads) बनाने के कारखानों के स्पष्ट प्रमाण मिले हैं। इसके अतिरिक्त, मोहनजोदड़ो से प्राप्त पशुपतिनाथ (आद्य-शिव) की प्रसिद्ध मुहर पर योगी की मुद्रा में बैठे देवता के चारों ओर हाथी, बाघ, गैंडा और भैंसा तथा नीचे दो हिरण विराजमान हैं। अधिक जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Share:

Related Questions

1857 के महान विद्रोह के राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक कारणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राजनीतिक कारणों के अंतर्गत लॉर्ड डलहौजी की 'व्यपगत सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति ने सतारा, नागपुर और झाँसी जैसी रियासत्यों के साथ-साथ अवध के अधिग्रहण को भी प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित किया, क्योंकि अवध का विलय कुशासन के आरोप में किया गया था जिससे वहाँ के सैनिकों और पारंपरिक अभिजात वर्ग में गहरा असंतोष फैल गया। 2. सामाजिक और धार्मिक कारणों में वर्ष 1850 में पारित 'धार्मिक अशक्तता अधिनियम' (Religious Disabilities Act) ने ईसाई धर्म अपनाने वाले व्यक्ति को पैतृक संपत्ति से वंचित करने के पुराने हिंदू कानून को बदल दिया, जिससे रूढ़िवादी भारतीयों में यह आशंका उत्पन्न हो गई कि ब्रिटिश सरकार जानबूझकर उनका धर्म परिवर्तन कराना चाहती है। 3. आर्थिक कारणों के तहत ब्रिटिश भू-राजस्व नीतियों और उद्योगों के वि-औद्योगीकरण (De-industrialisation) ने पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा उद्योगों को पूरी तरह तबाह कर दिया, तथा किसानों पर अत्यधिक करों के बोझ ने उन्हें महाजनों के शिकंजे में फँसा दिया, जिससे समाज का हर वर्ग त्रस्त था। 4. सैन्य कारणों में वर्ष 1856 में लॉर्ड कैनिंग द्वारा पारित 'सामान्य सेवा enlistment अधिनियम' (General Service Enlistment Act) ने भारतीय सिपाहियों के लिए समुद्र पार (काला पानी) जाकर सेवा करना अनिवार्य कर दिया, जिसे तत्कालीन पारंपरिक समाज में जाति और धर्मभ्रष्ट होने का प्रतीक माना गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश संसद द्वारा पारित 'भारत सरकार अधिनियम, 1858' और इलाहाबाद दरबार में पढ़ी गई 'क्वीन विक्टोरिया की घोषणा' के प्रभावों तथा प्रावधानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस अधिनियम के तहत भारत का शासन सीधे ब्रिटिश क्राउन के नियंत्रण में आ गया, तथा 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' और 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' की द्वैध शासन प्रणाली को समाप्त कर समस्त शक्तियाँ 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) और उसकी सहायता के लिए गठित पंद्रह सदस्यीय 'इंडियन काउंसिल' को सौंप दी गईं। 2. क्वीन विक्टोरिया की ऐतिहासिक घोषणा में यह स्पष्ट किया गया कि ब्रिटिश सरकार अब भारतीय रियाسतों को हड़पने की अपनी पुरानी विस्तारवादी नीतियों को त्यागती है और देसी राजाओं के दत्तक पुत्र (गोद लेने) लेने के अधिकारों तथा संधियों को पूर्ण मान्यता देती है। 3. घोषणा पत्र में यह आश्वासन दिया गया कि ब्रिटिश सरकार भारत के लोगों की प्राचीन धार्मिक, सामाजिक परंपराओं और रीति-रिवाजों में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी, तथा सार्वजनिक सेवाओं में नियुक्तियों के दौरान नस्ल, वंश या धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा। 4. विद्रोह के दौरान अवध के तालुकदारों और बड़े भूस्वामियों द्वारा अंग्रेजों के विरुद्ध अत्यधिक मुखर प्रतिरोध किए जाने के बावजूद, ब्रिटिश सरकार ने दंडात्मक कार्रवाई से बचते हुए अवध के समस्त तालुकदारों की भूमि को हमेशा के लिए सुरक्षित रखा और उनकी खोई हुई सारी जागीरें बिना किसी शर्त के वापस लौटा दीं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्धन राजवंश एवं पल्लव-चालुक्य संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हर्षवर्द्धन ने थानेश्वर से अपनी राजधानी कन्नौज स्थानांतरित की थी, और उसने अपने साम्राज्य के विस्तार के लिए कामरूप के राजा भास्करवर्मा के साथ मैत्री संबंध स्थापित किए थे, तथा वल्लभी के शासक ध्रुवसेन द्वितीय को अपनी पुत्री के विवाह के माध्यम से अपने प्रभाव क्षेत्र में मिलाया था। 2. नर्मदा नदी के तट पर हुए ऐतिहासिक युद्ध में चालुक्य सम्राट पुलकेशिन द्वितीय ने हर्षवर्द्धन की अजेय विजय यात्रा को रोक दिया था, जिसका प्रत्यक्ष विवरण पुलकेशिन द्वितीय के ऐहोल अभिलेख में मिलता है जिसकी रचना उसके दरबारी कवि रविचर्ति ने की थी। 3. पल्लव शासक महेंद्रवर्मन प्रथम, जो पहले जैन धर्म का अनुयायी था, समकालीन शैव संत अप्पर (तिरुनावुक्करासर) के प्रभाव में आकर शैव धर्म का उपासक बन गया और उसने त्रिचिरापल्ली में प्रसिद्ध रॉक-कट (चट्टान को काटकर बनाए गए) मंदिरों का निर्माण करवाया था। 4. कांची के पल्लव वंश के शासक नरसिंहवर्मन प्रथम (महामल) ने वातापी (बादामी) पर आक्रमण कर चालुक्य नरेश पुलकेशिन द्वितीय को पराजित किया और 'वातापिकोण्ड' की उपाधि धारण की, तथा महाबलीपुरम में प्रसिद्ध रथ मंदिरों के निर्माण की शुरुआत की। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मराठा साम्राज्य के पतन का सबसे प्रमुख राजनैतिक कारण क्या था? मध्यकालीन भारत के भक्ति और सूफी आंदोलनों तथा उनके प्रमुख विचारकों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. दक्षिण भारत के अलवार (विष्णु भक्त) और नयनार (शिव भक्त) संतों ने भक्ति आंदोलन की नींव रखी थी, तथा उन्होंने जाति व्यवस्था का कड़ा विरोध करते हुए तमिल भाषा को अपने उपदेशों और भजनों का माध्यम बनाया। 2. सूफी संत मइनुद्दीन चिश्ती द्वारा स्थापित चिश्ती सिलसिले ने शाही संरक्षण (पैट्रोनटेज) को अनिवार्य रूप से स्वीकार किया और सुल्तानों के दरबार में उच्च पदों को प्राप्त कर राज्य की नीतियों को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित किया। 3. महाराष्ट्र के वारकरी संप्रदाय के प्रमुख संत ज्ञानेश्वर (ज्ञानेश्वरी के रचयिता) और तुकाराम ने पंढरपुर के विठोबा (विट्ठल) की उपासना पर बल दिया तथा कर्मकांडों और संस्कृत भाषा के एकाधिकार को चुनौती दी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.