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History of India
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मुगल कालीन प्रशासनिक और राजस्व व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. अकबर के शासनकाल में राजा टोडरमल द्वारा प्रारंभ की गई 'दहसाला' (ज़बती) व्यवस्था के तहत पिछले दस वर्षों के उत्पादन और उसके औसत मूल्यों का आकलन करके राजस्व का निर्धारण किया जाता था।
- 2. शाहजहां के शासनकाल में कृषि भूमि के वर्गीकरण के अंतर्गत 'पोलज' वह भूमि थी जिस पर लगातार खेती की जाती थी और उसे कभी भी खाली नहीं छोड़ा जाता था।
- 3. औरंगजेब के शासनकाल में जारी किए गए प्रसिद्ध 'मुहम्मद हाशमी फरमान' या प्रशासनिक निर्देशों के अनुसार, किसानों को खेती के लिए प्रोत्साहित करने हेतु तकावी (टाकावी) ऋण दिए जाने और आवश्यकता पड़ने पर भू-राजस्व में छूट या राहत देने का प्रावधान था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि अकबर के शासनकाल में 1580 ई. में राजा टोडरमल की देखरेख में 'दहसाला' व्यवस्था (जिसे ज़बती प्रणाली भी कहा जाता है) लागू की गई थी, जिसमें पिछले दस वर्षों के दौरान विभिन्न फसलों के औसत उत्पादन और बाजार मूल्यों के आधार पर मालगुजारी तय की जाती थी। कथन 2 गलत है क्योंकि 'पोलज' वह सर्वोत्तम भूमि थी जिस पर प्रतिवर्ष नियमित रूप से खेती की जाती थी और उसे कभी परती (खाली) नहीं छोड़ा जाता था, जबकि जिस भूमि को कुछ समय के लिए उर्वरता वापस पाने हेतु खाली छोड़ा जाता था उसे 'परती' कहा जाता था। कथन 3 सही है; औरंगजेब ने अपने शासनकाल में कृषि के विस्तार और किसानों की भलाई के लिए कई निर्देश जारी किए थे, जिसके तहत अकाल या प्राकृतिक आपदा के समय किसानों को 'तकावी' (कृषि ऋण) देने तथा राजस्व में रियायत देने का स्पष्ट प्रावधान था। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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छठी शताब्दी ईसा पूर्व के 'सोलह महाजनपदों' और उनके भौगोलिक तथा राजनीतिक स्वरूप के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अंग महाजनपद की राजधानी चंपा थी, जो अपने व्यापारिक महत्व के लिए प्रसिद्ध थी, और इस महाजनपद को मगध के शासक बिम्बिसार द्वारा विजित कर लिया गया था।
2. वज्जि संघ आठ कुलों का एक संघ (Confederacy) था, जिसमें लिच्छवि और विदेह सबसे प्रमुख थे, तथा इसकी राजधानी वैशाली थी जो विश्व के प्राचीनतम गणतंत्रों में से एक मानी जाती है।
3. अवंती महाजनपद दो भागों में विभाजित था—उत्तरी अवंती की राजधानी उज्जैन और दक्षिणी अवंती की राजधानी माहिष्मती थी, तथा यहाँ के राजा चंडप्रद्योत के साथ मगध शासक बिम्बिसार ने अपने राजवैद्य जीवक को चिकित्सा के लिए भेजा था।
4. वत्स महाजनपद की राजधानी कौशाम्बी थी, और इसके शासक उदयन गौतम बुद्ध के समकालीन थे, जिनके राज्य का उल्लेख बौद्ध ग्रंथों में नहीं मिलता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में बौद्ध धर्म और जैन धर्म के दार्शनिक और संस्थागत विकास के निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बौद्ध धर्म के प्रथम उपदेश (धर्मचक्रप्रवर्तन) के समय संघ की स्थापना सारनाथ में हुई थी, जबकि जैन धर्म में तीर्थंकर महावीर द्वारा जैन संघ की स्थापना पावापुरी में अपने अंतिम समय में की गई थी, जिसके प्रथम प्रमुख (थेर) सुधर्मन बने थे।
2. बौद्ध संघ की सदस्यता के लिए न्यूनतम आयु सीमा 15 वर्ष निर्धारित की गई थी, जबकि जैन संघ में प्रवेश के लिए ऐसा कोई आयु प्रतिबंध नहीं था और चातुर्यम धर्म (जो पार्श्वनाथ द्वारा दिया गया था) में महावीर ने 'ब्रह्मचर्य' को जोड़कर इसे पंचमहाव्रत बना दिया था।
3. बौद्ध धर्म के विपरीत जैन धर्म ने 'सद्वाद' (अनेकांतवाद या सप्तभंगीनय) के सिद्धांत को प्रतिपादित किया, जिसके अनुसार किसी भी वस्तु के सत्य का पूर्ण ज्ञान केवल केवलियों को ही हो सकता है, क्योंकि साधारण मनुष्य का ज्ञान सापेक्ष होता है।
4. बौद्ध संगीति और जैन संगीति दोनों के संदर्भ में, द्वितीय बौद्ध संगीति का आयोजन वैशाली में कालाशोक के शासनकाल में हुआ था, जबकि प्रथम जैन संगीति पाटलिपुत्र में स्थूलभद्र की अध्यक्षता में हुई थी, जिसमें जैन ग्रंथों का संकलन कर '12 अंगों' का निर्माण किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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"सरदेशमुखी" कर, जो शिवाजी स्वयं को दक्कन का वंशानुगत स्वामी मानकर वसूलते थे, कितना था?
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना (1885) से लेकर सूरत विभाजन (1907) तक के कालखंड में नरम दल और गरम दल के वैचारिक संघर्ष, रणनीतियों और उद्देश्यों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नरमपंथियों (Moderate Phase) की प्रमुख राजनीतिक कार्यप्रणाली '3P' (Prayer, Petition and Protest - प्रार्थना, याचिका और विरोध) पर आधारित थी, तथा वे ब्रिटिश शासन को भारत के लिए वरदान मानते हुए औपनिवेशिक स्वराज्य (Colonial Self-Government) की मांग ब्रिटिश न्यायप्रियता के दायरे में रहकर करते थे।
2. वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन के पश्चात गरम दल के नेताओं (लाल-बाल-पाल और अरविंद घोष) ने स्वदेशी, बहिष्कार, राष्ट्रीय शिक्षा और 'स्वराज' (पूर्ण स्वशासन) के प्रस्तावों को केवल बंगाल तक सीमित रखने का समर्थन किया ताकि राष्ट्रव्यापी दमन से बचा जा सके।
3. वर्ष 1906 के कलकत्ता (कोलकाता) अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी की अध्यक्षता में कांग्रेस ने पहली बार 'स्वराज' शब्द को अपने राजनीतिक लक्ष्य के रूप में स्वीकार किया, किंतु गरम दल और नरम दल के बीच वैचारिक मतभेदों के कारण यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित नहीं हो सका था।
4. सूरत के 1907 के वार्षिक अधिवेशन में कांग्रेस के अध्यक्ष पद के निर्वाचन को लेकर हुए विवाद के पश्चात कांग्रेस का विभाजन हो गया, जिसमें गरम दल के नेता रास बिहारी घोष को कांग्रेस का नया अध्यक्ष बनाया गया जबकि नरमपंथियों ने बाल गंगाधर तिलक को इस पद के लिए प्रस्तावित किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मुगल शासन में "काजी":
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